संस्कृति की छटा, मांड़ गायकी पर झूम उठे देशभर से आए डॉक्टर और उनके परिजन


के कुमार आहूजा  2026-10-24 05:19:40



पधारो म्हारे देश! बीकानेर के रेतीले धोरों पर राजस्थानी लोक संस्कृति की छटा, मांड़ गायकी पर झूम उठे देशभर से आए डॉक्टर और उनके परिजन

राजस्थान की मेहमाननवाजी ने जीता दिल, लोकगीतों और लोकनृत्य के बीच विदेशी नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से आए मेहमानों ने महसूस की मरुधरा की अनूठी संस्कृति

बीकानेर, 23 अक्टूबर। ‘पधारो म्हारे देश’ की परंपरा को साकार करते हुए बीकानेर ने एक बार फिर अपनी सांस्कृतिक विरासत, आत्मीय मेहमाननवाजी और लोककलाओं से देशभर से आए मेहमानों का दिल जीत लिया। भारतीय चर्म, रति एवं कुष्ठ रोग विशेषज्ञ संगठन के 47वें राज्य स्तरीय दो दिवसीय वार्षिक सम्मेलन में भाग लेने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से बीकानेर पहुंचे 450 से अधिक चिकित्सकों और उनके परिजनों के लिए शुक्रवार की शाम यादगार बन गई। शहर के रेतीले धोरों पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में जब राजस्थान के प्रसिद्ध लोक कलाकार अली गनी ने पारंपरिक राजस्थानी मांड़ गायकी के लोकगीतों की स्वर लहरियां बिखेरीं, तो वहां मौजूद चिकित्सक और उनके परिजन खुद को थिरकने से रोक नहीं सके। राजस्थानी लोकगीतों की मिठास और लोकनृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया।

मांड़ गायकी ने बांधा समां, लोकगीतों पर झूमे मेहमान

रेतीले धोरों पर सजी इस सांस्कृतिक संध्या में राजस्थानी लोक संगीत की मधुर धुनों ने मरुधरा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया। लोक कलाकार अली गनी ने अपनी सुरीली आवाज में मांड़ गायकी के पारंपरिक गीत प्रस्तुत किए। इन गीतों में राजस्थान की मिट्टी की खुशबू, लोकजीवन की सरलता और यहां की सांस्कृतिक परंपराओं की झलक देखने को मिली।

राजस्थानी लोकगीतों की धुन सुनकर देश के विभिन्न राज्यों से आए चिकित्सक और उनके परिवार के सदस्य उत्साह से झूम उठे। किसी ने तालियों के साथ कलाकारों का उत्साह बढ़ाया, तो किसी ने राजस्थानी लोकधुनों पर थिरककर इस शाम को यादगार बना दिया। कार्यक्रम में प्रस्तुत राजस्थानी लोकनृत्य ने भी सभी का मन मोह लिया।

पहली बार बीकानेर आए चिकित्सकों के लिए यादगार अनुभव

बीकानेर पहली बार पहुंचे कई चिकित्सकों और उनके परिजनों के लिए रेतीले धोरों का प्राकृतिक सौंदर्य, पारंपरिक राजस्थानी संगीत और लोकनृत्य एक नया और रोमांचक अनुभव रहा। सम्मेलन में चिकित्सा विज्ञान से जुड़े विषयों पर चर्चा और ज्ञान के आदान-प्रदान के साथ इस सांस्कृतिक आयोजन ने उन्हें राजस्थान की जीवनशैली और लोक परंपराओं को करीब से जानने का अवसर दिया।

रेत के टीलों के बीच राजस्थानी संस्कृति की जीवंत प्रस्तुतियों ने मेहमानों को यह अहसास कराया कि राजस्थान की पहचान केवल अपने ऐतिहासिक किलों, महलों और रेगिस्तान तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां के लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक संगीत और अतिथि सत्कार भी इसकी विशिष्ट पहचान हैं।

चिकित्सकों ने मेहमाननवाजी में नहीं छोड़ी कोई कमी

सम्मेलन में शामिल चिकित्सकों और उनके परिजनों के स्वागत तथा उनके लिए राजस्थानी संस्कृति से परिचित कराने की व्यवस्था में बीकानेर के चिकित्सा जगत से जुड़े प्रमुख चिकित्सकों ने विशेष भूमिका निभाई। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश दत्त मेहता, डॉ. बी.सी. घिया, डॉ. मोहित बंसल, डॉ. प्रसून सोनी, डॉ. सौरभ अग्रवाल, डॉ. दीपिका सिंह और डॉ. राधेश्याम सहित अन्य चिकित्सकों ने अतिथियों के स्वागत-सत्कार में कोई कमी नहीं छोड़ी।

आयोजकों और स्थानीय चिकित्सकों का प्रयास रहा कि सम्मेलन में भाग लेने के लिए आए मेहमान केवल चिकित्सा क्षेत्र से संबंधित गतिविधियों तक सीमित न रहें, बल्कि बीकानेर की सांस्कृतिक विरासत, लोक कलाओं और पारंपरिक मेहमाननवाजी का भी अनुभव प्राप्त करें।

चिकित्सा सम्मेलन के साथ संस्कृति का संगम

भारतीय चर्म, रति एवं कुष्ठ रोग विशेषज्ञ संगठन के 47वें राज्य स्तरीय वार्षिक सम्मेलन ने चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाने के साथ बीकानेर की सांस्कृतिक पहचान को भी देशभर के लोगों तक पहुंचाने का अवसर प्रदान किया है। सम्मेलन में शामिल 450 से अधिक चिकित्सकों और उनके परिजनों के लिए रेतीले धोरों पर आयोजित यह सांस्कृतिक संध्या आपसी मेल-मिलाप, मनोरंजन और राजस्थानी लोक परंपराओं से जुड़ने का माध्यम बनी।

राजस्थानी मांड़ गायकी की स्वर लहरियों, लोकनृत्य की आकर्षक प्रस्तुतियों और बीकानेर की आत्मीय मेहमाननवाजी ने इस आयोजन को खास बना दिया। रेतीले धोरों पर बिताई गई यह शाम मेहमानों के लिए बीकानेर की यादों में लंबे समय तक जीवंत रहने वाला अनुभव बन गई।@all


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