पर्यटन उद्योग आर्थिक विकास को गति देने वाला महत्ती क्षेत्र-प्रोफेसर डॉ. नरसिंह बिनानी.
के कुमार आहूजा 2026-09-27 19:06:31

*अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन दिवस के अवसर पर डॉ. शंकरलाल स्वामी की यात्रा वृत्तांत पुस्तक "धर्मक्षेत्रे-कर्मक्षेत्रे" पर पुस्तक चर्चा का आयोजन*
पर्यटन उद्योग आर्थिक विकास को गति देने वाला महत्ती क्षेत्र-प्रोफेसर डॉ. नरसिंह बिनानी.
नत्थुसर बास स्थित स्वामी सदन में राजस्थान साहित्य चेतना मंच द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन दिवस के अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार व चिकित्सक डॉ शंकरलाल स्वामी की यात्रा वृत्तांत पुस्तक "धर्मक्षेत्रे-कर्मक्षेत्रे" पर पुस्तक चर्चा कार्यक्रम अत्यंत गरिमामय ढंग से आयोजित किया गया । कार्यक्रम के अध्यक्ष पूर्व प्रिंसिपल, चिंतक व लेखक प्रोफेसर डॉ. नरसिंह बिनानी थे । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान साहित्य चेतना मंच के संस्थापक व अध्यक्ष वरिष्ठ कवि जुगल किशोर पुरोहित व विशिष्ट अतिथि लेखक-कथाकार उमा शंकर बागड़ी रहे । पुस्तक चर्चा कार्यक्रम के द्वय प्रमुख वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार व कवि डॉ. जगदीश दान बारहठ और शिक्षाविद डॉ. कृष्णा गहलोत रही ।
पुस्तक चर्चा कार्यक्रम में अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में पूर्व प्रिंसिपल, चिंतक व लेखक प्रोफेसर डॉ. नरसिंह बिनानी ने कहा कि हमारे देश में पर्यटन का अत्यंत व्यापक महत्व हैं। पर्यटन क्षेत्र परिवार, समाज, राष्ट्र सहित साहित्यिक, सांस्कृतिक, धार्मिक आदि की दृष्टि से उपयोगी है । आज पर्यटन उद्योग आर्थिक विकास को गति देने वाला महत्ती क्षेत्र माना जाता है । वर्तमान समय में युवाओं को रोजगार- स्वरोजगार देने में पर्यटन उद्योग का अद्वितीय योगदान है । प्रोफेसर डॉ. बिनानी ने कहा कि डॉ. शंकरलाल स्वामी की इस पुस्तक में भारत के विभिन्न धार्मिक तथा सांस्कृतिक स्थलों के उनके यात्रा संस्मरणों से जुड़े विभिन्न वृतान्तों व पहलुओं को केंद्र में रखा गया है । उन्होंने कहा कि संस्मरण व यादगार दृष्टिकोण से लिखी गई यह पुस्तक देश की धार्मिक तथा सांस्कृतिक विरासत को नए व ऐतिहासिक संदर्भों में सामने लाती है। प्रोफेसर डॉ. बिनानी ने कहा कि डॉ. शंकरलाल स्वामी की यह पुस्तक एक ओर पाठकों, विशेषतः युवाओं को देश के लोकप्रिय व आस्था के विभिन्न स्थानों की पर्याप्त जानकारी देती है, वहीं दूसरी ओर यात्रा-वृत्तांत के सजीव प्रस्तुतीकरण से उनके ज्ञान, मनोरंजन और मानसिक संतोष में अभिवृद्धि करने में सक्षम प्रतीत होती है ।
समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए वरिष्ठ कवि जुगल किशोर पुरोहित ने कहा कि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शंकर लाल स्वामी ने अपने पर्यटन अनुभवों पर आधारित "धर्मक्षेत्रे-कर्मक्षेत्रे" पुस्तक के माध्यम से धर्म, कर्म और भारतीय संस्कृति के पावन तीर्थों का उल्लेख करते हुए तीर्थयात्रा के पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व को उजागर किया है। उन्होने भारत के पर्यटन स्थानों को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि देश के विकास में पर्यटन का भी योगदान रहता है । डॉ. शंकर लाल स्वामी ने इस पुस्तक के माध्यम से भारत के महत्वपूर्ण तीर्थों का भी वर्णन किया है,जो हमारी सांस्कृतिक विरासत है ।
पुस्तक चर्चा कार्यक्रम के दौरान लेखक डॉ. शंकरलाल स्वामी ने कहा कि पर्यटन मनुष्य के जीवन का अभिन्न अंग है। मनुष्य में विभिन्न स्थानों की जानकारी की लालसा सदैव बनी रहती है। भारतीय लोगों में तीर्थ स्थलों की यात्रा का अधिक चाव रहता है। वैसे विभिन्न देशों, तीर्थ स्थानों, प्राकृतिक स्थलों, महानगरों और प्राकृतिक छटा से समृद्ध भू-भागों की यात्राएं मनुष्य का मनोरंजन के साथ ज्ञानार्जन में भी सहायक होती है । डॉ.शंकरलाल स्वामी ने अपनी पुस्तक "धर्मक्षेत्रे-कर्मक्षेत्रे" की विषय सामग्री का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह मेरे यात्रा संस्मरणों की तीसरी पुस्तक है । उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के प्रसिद्ध धामों यथा केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री आदि के मेरे यात्रा संस्मरण इसमें शामिल किए गए हैं ।
डॉ. स्वामी ने बताया कि हिमाचल प्रदेश की अनेक पवित्र देवियों के दर्शनीय स्थान यथा ज्वालामुखी, नैनादेवी, चामुण्डा देवी आदि; जम्मू-कश्मीर, वैष्णोदेवी, भाखड़ा डैम, कुल्लू, मनाली, रोहतांग, चण्डीगढ़ आदि यात्राओं के संस्मरण भी इसमें सम्मिलित हैं। इसके साथ साथ एलोरा और श्रीरंगम की यात्राओं के संस्मरण भी इस पुस्तक में समाहित करने का प्रयास किया गया हैं। उन्होंने बताया कि सूर्यग्रहण के अवसर पर कुरुक्षेत्र तीर्थ-स्थल की यात्रा का विशेष संस्मरण भी इस पुस्तक में शामिल है। डॉ. स्वामी ने कहा कि उनकी अलग अलग समय में की गई यात्राओं के भिन्न-भिन्न संस्मरण इस पुस्तक में समाहित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि पाठकों के ज्ञानार्जन के साथ- साथ इन यात्रा संस्मरणों को, यात्रा पर जाने से पूर्व पठन से पर्यटकों को पर्याप्त मार्गदर्शन भी मिल सकता है।
पुस्तक चर्चा कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि लेखक-कथाकार उमा शंकर बागड़ी ने कहा कि पर्यटन बाह्य दुनिया का ज्ञान प्राप्त करने का एक माध्यम है । समाज के लोगों के साथ मेल मिलाप करने के लिए एक ओर जहां पर्यटन आवश्यक है वहीं दूसरी ओर जीवन में आने वाली नीरसता भी पर्यटन से दूर हो जाती है । इस दृष्टि से डॉ. शंकर लाल स्वामी के पर्यटन के यथार्थ अनुभवों पर आधारित "धर्मक्षेत्रे-कर्मक्षेत्रे" पुस्तक पाठकों के लिए एक धरोहर के समान है ।
समारोह में पुस्तक चर्चा के प्रमुख वक्ता के रूप में बोलते हुए वरिष्ठ साहित्यकार व कवि डॉ. जगदीश दान बारहठ ने कहा कि पर्यटन का हमारे जीवन से बहुत गहरा संबंध है । हमारे प्राचीन ग्रंथों रामायण, महाभारत, पुराणों आदि में देशाटन का उल्लेख मिलता है । इस दृष्टि से डॉ. शंकर लाल स्वामी की यह यात्रा वृत्तांत पुस्तक अत्यंत सराहनीय है ।
समारोह में पुस्तक चर्चा के प्रमुख वक्ता के रूप में बोलते हुए शिक्षाविद डॉ. कृष्णा गहलोत ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यटन उद्योग जगत का महत्वपूर्ण आय का स्रोत बन गया है। बहुत से ऐसे न सिर्फ राज्य जैसे जम्मू-कश्मीर आदि अपितु, कुछ देश भी हैं, जैसे वियतनाम आदि जिनकी अर्थव्यवस्था में पर्यटन उद्योग का महत्वपूर्ण योगदान है । डॉ. कृष्णा गहलोत ने कहा कि डॉ. शंकर लाल स्वामी की "धर्मक्षेत्रे-कर्मक्षेत्रे" नामक यह पुस्तक इस तथ्य को रेखांकित करती है कि पर्यटन उद्योग में अभी अपार संभावनाएं है । उन्होंने बताया कि वर्तमान "लोकल के लिए वोकल" नीति की भावना के अनुरूप पर्यटन क्षेत्र स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का माध्यम बना हुआ है। अति पर्वतीय प्रदेश या अति मरुस्थलीय भू-भाग पर्यटन से आय के महत्वपूर्ण स्रोत भी है। इसके पश्चात उपस्थित पर्यटन प्रेमियों ने राजस्थान सहित देश-विदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों एवं ऐतिहासिक धरोहरों पर विचार-विमर्श किया ।
इस अवसर पर इंजी. भानेश्वर स्वामी, सुनीता देवी, अहमदाबाद प्रवासी इंजी. विशाल, कोमल स्वामी, वैभव, दिनेश वैष्णव, राधा स्वामी, खुशी वैष्णव, दिव्या कुमारी, जयपुर से ऑनलाइन डॉ. श्रीकांत स्वामी सहित अनेक पर्यटन प्रेमी एवं अन्य गणमान्य जन उपस्थिति थे । अंत में छात्रा कुo दिव्या वैष्णव ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया । कार्यक्रम का संचालन नीट छात्रा खुशी वैष्णव ने किया ।








