ओडिशा के काइपादर में साम्प्रदायिक सद्भाव का प्रतीक पीर बाबा की दरगाह
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-03-28 19:53:10

ओडिशा के खुर्दा जिले में स्थित काइपादर बाबा की दरगाह एक अनूठा स्थल है, जहां हिन्दू और मुस्लिम समुदाय मिलकर श्रद्धा और प्रेम से पूजा अर्चना करते हैं। यह स्थान साम्प्रदायिक सद्भाव और एकता का प्रतीक बन चुका है, जहां विभिन्न धर्मों के लोग एक साथ मिलकर बाबा की महिमा का गुणगान करते हैं। आइए जानते हैं इस अद्भुत स्थान की विशेषताओं के बारे में।
काइपादर बाबा की दरगाह: एक ऐतिहासिक दृष्टि
काइपादर, खुर्दा से लगभग 14 किलोमीटर दूर स्थित एक छोटा सा गांव है, जिसकी जनसंख्या लगभग 5,000 है, जिसमें से लगभग 21 प्रतिशत मुस्लिम समुदाय से हैं। यहां स्थित पीर बाबा की दरगाह ओडिशा में सबसे प्रसिद्ध पीर दरगाहों में से एक है, जहां हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग श्रद्धा भाव से आते हैं।
पूजा पद्धति: हिन्दू और मुस्लिम एकता का प्रतीक
दरगाह की देखभाल करने वाले शेख कासिम बताते हैं, "बाबा का उर्स रमजान के 23वें और 24वें दिन मनाया जाता है, जिसमें हिन्दू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी समुदायों के लोग एकत्रित होते हैं।" यहां की एक विशेषता यह है कि प्रसाद बनाने वाला व्यक्ति हिन्दू होता है; मुस्लिम नहीं।
उर्स महोत्सव: धर्मों का संगम
उर्स के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिसमें हिन्दू 'सत्यनारायण पाला' का आयोजन करते हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय कुरान की तिलावत और कव्वाली करते हैं। इस दौरान दोनों समुदाय मिलकर बाबा की समाधि पर चादर चढ़ाते हैं और फूलों की वर्षा करते हैं, जो साम्प्रदायिक सद्भाव का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है।
स्थानीय किंवदंती: राजा और बाबा की मुलाकात
कहा जाता है कि एक बार राजा शेर रामचंद्र देव काइपादर के किले के पास शिकार पर थे, जहां उनकी मुलाकात बाबा से हुई। बाबा की दिव्यता से प्रभावित होकर राजा ने उनकी अनुमति से वहां आश्रम बनवाया और उनकी सेवा की व्यवस्था की।
एकता की मिसाल
काइपादर बाबा की दरगाह आज भी हिन्दू-मुस्लिम एकता और साम्प्रदायिक सद्भाव का प्रतीक बनी हुई है, जहां विभिन्न धर्मों के लोग मिलकर पूजा करते हैं और भाईचारे का संदेश फैलाते हैं।