आरबीआई के नए दिशा-निर्देश: प्राथमिक क्षेत्र उधारी में बदलाव से मिलेगा छोटे उधारकर्ताओं को लाभ


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-03-28 08:04:08



 

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 1 अप्रैल 2025 से लागू होने वाले प्राथमिक क्षेत्र उधारी (PSL) के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन परिवर्तनों का उद्देश्य छोटे उधारकर्ताओं की रक्षा करना, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना और बैंकों द्वारा प्राथमिक क्षेत्र उधारी लक्ष्यों की बेहतर निगरानी सुनिश्चित करना है। आइए, इन नए दिशा-निर्देशों के प्रमुख बिंदुओं पर विस्तृत दृष्टि डालते हैं।​

छोटे ऋणों पर शुल्क संबंधी नए निर्देश

आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि ₹50,000 तक की प्राथमिक क्षेत्र ऋणों पर कोई ऋण संबंधित या अस्थायी सेवा शुल्क/निरीक्षण शुल्क नहीं लिया जाएगा। यह कदम छोटे उधारकर्ताओं पर अनावश्यक वित्तीय बोझ को कम करने और निष्पक्ष उधारी प्रथाओं को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। आरबीआई ने कहा, "​₹50,000 तक की प्राथमिक क्षेत्र ऋणों पर कोई ऋण संबंधित या अस्थायी सेवा शुल्क/निरीक्षण शुल्क नहीं लिया जाएगा।" ​

स्वर्ण ऋणों की प्राथमिक क्षेत्र उधारी में अस्वीकृति

नए दिशा-निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) से बैंकों द्वारा अधिग्रहित स्वर्ण आभूषणों के खिलाफ लिए गए ऋण प्राथमिक क्षेत्र उधारी के तहत नहीं माने जाएंगे। इसका मतलब है कि बैंकों को ऐसे ऋणों को अपने PSL लक्ष्यों के हिस्से के रूप में वर्गीकृत करने की अनुमति नहीं होगी। आरबीआई ने कहा, "​NBFCs से बैंकों द्वारा अधिग्रहित स्वर्ण आभूषणों के खिलाफ लिए गए ऋण प्राथमिक क्षेत्र उधारी के लिए पात्र नहीं होंगे।" ​

ऋण सीमा में वृद्धि और नए क्षेत्रों का समावेश

आरबीआई ने प्राथमिक क्षेत्र उधारी के तहत ऋण सीमाओं में वृद्धि की है। उदाहरण के लिए, व्यक्तिगत गृह ऋण के लिए सीमा ₹10 लाख प्रति उधारकर्ता निर्धारित की गई है। इसके अतिरिक्त, अक्षय ऊर्जा क्षेत्र को प्राथमिक क्षेत्र उधारी में शामिल किया गया है, जिससे इस क्षेत्र में ऋणों के लिए प्राथमिकता प्राप्त होगी। आरबीआई के अनुसार, "​नए दिशा-निर्देशों के तहत, अक्षय ऊर्जा क्षेत्र को प्राथमिक क्षेत्र उधारी में शामिल किया गया है, जिससे इस क्षेत्र में ऋणों के लिए प्राथमिकता प्राप्त होगी।" ​

शहरी सहकारी बैंकों के लिए PSL लक्ष्य में वृद्धि

शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) के लिए प्राथमिक क्षेत्र उधारी लक्ष्य को बढ़ाकर समायोजित शुद्ध बैंक क्रेडिट या ऑफ-बैलेंस शीट एक्सपोजर्स में से जो भी अधिक हो, का 60% कर दिया गया है। यह परिवर्तन इन बैंकों को प्राथमिक क्षेत्र में अधिक क्रेडिट प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित करेगा। ​

Reuters

ऋण निगरानी और अनुपालन में सुधार

आरबीआई ने PSL लक्ष्यों की निगरानी के लिए एक सख्त प्रणाली पेश की है। अब बैंकों को अपनी प्राथमिक क्षेत्र अग्रिमों पर त्रैमासिक और वार्षिक आधार पर विस्तृत डेटा जमा करना होगा। यह डेटा प्रत्येक तिमाही के अंत के 15 दिनों के भीतर और वित्तीय वर्ष के अंत के एक महीने के भीतर जमा करना आवश्यक होगा। यह कदम PSL कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए है।​

कोविड-19 राहत ऋणों की प्राथमिक क्षेत्र उधारी में निरंतरता

आरबीआई ने यह भी पुष्टि की है कि कोविड-19 राहत उपायों के तहत जारी किए गए सभी बकाया ऋण प्राथमिक क्षेत्र उधारी के रूप में वर्गीकृत किए जाएंगे। यह निर्णय उन क्षेत्रों का समर्थन करने के लिए है जो अभी भी महामारी के आर्थिक प्रभाव से उबर रहे हैं।​

आरबीआई के ये नए दिशा-निर्देश वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने, छोटे उधारकर्ताओं की रक्षा करने और प्राथमिक क्षेत्र उधारी में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इन परिवर्तनों से बैंकों को अपने सामाजिक दायित्वों को बेहतर ढंग से निभाने और प्राथमिक क्षेत्रों में अधिक क्रेडिट प्रवाह सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।


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