गणगौर महोत्सव: काछोला में पारंपरिक सेवरा शोभायात्रा, राजस्थानी संस्कृति की अनूठी झलक
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-03-26 06:31:02

राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक गणगौर महोत्सव हर साल अनूठी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष काछोला में माहेश्वरी महिला मंडल ने इस पारंपरिक उत्सव को भव्यता के साथ मनाया, जहां 51 महिलाओं ने सिर पर फूलों से सजा पारंपरिक सेवरा धारण कर शोभायात्रा निकाली। इस शोभायात्रा में लोकगीतों, पारंपरिक नृत्यों और गणगौर माता की पूजा-अर्चना के साथ पूरे कस्बे में हर्षोल्लास का माहौल देखने को मिला।
गणगौर महोत्सव: राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान
गणगौर महोत्सव राजस्थान के सबसे महत्वपूर्ण और पारंपरिक त्योहारों में से एक है, जिसे विशेष रूप से महिलाएँ बड़े उत्साह के साथ मनाती हैं। यह पर्व माँ पार्वती और भगवान शिव के मिलन का प्रतीक है, जिसमें विवाहित महिलाएँ अपने पति की लंबी उम्र और कुंवारी कन्याएँ अच्छे वर की कामना करती हैं। इस वर्ष काछोला में माहेश्वरी महिला मंडल ने भव्य शोभायात्रा निकालकर इस पारंपरिक त्योहार को और खास बना दिया।
पारंपरिक सेवरा शोभायात्रा की अद्भुत झलक
काछोला में माहेश्वरी महिला मंडल द्वारा निकाली गई शोभायात्रा में 51 महिलाओं ने सिर पर फूलों से सजे पारंपरिक सेवरों को धारण किया और पूरे श्रद्धा भाव से गणगौर माता की पूजा-अर्चना की। बैंड-बाजों की धुन पर गणगौर के पारंपरिक लोकगीत गाते हुए महिलाएँ और युवतियाँ नृत्य करते हुए शोभायात्रा में शामिल हुईं। यह यात्रा बस स्टैंड स्थित बाग के बालाजी मंदिर से प्रारंभ होकर सदर बाजार होते हुए भगवान श्री लक्ष्मीनाथ मंदिर पहुंची, जहां विधिवत पूजा संपन्न की गई।
महिला मंडल ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
इस आयोजन में माहेश्वरी महिला मंडल की अध्यक्ष चंद्रकांता मंत्री, सचिव पिंकी मालू, और उपाध्यक्ष पुष्पा गगरानी ने विशेष भूमिका निभाई। इनके मार्गदर्शन में पूरे आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। महिलाओं ने न केवल पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा धारण की बल्कि पूरे आयोजन में राजस्थानी संस्कृति की अद्भुत झलक भी देखने को मिली।
गणगौर के गीतों और भजनों पर झूमे श्रद्धालु
कार्यक्रम के दौरान "कण-कण सूं गूंजे जय जय राजस्थान", "मरुधर थारा देश में उपजे तीन रत्न" और "भंवर माने खेलन दो गणगौर" जैसे राजस्थानी भजनों की गूंज सुनाई दी। इन भजनों पर महिलाओं ने उत्साहपूर्वक नृत्य किया और फूलों की होली खेली। इस दौरान श्रद्धालुओं ने गणगौर माता से सुख-समृद्धि और खुशहाल जीवन की कामना की।
गणगौर माता की पारंपरिक पूजा
भगवान लक्ष्मीनाथ मंदिर में पहुँचकर महिलाओं ने पारंपरिक विधि-विधान से गणगौर माता की पूजा-अर्चना की। इस दौरान सेहरा की विशेष पूजा की गई, जिसमें महिलाएँ अपने परिवार और समाज की खुशहाली के लिए प्रार्थना करती हैं। यह पूजा राजस्थान के परंपरागत रीति-रिवाजों को संरक्षित रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
समाज में सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत बनाए रखने का प्रयास
गणगौर महोत्सव केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का भी एक जरिया है। माहेश्वरी महिला मंडल इस आयोजन के माध्यम से समाज की नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने का कार्य कर रहा है। ऐसे आयोजनों से युवा पीढ़ी को अपनी समृद्ध विरासत के प्रति जागरूक बनाया जाता है।
समापन और स्नेह भोज का आयोजन
शोभायात्रा और पूजा-अर्चना के बाद महिलाओं के लिए विशेष स्नेह भोज का आयोजन किया गया। इसमें सभी ने एक साथ भोजन ग्रहण किया और एक-दूसरे के साथ पर्व की खुशियाँ साझा कीं। अंत में माहेश्वरी महिला मंडल की सचिव पिंकी मालू ने सभी का आभार व्यक्त किया और इस तरह यह भव्य आयोजन सफलता पूर्वक संपन्न हुआ।
रिपोर्ट - पंकज पोरवाल, भीलवाड़ा।