प्रधान मंत्री जी मन की बात में अपने मन की कह देते है लेकिन कभी प्रेस- कॉन्फ़्रेस कर पत्रकारो की मन की बात नहीं सुनते। पत्रकार बैचारे अपनी मन की बात अखबारों में छाप लेते है लेकिन उनके लिखे पर कोई गौर नहीं


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-03-25 17:33:30



सरकार को अखबारों की ज़रूरत नहीं !

—— लेखक,विचारक,चिंतक, संपादक  बीकानेर एक्सप्रेस एवं पूर्व जनसंपर्क अधिकारी मनोहर चावला की कलम से

प्रधान मंत्री जी मन की बात में अपने मन की कह देते है लेकिन कभी प्रेस- कॉन्फ़्रेस कर पत्रकारो की मन की बात नहीं सुनते। पत्रकार बैचारे अपनी मन की बात अखबारों में छाप लेते है लेकिन उनके लिखे पर कोई गौर नहीं करता। जबकि बीकानेर आये दो वरिष्ठ पत्रकार गोपाल शर्मा अब विधायक और गुलाब बत्रा प्रेस को अपने सम्बोधन में कहते है निर्भय होकर सच को लिखो। हालांकि उन्हें भी मालूम है कि ऊपर से नीचे तक कुवे में भांग पड़ी है। हमने भी अपने पत्र बीकानेर एक्सप्रेस में बहुत सच लिखा ,अपने शहर की समस्यों पर खूब लिखा,लेकिन कुछ नहीं हुआ। समस्याएं निराकरण होने की बजाय बढ़ती ही चली गई। देखा होगा आपने शहर का हाल- टूटी सड़के, गहरे गड्डे, खुले गटर, सड़को पर बहता गन्दा पानी, आवारा विचरण करते गाय- गोधे, आवारा कुत्तो का आंतक, उजड़ते पार्क, आपने ज़रूर देखे होंगे। रेल फाटको के बार बार बंद होने से ट्रेफिक जाम की समस्या का मुकाबला तो आप हमेशा करते है ही। हमने इन पर खूब लिखा। लेकिन कोई भी नींद से नहीं जागा? सब कुछ वैसे का वैसा ही है। धन्य है यहाँ की पब्लिक, धन्य है नेता और धन्य है प्रशासन। चारों और मौन ही मौन। लेकिन हम अपनी आदत से लाचार है इस बार हम शहर की कालोनियों की होती बद से बदत्तर हालत पर लिख रहे है। हम बात करते है नागणी जी मन्दिर रोड पर पाश और सुनियोजित बसाई गई हाउसिंग बोर्ड कालोनी पवनपुरी की— जिसे डाक्टरों ने अपनी डाक्टर कालोनी बना ली है। अधिकांश डाक्टरो की पहली पसन्द है पवनपुरी कालोनी। क्योंकि उन्होंने मनमाने ऊँचे दामो पर यहाँ मकान- जमीन खरीदकर शानदार महल और बड़ी बड़ी इमारते बनाकर उसे आधुनिक अस्पताल का रूप दे दिया है उस अस्पताल में अपनी दवाई की दुकाने, पैथोलॉजी सेंटर भी खोल लिए है। वैसे भी यहाँ गली गली में रोग निदान केंद्र और पैथोलॉजी की दुकाने खुली हुई है। जहाँ जांचो के नाम पर मरीजों की भारी भीड़ के साथ साथ यहां उनकी जेबे ख़ाली करने का कारोबार चलता है। इसमें डाक्टरो का भी कमीशन होता ही है। वैसे इस कालोनी में यहाँ डाक्टरों के घर अस्पताल में तब्दील होने के साथ साथ यहां शराब की दुकाने और मयखाने भी खुल गए है। पास में नॉनवेज की दुकाने - खुले आम बिकते मीट- मुर्गे वातावरण को दूषित कर रहे है। श्री वेद की पाँच मंजिला बिल्डिंग में कोचिंग सेंटर, सी आई का ट्रेनिंग सेंटर, बैंक, नाई की दुकान और शॉपिंग सेंटर में भीड़ का नज़ारा देखते ही बनता है। लगता है सिनेमा का शो छूटा हो। पास में यू आई टी का संजय पार्क है जहाँ इस बिल्डिंग में कार्यरत सभी लोग खाना खाते है चाय पीते है मस्ती लेते है। इनकी वजह से बुजर्गो, महिलाओं और बच्चों का पार्क घूमना भी उन्हें भयभीत किए रहता है। पास में अतिक्रमण कर कबाड़ी की दुकान ने तो आवासीय वातावरण को दूषित कर दिया है कबाड़ का सामान रास्ते का अवरोध बना रहता है। इनसे संबंधित कई टेम्पो वाले लाउड स्पीकर से बार बार चिल्लाते हुए कबाड़ खरीदने को कहते है लेकिन वहाँ के बुजर्ग- रोगी निवासियों को लाउड स्पीकर के शोर से काफ़ी असुविधा झेलनी पड़ती है। वैसे भी पवनपुरी हाउसिंग बोर्ड की यह कालोनी निगम और यू आई टी की मिली भगत से एक बड़े बाज़ार का रूप ले रही है। जिसका फ़ायदा उठाते हुए यहाँ के निवासियों ने भी अपने घरों के आगे दस दस फीट के रैंप बनवा लिए है। घर में गैरेज न होने से कई लोगो ने गली में सरकारी जमीन पर गेराज बना लिए है लोग दूसरे के घरों के आगे अपनी कारे रखते है। अवैध बॉलकनी करीब करीब अधिकांश घरों में लोगो ने बनाई हुई है पानी का दुरप्रयोग यहाँ सबसे जायदा होता है वाहन- कार, स्कूटर रोज रोज धोना यहाँ तक कि मकान को पानी से धोना यहाँ की नियति है चाहे गली में कीचड़ और दलदल क्यो न बने, उनकी बला से। क्योंकि जलदाय विभाग के एक इंजीनियर यहाँ जो रहते है। सैया भये कोतवाल तो फिर डर काहे का? आश्चर्य होता है कि इस क्षेत्र की विधायिका ने चुनाव जीतने के बाद कभी यहाँ मुड़ कर भी नहीं देखा। क्लेक्टर महोदया शहर के अंदरूनी क्षेत्रों का तो कई बार दौरा कर चुकी हैं लेकिन हमारे इधर आने में उन्हें कोई दिलचस्पी नहीं लगती? इसलिये इस पवनपुरी का अब ईश्वर ही मालिक है।


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