महिला सशक्तिकरण की मिसाल: डॉ. रूमा देवी ने अबू धाबी में बढ़ाया भारत का मान


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-03-23 17:49:37



 

जब भारतीय परंपरा और आधुनिकता का संगम एक मंच पर दिखाई देता है, तो वह क्षण विशेष बन जाता है। ऐसा ही एक अवसर अबू धाबी में आयोजित अनलीशिंग हर पॉवर: एक्सेलरेटिंग चेंज कार्यक्रम में देखने को मिला, जहां राजस्थान की बाड़मेर निवासी और प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रूमा देवी ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। उनका यह उद्बोधन न केवल भारतीय महिलाओं के सशक्तिकरण की कहानी कहता है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की सांस्कृतिक धरोहर को भी प्रस्तुत करता है।​

महिला सशक्तिकरण की दिशा में डॉ. रूमा देवी का योगदान:

डॉ. रूमा देवी ने अपने जीवन को ग्रामीण महिलाओं के उत्थान और सशक्तिकरण के लिए समर्पित किया है। उन्होंने पारंपरिक हस्तशिल्प को न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। उनके नेतृत्व में हजारों महिलाएं आत्मनिर्भर बनी हैं, जिन्होंने अपने हुनर के माध्यम से न केवल अपनी आजीविका सुनिश्चित की है, बल्कि समाज में अपनी एक विशेष पहचान भी बनाई है। उनके प्रयासों से राजस्थान की हस्तशिल्प कला को वैश्विक मंच पर सराहा गया है, जिससे राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को भी संजीवनी मिली है।​

अनलीशिंग हर पॉवर कार्यक्रम में उद्बोधन:

अबू धाबी में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना था। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. रूमा देवी ने अपने संबोधन में भारतीय महिलाओं की संघर्षशीलता, उनकी मेहनत और समाज में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं अपनी पारंपरिक कला और कौशल के माध्यम से न केवल आर्थिक स्वतंत्रता हासिल कर रही हैं, बल्कि समाज में परिवर्तन की अग्रदूत बन रही हैं। उनका यह संदेश वहां उपस्थित सभी लोगों के लिए प्रेरणादायक रहा और उन्होंने भारतीय महिलाओं की क्षमता को वैश्विक मंच पर उजागर किया।​

वाणी उत्सव: लोक संस्कृति के संरक्षण की पहल:

अपने संबोधन के दौरान डॉ. रूमा देवी ने वाणी उत्सव के पोस्टर का विमोचन भी किया, जो 29-30 मार्च 2025 को बाड़मेर में आयोजित होने वाला है। इस उत्सव का उद्देश्य राजस्थान की विलुप्त होती वाणी गायन परंपरा को संरक्षित करना और नई पीढ़ी को इससे जोड़ना है। उन्होंने इस पहल की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह लोक संस्कृति के संरक्षण में अहम भूमिका निभाएगा। इस उत्सव में विजेता कलाकारों को लाखों रुपये के पुरस्कार और वीणा वाद्य यंत्र भेंट किए जाएंगे, जिससे कलाकारों का उत्साहवर्धन होगा और लोक कला को प्रोत्साहन मिलेगा।​

अन्य कार्यक्रमों में सहभागिता:

अबू धाबी में अपने उद्बोधन के बाद, डॉ. रूमा देवी 23 मार्च को दुबई में आयोजित होने वाले 'वरनी अवार्ड' समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। इस समारोह में महिला सशक्तिकरण की दिशा में किए गए उल्लेखनीय कार्यों को सम्मानित किया जाएगा। उनकी यह सहभागिता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय महिलाओं की उपलब्धियों को मान्यता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।​

डॉ. रूमा देवी का अबू धाबी में अनलीशिंग हर पॉवर: एक्सेलरेटिंग चेंज कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होना न केवल उनके लिए बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व की बात है। उनके विचारों ने न केवल उपस्थित लोगों को प्रेरित किया, बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में नए दृष्टिकोण को भी जन्म दिया। उनके नेतृत्व में राजस्थान की पारंपरिक हस्तशिल्प को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है, जिससे हजारों महिलाओं को रोजगार और आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त हुई है। वाणी उत्सव जैसे आयोजनों के माध्यम से वे लोक संस्कृति के संरक्षण और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं। उनकी यह सफलता यह साबित करती है कि अगर महिलाओं को सही अवसर और संसाधन दिए जाएं, तो वे न केवल अपनी जिंदगी संवार सकती हैं, बल्कि समाज और देश की उन्नति में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।


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