अजमेर में गौ प्रेम की अनोखी मिसाल: बीमार गाय बनी परिवार का हिस्सा


के कुमार आहूजा,   2025-03-23 10:58:16



 

अजमेर के वैशाली नगर में रहने वाले राजेन्द्र सिंह चौहान और उनकी पत्नी शकुंतला चौहान ने पशुओं के प्रति प्रेम और संवेदनशीलता की एक अनोखी मिसाल पेश की है। कुछ वर्ष पूर्व, शकुंतला चौहान पुष्कर स्थित सिद्धेश्वर गौशाला से एक गंभीर रूप से बीमार गाय गौरी को अपने घर लेकर आईं। उस समय गौरी के पेट में पॉलिथीन जमा हो गई थी, जिससे उसकी जान को खतरा था। साथ ही, वह दो माह की गर्भवती भी थी। चौहान दंपत्ति ने गौरी का समुचित उपचार करवाया और उसे अपने परिवार का हिस्सा बना लिया।

गणेश: सोफे पर सोने वाला बछड़ा

उपचार के बाद, गौरी ने एक सुंदर बछड़े को जन्म दिया, जिसे परिवार ने प्यार से गणेश नाम दिया। गणेश अब परिवार का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। वह घर के सभी कमरों में स्वतंत्र रूप से घूमता है, कभी पलंग पर चढ़ जाता है तो कभी सोफे पर बैठकर मस्ती करता है। राजेन्द्र सिंह बताते हैं कि गणेश दिन में दोपहर 1 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक घर के अंदर खेलता रहता है और इसके बाद वह घर के परिसर में टहलता है। भोजन के समय गणेश भी परिवार के साथ बैठता है, जिससे उसकी हरकतें सभी को भावुक कर देती हैं।

गणेश का पहला जन्मदिन: लापसी और केक के साथ धूमधाम से उत्सव

चौहान परिवार ने गणेश का पहला जन्मदिन बड़े धूमधाम से मनाया। इस अवसर को खास बनाने के लिए 10 किलो गुड़ और ड्राई फ्रूट से लापसी तैयार की गई और गणेश के लिए एक विशेष केक भी बनवाया गया। परिवार के सदस्यों के साथ-साथ आसपास के बच्चों को भी इस खुशी में शामिल किया गया। बच्चों को प्रसाद के रूप में लापसी और टॉफियां वितरित की गईं। इस अवसर पर क्षेत्र के पार्षद और भाजपा नेता धर्मेंद्र सिंह ने इस अनूठी पहल की सराहना की और समाज के लिए इसे एक मिसाल बताया।

लक्ष्मी: परिवार की नई सदस्य

गौरी और गणेश के अलावा, चौहान परिवार के पास एक और देशी नस्ल की गाय लक्ष्मी भी है, जो इस समय गर्भवती है। परिवार को उम्मीद है कि लक्ष्मी जल्द ही बछड़ी को जन्म देगी, जिसका नाम उन्होंने पहले ही सरस्वती रखने का निर्णय लिया है। शकुंतला चौहान बताती हैं कि लक्ष्मी भी अब उनके परिवार का हिस्सा बन चुकी है और उसकी देखभाल में वे कोई कसर नहीं छोड़ते।

गौवंश संरक्षण का संदेश: हर परिवार उठाए जिम्मेदारी

शकुंतला चौहान का मानना है कि केवल बातों से गौवंश को नहीं बचाया जा सकता। इसके लिए हर परिवार को संकल्प लेना होगा। यदि हर परिवार गौवंश की देखभाल की जिम्मेदारी उठाए, तो न केवल हम देशी नस्ल को बचा सकते हैं, बल्कि उनके वंश वृद्धि को भी प्रोत्साहित कर सकते हैं। राजेन्द्र सिंह का मानना है कि यदि हर परिवार इस दिशा में थोड़ा सा योगदान दे, तो देशी नस्ल के गौवंश को संरक्षित किया जा सकता है।

समाज के लिए प्रेरणा: चौहान परिवार की अनूठी पहल

चौहान परिवार की यह पहल समाज के लिए एक प्रेरणा स्रोत है। उन्होंने यह साबित किया है कि यदि हम पशुओं के प्रति प्रेम और संवेदनशीलता दिखाएं, तो हम न केवल उनका जीवन बचा सकते हैं, बल्कि अपने जीवन में भी खुशियां ला सकते हैं। उनकी यह कहानी समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखती है और अन्य लोगों को भी पशुओं के प्रति प्रेम और देखभाल के लिए प्रेरित करती है।

पशु प्रेम से भरा जीवन

अजमेर के चौहान परिवार की यह कहानी पशुओं के प्रति प्रेम और संवेदनशीलता की एक अनोखी मिसाल है। उन्होंने बीमार गाय गौरी को अपनाकर उसका उपचार किया और उसे अपने परिवार का हिस्सा बनाया। गौरी के बछड़े गणेश का पालन-पोषण भी उन्होंने पुत्र समान किया। यह कहानी हमें सिखाती है कि यदि हम पशुओं के प्रति प्रेम और संवेदनशीलता दिखाएं, तो हम न केवल उनका जीवन बचा सकते हैं, बल्कि अपने जीवन में भी खुशियां ला सकते हैं। चौहान परिवार की यह पहल समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखती है और अन्य लोगों को भी पशुओं के प्रति प्रेम और देखभाल के लिए प्रेरित करती है।


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