विधानसभा में गरजे जेठानंद व्यास! आपातकाल के जुल्मों की तुलना किसान आंदोलन से करने पर जताई कड़ी नाराजगी
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-03-23 08:30:31

राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार को बीकानेर पश्चिम के विधायक जेठानंद व्यास ने लोकतंत्र सेनानियों पर आपातकाल के दौरान हुए अत्याचारों की तुलना किसान आंदोलन से करने पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने इस तुलना को अनुचित और ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत बताते हुए इसे लोकतंत्र सेनानियों के बलिदान का अपमान करार दिया।
आपातकाल: लोकतंत्र सेनानियों पर हुए जुल्मों की दास्तान
विधायक जेठानंद व्यास ने सदन में अपनी बात रखते हुए कहा कि कुछ सदस्य आपातकाल के दौरान लोकतंत्र सेनानियों पर हुए जुल्मों को किसान आंदोलन से जोड़कर पेश कर रहे हैं, जो पूरी तरह गलत और भ्रामक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आपातकाल में लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिवारों पर जो अत्याचार हुए, उसकी कोई तुलना किसान आंदोलन से नहीं की जा सकती।
रिखब दास बोड़ा: परिवार को तबाह कर गया आपातकाल
बीकानेर भाजपा के वरिष्ठ नेता और लोकतंत्र सेनानी रिखब दास बोड़ा के उदाहरण को पेश करते हुए व्यास ने बताया कि आपातकाल के दौरान पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने उनके घर आई, लेकिन जब वे वहां मौजूद नहीं थे, तो तत्कालीन सरकार ने उनकी पत्नी को जबरन घसीटकर जेल में डाल दिया। इस घटना के बाद उनका परिवार आर्थिक बदहाली से जूझने लगा। हालात इतने खराब हो गए कि उनके बच्चे भूखे मरने की कगार पर पहुंच गए।
सरकारी नौकरी से निलंबन: गेवरचंद जोशी का संघर्ष
लोकतंत्र सेनानी श्री गेवरचंद जोशी, जो उस समय विद्युत विभाग में कर्मचारी थे, उन्होंने जब आपातकाल की नीतियों का विरोध किया तो सरकार ने उन्हें नौकरी से निलंबित कर दिया। इतना ही नहीं, उनकी पेंशन तक रोक दी गई, जिससे उनका परिवार भारी आर्थिक संकट में आ गया। यह आपातकाल की तानाशाही और विरोध की आवाज दबाने की नीति का एक बड़ा प्रमाण था।
शारीरिक प्रताड़ना: ओम आचार्य की पीड़ा
बीकानेर भाजपा के वरिष्ठ नेता श्री ओम आचार्य के योगदान को याद करते हुए व्यास ने बताया कि आपातकाल के दौरान उन्हें शारीरिक प्रताड़ना दी गई, जिससे उनके पैरों की हालत इतनी बिगड़ गई कि वे जीवन के अंतिम दिनों तक सही से चल भी नहीं पाए। यह दिखाता है कि आपातकाल के दौरान सरकार ने किस हद तक जाकर लोकतंत्र सेनानियों को शारीरिक और मानसिक रूप से तोड़ने का प्रयास किया।
लोकतंत्र सेनानियों और किसान आंदोलन की तुलना पर तीखी प्रतिक्रिया
विधायक व्यास ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि कोई भी नेता अपने क्षेत्र में जाकर आपातकाल के दौरान हुए जुल्मों की तुलना किसान आंदोलन से न करे। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग ऐसी तुलना करेंगे, जनता उन्हें अगले चुनाव में सबक सिखाएगी और उनकी जमानत तक जब्त हो सकती है।
लोकतंत्र सेनानियों के परिवारों को आर्थिक सहायता की मांग
व्यास ने यह भी मांग रखी कि जिन लोकतंत्र सेनानियों के परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं, सरकार को उन्हें अतिरिक्त आर्थिक सहायता प्रदान करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को उन परिवारों की स्थिति पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और उचित मुआवजा देना चाहिए।
राजनीतिक गलियारों में मचा हड़कंप
व्यास के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। एक ओर जहां विपक्ष इसे राजनीतिक स्टंट बता रहा है, वहीं भाजपा और लोकतंत्र सेनानियों के समर्थक इसे ऐतिहासिक सच्चाई करार दे रहे हैं। देखना यह होगा कि सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है और लोकतंत्र सेनानियों के परिवारों के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।