चिकित्सा शिक्षा को मिलेगा नया आयाम: योगेश शर्मा ने लिया देहदान का संकल्प, पंजीकरण कार्ड हुआ जारी
के कुमार आहूजा, 2025-03-23 07:24:06

देहदान का समाज और चिकित्सा क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इसके माध्यम से चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा मिलता है, जिससे मेडिकल छात्रों को मानव शरीर की संरचना और कार्यप्रणाली को समझने में सहायता मिलती है। यह ज्ञान न केवल छात्रों के लिए बल्कि संपूर्ण चिकित्सा समुदाय के लिए लाभदायक सिद्ध होता है।
योगेश शर्मा का देहदान संकल्प: समाज के लिए प्रेरणास्त्रोत
भीलवाड़ा के वरिष्ठ नागरिक मंच के सदस्य योगेश शर्मा ने देहदान का संकल्प लेकर एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनकी इस पहल से चिकित्सा शिक्षा को प्रोत्साहन मिलेगा और ज़रूरतमंद लोगों को चिकित्सा सहायता प्राप्त होगी। उनकी पत्नी नीलम शर्मा और पूरे शर्मा परिवार ने इस निर्णय में उनका समर्थन किया है, जो समाज के लिए प्रेरणादायक है। विभाग द्वारा उनका पंजीकरण कार्ड भी जारी कर दिया गया है।
वरिष्ठ नागरिक मंच की भूमिका: समाजसेवा की दिशा में अग्रसर
वरिष्ठ नागरिक मंच के अध्यक्ष मदन खटोड़ और अन्य पदाधिकारियों ने योगेश शर्मा के इस निर्णय की सराहना की है। महासचिव कृष्ण गोपाल सोमानी, संयुक्त महासचिव कैलाश चंद्र सोमानी, कोषाध्यक्ष मूलचंद बाफना, वरिष्ठ उपाध्यक्ष बसंती लाल मूंदड़ा, उमा शंकर शर्मा, प्रमोद कुमार तोषनीवाल, रामपाल शर्मा, अरुण आचार्य, गोविंद प्रसाद लढ़ा, ओम प्रकाश लढ़ा, वीणा खटोड़, निर्मला लखोटिया, मंजुलता भट्ट, उर्मिला माहेश्वरी आदि ने शर्मा परिवार को धन्यवाद ज्ञापित किया है। मंच की प्रेरणा से देहदान के प्रति जागरूकता बढ़ रही है, जो समाजसेवा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
सुरेश पटवारी की देहदान घोषणा: समाज में बढ़ती जागरूकता
हाल ही में, 12 मार्च को वरिष्ठ नागरिक मंच के वरिष्ठ सदस्य सुरेश पटवारी ने भी देहदान की घोषणा की है। यह निर्णय समाज में देहदान के प्रति बढ़ती जागरूकता और चिकित्सा शिक्षा के प्रति समर्पण को दर्शाता है। ऐसे कदम समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायक होते हैं।
देहदान के प्रति समाज की बदलती सोच: एक सकारात्मक परिवर्तन
पिछले कुछ वर्षों में देहदान के प्रति समाज की सोच में सकारात्मक परिवर्तन देखा गया है। लोग अब इस महान कार्य के महत्व को समझने लगे हैं और आगे आकर देहदान के लिए संकल्प ले रहे हैं। यह परिवर्तन चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगा।
देहदान से समाज को मिलने वाले लाभ
देहदान न केवल चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान को प्रोत्साहित करता है, बल्कि यह समाज में मानवता और सेवा की भावना को भी बढ़ावा देता है। योगेश शर्मा और सुरेश पटवारी जैसे व्यक्तियों के निर्णय से प्रेरित होकर, अन्य लोग भी इस दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव हो सके।
रिपोर्ट - पंकज पोरवाल, भीलवाड़ा।