बेटे और बहूएं ये बात क्यों भूल जाते हैं एक दिन बुढ़ापा उन में भी आएगा, सदा जवान रहने का आशीर्वाद तो किसी को नहीं मिला, 


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-03-21 22:38:21



एक अंतर्मन की आवाज है ,साफ सटीक सच्च निष्पक्ष, मन जब वह बोलता है तो बहुत कुछ बोलता है, सोचता है तो बहुत कुछ, और सच बोलूं कहता भी बहुत कुछ , समझने वाले मेरे शब्दों को समझ रहे हैं कि मैं क्यों ऐसे  क्यो कह रहा, मजबूरी है, जो कह रहा हूं वह सच कह रहा हूं, और समझने वाले समझ भी रहे हैं ,  अंजान बनकर अपने  आप को धोखा दे रहे हैं, आखिर कब तक 

आखिर कब तक,

आखिर कब तक, 

 मैंने तो अपना जीवन  जी लिया  मगर ठहरो !रुको !

मेरे शब्दों को समझो यह भाषण नहीं एक सच्चाई है क्योंकि

बेटे और बहूएं ये बात क्यों भूल जाते हैं एक दिन बुढ़ापा उन में भी आएगा, सदा जवान रहने का आशीर्वाद तो किसी को नहीं मिला, 

आज हम अपनी बूढ़े मां-बाप के साथ ऐसा करेंगे तो कल हमारे बच्चे भी हमारे साथ वैसा ही करेंगे फिर कहां जाएंगे हम,

अगर हमें बाद में पछतावा भी हो तो उसका कोई फायदा नहीं होगा, कहते हैं जब चिड़िया चुग जाए खेत तब पछताए होत क्या,

 जब हमें किसी चीज की कीमत उसके रहते रहते नहीं होती तो बाद में उस चीज को दुनिया की नजरों में अनमोल बताया क्या फायदा ,आशा ही  नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है कि आने वाली पीढ़ी  जरूर सबक लेगी( सब  समझते हैं) 

सच में कहूं तो कलम के धनी मनोहर चावला के  एक एक शब्द दिलो दिमाग में उतर जाते हैं और सच्चाई भी यही है ऐसे ऐसे दुर्लभ शब्द कहां से लाते हैं !वह सोच कहां से आती है! वह सच्चाई कहां से आती है! मैं कायल हूं पूर्व   जनसंपर्क अधिकारी मनोहर चावला का

मैं सच कहूं तो मनोहर चावला मेरे मार्गदर्शक हैं कई बार कोशिश की उनसे मिलने की मगर परिस्थितियों अनुकूल नहीं थी  या यूं कहे मेरी बदकिस्मती

आज पहली बार कुछ उनके शब्दों को पढ़कर लिखने की इच्छा हुई, सब समझता हूं ,मैं और सोचता भी हूं ,की कहा मैं गलत तो ना हो जाऊं  मगर नहीं शब्दों में लिखै दर्द के एहसास को मैं ही समझ सकता हूं  

अंततः अच्छा ना लगे तो मुझे माफ कर दीजिएगा सर  मगर ईश्वर को शायद यही मंजूर है के कुमार आहूजा बीकानेर फ्रंटियर


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