डिजिटल एजुकेशन का धमाका: राजस्थान के 300 विद्यालयों में एलईडी से सजेगी शिक्षा की दुनिया


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-03-20 19:10:00



 

श्री शिक्षण एवं सेवा संस्थान (SSESS) ने राजस्थान शिक्षा विभाग के साथ मिलकर 'राइजिंग राजस्थान' पहल के तहत एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जिसका उद्देश्य राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना है। इस एमओयू के अनुसार, संस्थान जिले के 300 गांवों में स्वयंसेवी वालंटियर के माध्यम से निःशुल्क चौपाल कक्षाएं आयोजित करेगा, जिससे लगभग 10,000 बच्चों को लाभ मिलेगा।

चौपाल कक्षाओं के माध्यम से शिक्षा का प्रसार:

SSESS ने राजस्थान शिक्षा विभाग के साथ मिलकर जिले के 300 गांवों में स्वयंसेवी वालंटियर के माध्यम से निःशुल्क चौपाल कक्षाओं का आयोजन शुरू किया है। इन कक्षाओं का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच को बढ़ाना और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है। प्रथम चरण में 148 गांवों के विद्यालयों का चयन किया गया है, जहां यह पहल सक्रिय रूप से कार्यरत है। 

डिजिटल एजुकेशन के लिए एलईडी स्थापना:

संस्थान ने 300 विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एलईडी स्क्रीन स्थापित करने की योजना बनाई है। यह पहल छात्रों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से शिक्षा प्रदान करने में सहायक होगी, जिससे उनकी सीखने की क्षमता में वृद्धि होगी। उदाहरण के लिए, राजकीय प्राथमिक विद्यालय चिरोला बड़ा में SSESS के परियोजना निदेशक विजय उपाध्याय के निर्देशन में एलईडी भेंट की गई, जिससे वहां के छात्रों को डिजिटल शिक्षा का लाभ मिल रहा है। 

शिक्षकों का प्रशिक्षण:

डिजिटल शिक्षा के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संस्थान चयनित शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण भी प्रदान करेगा। यह प्रशिक्षण उन्हें आधुनिक शिक्षण तकनीकों से अवगत कराएगा, जिससे वे छात्रों को बेहतर तरीके से शिक्षित कर सकेंगे।

कैंसर जागरूकता अभियान:

SSESS ने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए विद्यालयों में वालंटियर के माध्यम से जागरूकता कैंप आयोजित करने की योजना बनाई है। इन कैंपों का उद्देश्य छात्रों और समुदाय को कैंसर के लक्षण, रोकथाम और उपचार के बारे में जानकारी प्रदान करना है, जिससे समय रहते इस बीमारी का मुकाबला किया जा सके।

जनवाहिनी मोबाइल वैन परियोजना:

संस्थान की जनवाहिनी मोबाइल वैन परियोजना के तहत प्रोजेक्टर के माध्यम से प्रसिद्ध व्यक्तियों की जीवनी पढ़कर बच्चों के चरित्र निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह पहल छात्रों में नैतिक मूल्यों का विकास करने और उन्हें प्रेरित करने का कार्य करेगी।

चार वर्षों में लक्ष्य की प्राप्ति:

SSESS ने इस व्यापक परियोजना को आगामी चार वर्षों में पूर्ण करने का लक्ष्य रखा है। इस अवधि में संस्थान शिक्षा के विभिन्न आयामों पर कार्य करेगा, जिससे राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता में समग्र सुधार हो सके।

श्री शिक्षण एवं सेवा संस्थान की यह पहल राजस्थान के शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का प्रसार, डिजिटल शिक्षा का समावेश, शिक्षकों का प्रशिक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता और नैतिक शिक्षा पर जोर देकर संस्थान ने एक समग्र विकास की दिशा में कदम बढ़ाया है। यह पहल न केवल छात्रों के शैक्षणिक विकास में सहायक होगी, बल्कि समाज के समग्र उत्थान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

रिपोर्ट - पंकज पोरवाल, भीलवाड़ा।


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