अलवर में पैंथरों का आतंक! मंदिरों और कॉलेज के पास बढ़ रही गतिविधियाँ
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-03-20 19:07:46

अलवर शहर में हाल के दिनों में पैंथरों की गतिविधियों में अप्रत्याशित वृद्धि देखी गई है, जिसने स्थानीय निवासियों के बीच चिंता और रोमांच दोनों को जन्म दिया है। क्या यह वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में हो रहे परिवर्तनों का संकेत है, या फिर इंसानी बस्तियों के विस्तार का परिणाम? आइए, इस रिपोर्ट में इन घटनाओं का विस्तृत विश्लेषण करते हैं।
भूरासिद्ध हनुमान मंदिर के पास पैंथरों की मौजूदगी
हाल ही में, भूरासिद्ध हनुमान मंदिर के उत्तर दिशा में पहाड़ी पर दो पैंथरों को देखा गया। श्रद्धालुओं ने करीब डेढ़ घंटे तक इन पैंथरों को पहाड़ी पर बैठे देखा, जिससे मंदिर परिसर में कौतूहल और घबराहट का माहौल बना। कुछ लोग रोमांचित भी हुए, लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से यह एक गंभीर संकेत है।
शहर के अन्य हिस्सों में भी पैंथरों की सक्रियता
भूरासिद्ध हनुमान मंदिर की घटना से पहले, शहर के अन्य इलाकों में भी पैंथरों की मौजूदगी दर्ज की गई थी। राजर्षि कॉलेज और सुगनाबाई धर्मशाला के पास पैंथरों की गतिविधियाँ देखी गईं। सुगनाबाई धर्मशाला के पास आए पैंथर को रेस्क्यू कर लिया गया था, लेकिन राजर्षि कॉलेज में देखे गए पैंथर का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। इसके अलावा, कुछ दिन पहले मनसा देवी मंदिर के ऊपर पहाड़ियों पर भी दो पैंथर नजर आए थे। अब भूरासिद्ध हनुमान मंदिर के पास दो और पैंथरों की मौजूदगी दर्ज हुई है।
बाघों की बढ़ती संख्या से पैंथरों का विस्थापन
विशेषज्ञों के मुताबिक, सरिस्का के बफर ज़ोन में बाघों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है, जिसके कारण पैंथर वहां से निकलकर आबादी की ओर आ रहे हैं। बाघों की बढ़ती संख्या के कारण पैंथरों को जंगल में रहने में कठिनाई हो रही है, क्योंकि वे बाघों के साथ संघर्ष से बचने के लिए नए ठिकाने तलाश रहे हैं। हाल ही में टाइगर T-2303 बफर ज़ोन से निकलकर हरियाणा तक पहुंच गया था।
वन विभाग की चुनौतियाँ और प्रयास
शहर में पैंथरों की लगातार आमद से वन विभाग की चिंता भी बढ़ गई है। रेस्क्यू कर उन्हें सरिस्का में छोड़ा जाता है, लेकिन कुछ समय बाद वे फिर से आबादी में लौट आते हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि अभी तक किसी भी पैंथर ने किसी इंसान पर हमला नहीं किया है। भूरासिद्ध मंदिर के पास देखे गए दोनों पैंथर लंबे समय तक पहाड़ी पर ही बैठे रहे, जिससे श्रद्धालु उन्हें करीब से देख सके। इससे पहले भी एक बार इस इलाके में बाघ पानी की तलाश में पहुंचा था और पानी पीकर वापस जंगल लौट गया था। वन विभाग अब लगातार इन पैंथरों पर नज़र बनाए हुए है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके。
स्थानीय निवासियों के लिए सुझाव और सावधानियाँ
पैंथरों की बढ़ती गतिविधियों के मद्देनजर, स्थानीय निवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। रात के समय अकेले बाहर निकलने से बचें और बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर खेलने दें। यदि कहीं पैंथर दिखाई दे, तो तुरंत वन विभाग को सूचित करें और स्वयं किसी भी प्रकार की कार्रवाई से बचें।
मानव-वन्यजीव संघर्ष का समाधान आवश्यक
अलवर में पैंथरों की बढ़ती गतिविधियाँ इस बात का संकेत हैं कि वन्यजीव अपने प्राकृतिक आवास से बाहर निकलकर इंसानी बस्तियों की ओर रुख कर रहे हैं। यह स्थिति मानव-वन्यजीव संघर्ष को बढ़ावा दे सकती है। इसलिए, वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को मिलकर ऐसे उपाय करने चाहिए, जिससे पैंथरों को सुरक्षित आवास मिल सके और इंसानों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो।