महाल से मोमिनपुरा तक हिंसा! दंगे, आगजनी और कर्फ्यू से शहर में दहशत
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-03-20 19:05:36

महाराष्ट्र के नागपुर में हिंसा भड़क उठी, जब महाल इलाके में औरंगजेब की कब्र को लेकर विवाद छिड़ा। विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने इस कब्र को गुलामी का प्रतीक बताते हुए इसे हटाने की मांग की। यह विरोध प्रदर्शन नागपुर तक पहुंचा, जहां शिवाजी महाराज की प्रतिमा के पास जमकर नारेबाजी हुई।
इस दौरान अफवाहें फैलने लगीं कि प्रदर्शनकारियों ने धार्मिक ग्रंथ का अपमान किया है। यह खबर आग की तरह फैली और मोमिनपुरा, खासकर हंसरपुरी लाइन में तनाव बढ़ गया। देखते ही देखते हालात बिगड़ गए और दोनों समुदायों के बीच हिंसा भड़क उठी।
सड़कों पर तांडव: पथराव, आगजनी और पुलिस पर हमला
तनाव बढ़ते ही महाल और आसपास के इलाकों में हालात बेकाबू हो गए। भीड़ ने सड़कों पर उतरकर पथराव शुरू कर दिया। वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया और घरों पर भी हमला हुआ।
पुलिस ने स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उन पर ही हमला कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उप पुलिस आयुक्त (DCP) निकेतन कदम पर कुल्हाड़ी से हमला किया गया, जिससे वे घायल हो गए। पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा।
शहर में कर्फ्यू, इंटरनेट बंद और सुरक्षा बल तैनात
हिंसा को रोकने के लिए प्रशासन ने महाल, मोमिनपुरा और हंसरपुरी लाइन में कर्फ्यू लागू कर दिया। पूरे इलाके में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई ताकि अफवाहों पर लगाम लगाई जा सके। पुलिस ने 55 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
महाल और उसके आसपास पुलिस बल, दंगा नियंत्रण पुलिस और राज्य रिजर्व पुलिस बल (SRPF) की टीमें तैनात की गई हैं। नागपुर पुलिस ने लोगों से घरों में रहने और शांति बनाए रखने की अपील की है।
राजनीतिक बयानबाजी और सरकार की सख्ती
हिंसा के बाद महाराष्ट्र सरकार ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि "नागपुर में कानून अपने हाथ में लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। औरंगजेब समर्थकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।"
डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने भी कहा कि "पुलिस पर हमला किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिन लोगों ने शहर में दंगे भड़काए हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।"
जनता से अपील: अफवाहों पर न दें ध्यान
प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने जनता से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। नागपुर डीसीपी अर्चित चांडक ने कहा कि "गलतफहमियों के कारण यह हिंसा हुई है, लेकिन अब स्थिति नियंत्रण में है। हम दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहे हैं।"
शहर में शांति बहाल करने की चुनौती
नागपुर में हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं, लेकिन इस हिंसा ने शहर को झकझोर कर रख दिया है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती शांति बहाल करने की है। दोनों समुदायों से शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है ताकि नागपुर फिर से अपनी पुरानी पहचान—शांति और सौहार्द का शहर—बना सके।