सहयोगी दलों का समर्थन या विरोध? वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 पर सियासी संग्राम


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-03-20 08:42:34



 

वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार के उद्देश्य से प्रस्तावित वक्फ संशोधन विधेयक 2024 संसद में पेश होने को तैयार है। लेकिन इस विधेयक ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, जहां सरकार अपने सहयोगियों का समर्थन सुनिश्चित करने में जुटी है, वहीं विपक्ष और मुस्लिम संगठन इसके प्रावधानों पर गंभीर आपत्ति जता रहे हैं। क्या यह विधेयक वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा करेगा या मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर आघात पहुंचाएगा? आइए, इस मुद्दे की गहराई में जाकर समझते हैं।

विधेयक का उद्देश्य और प्रावधान:

वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 का उद्देश्य वक्फ अधिनियम 1995 में संशोधन करना है, ताकि वक्फ संपत्तियों के विनियमन और प्रबंधन में आने वाली समस्याओं और चुनौतियों का समाधान किया जा सके। संशोधन विधेयक का उद्देश्य देश में वक्फ संपत्तियों के प्रशासन और प्रबंधन में सुधार करना है। साथ ही पिछले अधिनियम की कमियों को दूर करना और अधिनियम का नाम बदलना, वक्फ की परिभाषाओं को अद्यतन करना, पंजीकरण प्रक्रिया में सुधार करना और वक्फ रिकॉर्ड के प्रबंधन में प्रौद्योगिकी की भूमिका बढ़ाने जैसे बदलाव करके वक्फ बोर्डों की दक्षता को बढ़ाना है। 

सरकार की रणनीति: सहयोगी दलों का समर्थन सुनिश्चित करने की कोशिश:

सरकार की योजना ईद के बाद बजट सत्र के दूसरे चरण के अंतिम सप्ताह में इस विधेयक को संसद में पेश करने की है। सरकार के सूत्रों ने बताया कि विधेयक के प्रावधानों पर टीडीपी और लोजपा-आर सहमत और समर्थन के लिए राजी हैं। जदयू समेत दूसरे दलों से इस महीने के अंत तक बातचीत की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। सरकार चाहती है कि विधेयक पर विस्तृत चर्चा हो, ताकि उसे लाने के संबंध में सरकार के उद्देश्य का व्यापक प्रचार-प्रसार हो। ऐसे में संभव है कि विधेयक को कानूनी जामा पहनने के लिए मानसून सत्र का इंतजार करना पड़े।

विपक्ष और मुस्लिम संगठनों का विरोध:

विधेयक के प्रावधानों को लेकर विपक्षी दलों और मुस्लिम संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) और जमीयत उलमा-ए-हिंद जैसे संगठनों ने 13 मार्च को दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया। AIMPLB के अध्यक्ष खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने मुस्लिम समुदाय से जागरूक होने और इस विधेयक के खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान किया। उन्होंने आशंका जताई कि यह विधेयक मुस्लिम संपत्तियों पर सरकारी कब्जे का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। 

जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने वक्फ एक्ट में किए जा रहे संशोधन को देश के संविधान और उसके बुनियादी ढांचे पर एक गंभीर हमला करार दिया। उन्होंने कहा कि यह उस रूपरेखा को विकृत करने का प्रयास है, जिसे हमारे संविधान निर्माताओं ने एक आधुनिक और लोकतांत्रिक भारत के लिए तैयार किया था। 

विधेयक के प्रावधानों पर आपत्तियां:

विपक्षी दलों और मुस्लिम संगठनों का मानना है कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सरकारी हस्तक्षेप बढ़ाएगा, जिससे मुस्लिम समुदाय के अधिकारों का हनन हो सकता है। उनका कहना है कि वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन समुदाय के भीतर ही होना चाहिए, न कि सरकारी नियंत्रण में। इसके अलावा, कुछ प्रावधानों को संविधान के मौलिक सिद्धांतों के खिलाफ बताया जा रहा है। 

सरकार का पक्ष:

सरकार का मानना है कि वक्फ संशोधन विधेयक से वक्फ संपत्तियों को रेगुलेट करने और ऐसी संपत्तियों से संबंधित विवादों को निपटाने का अधिकार मिलेगा। साथ ही सरकार का मत है कि विधेयक के जरिए वक्फ की संपत्ति का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा और मुस्लिम महिलाओं को भी मदद मिल पाएगी। बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने इस साल 27 जनवरी को बीजेपी और उसके सहयोगियों की ओर से विधेयक के लिए प्रस्तावित 14 संशोधनों को मंजूरी दी, जबकि विपक्ष की ओर से प्रस्तावित 44 संशोधनों को खारिज कर दिया। 

संभावित राजनीतिक प्रभाव:

विधेयक को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। सरकार अपने सहयोगी दलों का समर्थन जुटाने में लगी है, जबकि विपक्ष और मुस्लिम संगठन इसे बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश में हैं।


global news ADglobal news AD