अखिल भारतीय साहित्य परिषद का विशेष कार्यक्रम: त्रिभाषा काव्य गोष्ठी में बहेंगी साहित्य की त्रिवेणी


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-03-19 15:49:56



 

बीकानेर के साहित्य प्रेमियों के लिए एक विशेष अवसर आने वाला है, जब वे त्रिभाषा समरसता काव्य गोष्ठी में शामिल होकर साहित्य की त्रिवेणी में गोता लगा सकेंगे। अखिल भारतीय साहित्य परिषद महानगर इकाई, बीकानेर द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम न केवल स्नेह मिलन का माध्यम बनेगा, बल्कि स्वर्गीय गिरजाशंकर पाठक 'गिरिजेश' की पुण्यतिथि की पूर्व संध्या पर उन्हें श्रद्धांजलि भी अर्पित करेगा।

कार्यक्रम का उद्देश्य और महत्व:

यह आयोजन समाज के विभिन्न वर्गों के बीच समरसता और एकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया जा रहा है। त्रिभाषा काव्य गोष्ठी के माध्यम से हिंदी, राजस्थानी और अंग्रेजी भाषाओं में काव्य पाठ होगा, जिससे विभिन्न भाषाई पृष्ठभूमि के लोग एक मंच पर आ सकेंगे। इससे भाषाई विविधता में एकता का संदेश प्रसारित होगा और साहित्यिक समृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।

स्व. गिरजाशंकर पाठक 'गिरिजेश' की स्मृति:

स्वर्गीय गिरजाशंकर पाठक 'गिरिजेश' बीकानेर के प्रसिद्ध साहित्यकार और साहित्य परिषद के सक्रिय कार्यकर्ता थे। उनकी साहित्यिक सेवाओं को स्मरण करते हुए उनकी पुण्यतिथि की पूर्व संध्या पर यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जिससे नई पीढ़ी को उनके योगदान से प्रेरणा मिल सके।

आयोजन स्थल और समय:

कार्यक्रम 23 मार्च, रविवार को अपराह्न 4:00 बजे आनंद कुटीर वल्लभ गार्डन एच-62 पर आयोजित होगा। 

कार्यक्रम की विशेषताएं:

त्रिभाषा काव्य गोष्ठी: हिंदी, राजस्थानी और अंग्रेजी भाषाओं में कवि और कवयित्रियों द्वारा काव्य पाठ किया जाएगा, जिससे भाषाई समरसता को बढ़ावा मिलेगा।

स्नेह मिलन समारोह: साहित्य प्रेमियों के बीच आपसी मेलजोल और विचारों का आदान-प्रदान होगा, जिससे सामाजिक एकता को मजबूती मिलेगी।

स्वागत और अभिनन्दन: साहित्य और समाज सेवा में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों का अभिनन्दन किया जाएगा, जिससे समाज में प्रेरणा का संचार होगा।

बहरहाल, यह कार्यक्रम बीकानेर के साहित्य प्रेमियों के लिए एक अनूठा अवसर है, जहां वे विभिन्न भाषाओं के काव्य सागर में डुबकी लगा सकेंगे और समाज में समरसता और एकता का संदेश प्रसारित कर सकेंगे। स्वर्गीय गिरजाशंकर पाठक 'गिरिजेश' की स्मृति में आयोजित इस कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में सहभागिता करके हम सभी साहित्य और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर सकते हैं।


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