श्याम विहार राम मंदिर में सखी ग्रुप का शानदार फाग उत्सव: भजनों की गूंज और नृत्य का उल्लास


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-03-19 07:36:59



 

भीलवाड़ा के श्याम विहार राम मंदिर प्रांगण में हाल ही में आयोजित फाग उत्सव ने शहरवासियों के बीच उत्साह और आनंद की लहर दौड़ा दी। रंगों, फूलों और भजनों से सजे इस आयोजन में सखियों ने मिलकर होली का पर्व मनाया, जो परंपरा और संस्कृति का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है।

फाग उत्सव की रंगीन शुरुआत:

श्याम विहार परिवार एवं राम मंदिर सखी ग्रुप के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस फाग उत्सव में सभी सखियों ने रंग-बिरंगी महकती गुलाल और फूलों से एक-दूसरे को रंगा। यह दृश्य मानो वृंदावन की होली का आभास करा रहा था, जहां हर ओर रंग और खुशियों की बौछार थी।

संगीतमय प्रस्तुति: ललिता राठी एंड म्यूजिकल पार्टी:

कार्यक्रम की संयोजक हेमलता पोरवाल और रेखा भाटिया ने बताया कि फागोत्सव में ललिता राठी एंड म्यूजिकल पार्टी ने शानदार प्रस्तुति दी, जिसमें श्याम विहारवासियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भजन मंडली ने होली के फागुन के रंगीले और जोशीले भजन गाए, जिन पर महिला सदस्यों ने झूमते हुए नृत्य किया और फूलों की होली खेली। 

राधा-कृष्ण की जीवंत झांकियां:

इस दौरान राधिका अजमेरा ने कृष्ण और मीनाक्षी सारस्वत ने राधारानी का किरदार निभाया। इनकी जीवंत झांकियों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया और माहौल को भक्तिमय बना दिया। 

सम्मान और प्रसाद वितरण:

कार्यक्रम के अंत में ठाकुर जी को भोग लगाकर सभी ने प्रसाद ग्रहण किया। फाग उत्सव में क्षेत्रीय पार्षदा इंदु बंसल के साथ ही राधे म्यूजिकल ग्रुप की टीम का भी स्वागत किया गया। आयोजन में मनोरमा गोयल, राजरानी काष्ट, सुषमा काष्ट, पिंकी गोयल, ममता काष्ट, सरोज मंडोवरा, सुमन काष्ट, डिंपल लढ़ा सहित सखी मंडल की सभी सदस्याएं उपस्थित रहीं। 

संस्कृति और परंपरा का संगम:

इस प्रकार के आयोजनों से हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं का संरक्षण होता है। भीलवाड़ा के श्याम विहार राम मंदिर में आयोजित यह फाग उत्सव न केवल मनोरंजन का माध्यम बना, बल्कि समाज में एकता और भाईचारे का संदेश भी प्रसारित किया।

फाग उत्सव जैसे आयोजन समाज को एकजुट करने और हमारी सांस्कृतिक धरोहर को संजोने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भीलवाड़ा के श्याम विहार राम मंदिर में आयोजित इस उत्सव ने यह सिद्ध किया कि हमारी परंपराएं आज भी जीवंत हैं और हमें एक सूत्र में पिरोने का कार्य करती हैं।

रिपोर्ट - पंकज पोरवाल, भीलवाड़ा। 

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