धुलंडी के दिन जयपुर में उपद्रव: शहर की शांति पर हमला, विधायक बालमुकुंद ने कड़ी कार्रवाई की मांग की


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-03-18 20:47:04



 

14 मार्च को धुलंडी के अवसर पर जयपुर के प्रमुख क्षेत्रों जैसे जौहरी बाजार, बड़ी चौपड़, हवामहल, चांदी की टकसाल और आमेर रोड में असामाजिक तत्वों ने मोटरसाइकिल और कारों के झुंड में रैली निकालकर शहर की शांति भंग की। इन रैलियों में देशविरोधी और भड़काऊ नारेबाजी की गई, जिससे स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों में भय और अशांति का माहौल बन गया।

विधायक स्वामी बालमुकुंदाचार्य की कड़ी प्रतिक्रिया

हवामहल विधायक स्वामी बालमुकुंदाचार्य महाराज ने इस घटना पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने पुलिस कमिश्नर से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की। विधायक ने बताया कि रैली में शामिल उपद्रवी चार-चार लोगों के समूह में मोटरसाइकिल पर सवार थे। इन तत्वों ने स्थानीय नागरिकों, देशी-विदेशी पर्यटकों से दुर्व्यवहार किया, मकानों के बाहर खड़े वाहनों के शीशे तोड़ दिए और गोविंद देव जी मंदिर आने वाली महिलाओं से अभद्रता व आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं।

16 मार्च को भी दोहराई गई घटना

विधायक ने आरोप लगाया कि 16 मार्च को भी आमेर रोड और रामगढ़ मोड़ पर इसी तरह की रैली निकालकर फिर से आपराधिक कृत्यों को अंजाम दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रशासन ने ऐसी भड़काऊ रैलियों की अनुमति दी थी? यदि नहीं, तो 14 मार्च की घटना के बावजूद 16 मार्च को दोबारा रैली निकालने की अनुमति कैसे दी गई?

दोषियों और लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

विधायक बालमुकुंदाचार्य ने प्रशासन से मांग की है कि दोनों दिन की घटनाओं में शामिल दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। बिना अनुमति इस तरह की रैली निकालने वाले तत्वों पर कार्रवाई हो। वहीं, पुलिस प्रशासन की लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर भी सख्त कदम उठाए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो आमजन के बीच असंतोष बढ़ सकता है और प्रदेश की छवि को नुकसान पहुंच सकता है।

शहर की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव

इन घटनाओं से जयपुर की छवि धूमिल हुई है। स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों में भय का माहौल है, जिससे उनकी दैनिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। पर्यटकों की संख्या में भी कमी आ सकती है, जिससे शहर की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

प्रशासन की भूमिका पर सवाल

लगातार दो दिनों तक ऐसी घटनाओं के बावजूद प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय जनता और जनप्रतिनिधियों का मानना है कि यदि समय पर सख्त कार्रवाई की जाती, तो दूसरी घटना रोकी जा सकती थी। अब देखना होगा कि प्रशासन इन घटनाओं के दोषियों के खिलाफ क्या कदम उठाता है और शहर में शांति बहाल करने के लिए क्या प्रयास करता है।

जयपुर में धुलंडी के अवसर पर हुई इन घटनाओं ने शहर की छवि को धूमिल किया है और स्थानीय जनता में असंतोष बढ़ाया है। प्रशासन को चाहिए कि वह दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए। साथ ही, शहर की शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए सभी समुदायों के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा देना आवश्यक है।


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