अपराध छोड़ ज्ञान की राह! जेल में कैदियों की अनोखी सफलता की कहानी, जेल में रहकर ITI की पढ़ाई
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-03-18 20:40:42

भरतपुर के सेवर केंद्रीय कारागृह में शिक्षा की रोशनी से बदल रही हैं बंदियों की जिंदगियां! अपराध की दुनिया छोड़, अब किताबों से सजा रहे हैं अपना भविष्य! यह कहानी है सेवर केंद्रीय कारागृह के उन बंदियों की, जो अपने अतीत को पीछे छोड़ते हुए नए सिरे से जीवन की शुरुआत कर रहे हैं। जेल प्रशासन की अनूठी पहल ने इन बंदियों के जीवन में उम्मीद की किरण जगाई है, जहां वे शिक्षा के माध्यम से अपने भविष्य को संवारने का प्रयास कर रहे हैं।
शिक्षा से सुधार की ओर कदम
सेवर केंद्रीय कारागृह के अधीक्षक परमजीत सिंह का मानना है कि शिक्षा ही बंदियों के सुधार और आत्मनिर्भरता का सबसे प्रभावी माध्यम है। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए कारागृह में एक व्यापक साक्षरता अभियान शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य निरक्षर बंदियों को शिक्षित करना है। इस अभियान के तहत बंदियों को हस्ताक्षर करना, किताबें पढ़ना और अखबार समझना सिखाया जा रहा है, ताकि वे बुनियादी शिक्षा प्राप्त कर सकें। इसके अलावा, जो बंदी उच्च शिक्षा की ओर बढ़ना चाहते हैं, उनके लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) के माध्यम से विभिन्न पाठ्यक्रम उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
बंदी बने शिक्षकों के मार्गदर्शक
जेल प्रशासन ने शिक्षा को अधिक प्रभावी बनाने के लिए अनूठी पहल की है। जेल में पहले से स्नातक कर चुके बंदियों को शिक्षण कार्य सौंपा गया है। इन बंदियों को अध्यापन के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है और उन्हें आवश्यक पुस्तकें व अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई गई हैं। इस प्रयास से न केवल शिक्षा का स्तर बढ़ रहा है, बल्कि शिक्षण कार्य करने वाले बंदियों को भी आत्मसंतोष और सम्मान की अनुभूति हो रही है।
साक्षरता बैरक: निरक्षरता को खत्म करने की पहल
कारागृह में विशेष रूप से बैरक नंबर 4 को 'साक्षरता बैरक' नाम दिया गया है, जहां केवल निरक्षर बंदियों को रखा जाता है। यहां नियमित रूप से उन्हें पढ़ना-लिखना सिखाया जाता है। जब तक कोई बंदी स्वतंत्र रूप से पढ़ने, लिखने और हस्ताक्षर करने में सक्षम नहीं हो जाता, तब तक उसे इसी बैरक में रखा जाता है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बंदी निरक्षर न रहे और शिक्षा के माध्यम से अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सके।
सुधार की ओर बढ़ते कदम
अधीक्षक परमजीत सिंह ने बताया कि जेल प्रशासन का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कारागृह में कोई भी बंदी निरक्षर न रहे। पिछले वर्ष 550 बंदियों को शिक्षित किया गया था, और इस वर्ष यह संख्या और बढ़ाने का संकल्प लिया गया है। शिक्षा ग्रहण करने वाले बंदियों में छोटे अपराधों से लेकर हत्या और दुष्कर्म जैसे गंभीर मामलों में दोषी ठहराए गए अपराधी भी शामिल हैं। सेवर केंद्रीय कारागृह में जल रही शिक्षा की यह अलख न केवल बंदियों को आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि समाज को भी यह संदेश दे रही है कि सुधार की राह हमेशा खुली रहती है।
कारागार सुधार की दिशा में राष्ट्रीय प्रयास
भारत में कारागार सुधार की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। जेलों को दंडात्मक संस्थानों से पुनर्वास केंद्रों में बदलने के प्रयास किए जा रहे हैं, जहां अनिवार्य व्यावसायिक प्रशिक्षण, शैक्षिक कार्यक्रम और मनोवैज्ञानिक परामर्श को लागू किया जा रहा है। इसके अलावा, जेल अवसंरचना में निवेश, विशेष आवास इकाइयों का निर्माण और कानूनी सहायता तंत्र को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
सेवर केंद्रीय कारागृह में शिक्षा की यह पहल न केवल बंदियों के जीवन में सुधार ला रही है, बल्कि समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी और योगदान को भी पुनः स्थापित कर रही है। यह प्रयास इस बात का प्रमाण है कि उचित मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर कोई भी व्यक्ति अपने जीवन को सकारात्मक दिशा में मोड़ सकता है।