हाइकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद मस्जिद की रंगाई-पुताई शुरू
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-03-18 18:20:50

उत्तर प्रदेश के संभल जिले की शाही जामा मस्जिद की बाहरी दीवारों पर सफेदी का कार्य आरंभ हो चुका है। यह कदम इलाहाबाद हाई कोर्ट के 12 मार्च 2025 को दिए गए आदेश के बाद उठाया गया है, जिसमें मस्जिद की बाहरी दीवारों पर रंगाई-पुताई की अनुमति प्रदान की गई थी। कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए मस्जिद कमेटी को यह अनुमति दी थी।
मस्जिद कमेटी की याचिका: रमजान से पूर्व सौंदर्यीकरण की मांग
मस्जिद कमेटी ने रमजान के पवित्र महीने से पूर्व मस्जिद की रंगाई-पुताई और लाइटिंग की अनुमति के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिला प्रशासन द्वारा इस मांग को अस्वीकार किए जाने के बाद, कमेटी ने न्यायालय का रुख किया। कोर्ट ने मस्जिद की बाहरी दीवारों पर सफेदी और लाइटिंग की अनुमति प्रदान की, बशर्ते कि किसी भी ढांचे को नुकसान न पहुंचे।
ASI की आपत्ति और कोर्ट की नाराजगी
सुनवाई के दौरान, ASI ने मस्जिद की रंगाई-पुताई की आवश्यकता पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि पूर्व में की गई सफेदी से मस्जिद की बाहरी दीवारों को नुकसान पहुंचा है। इस पर न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने ASI की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि वे सरकार के इशारे पर काम कर रहे हैं और अपनी ड्यूटी निभाने में विफल हो रहे हैं। कोर्ट ने मस्जिद की बाहरी दीवारों पर सफेदी की अनुमति देते हुए ASI को एक सप्ताह के भीतर कार्य पूरा कराने का आदेश दिया।
मस्जिद की सफेदी का कार्य आरंभ: ASI की टीम ने किया निरीक्षण
हाई कोर्ट के आदेश के बाद, ASI की टीम ने मस्जिद का निरीक्षण किया और सफेदी का कार्य जल्द शुरू करने की प्रक्रिया में है। मस्जिद कमेटी ने कोर्ट के आदेश का स्वागत किया है और कहा है कि रमजान से पूर्व मस्जिद का सौंदर्यीकरण समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है।
अगली सुनवाई: 8 अप्रैल को होगी मामले की समीक्षा
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल 2025 को निर्धारित की है, जिसमें सफेदी कार्य की प्रगति और ASI की कार्रवाई की समीक्षा की जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मस्जिद की संरचना को कोई नुकसान न पहुंचे और सभी कार्य न्यायालय के आदेशानुसार हों।
न्यायालय का संतुलित निर्णय और समुदाय की संतुष्टि
इलाहाबाद हाई कोर्ट का यह आदेश मस्जिद कमेटी और मुस्लिम समुदाय के लिए राहतभरा है। न्यायालय ने ASI की आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए संतुलित निर्णय लिया, जिससे मस्जिद की संरचना सुरक्षित रहे और सौंदर्यीकरण का कार्य भी संपन्न हो सके। यह निर्णय न्यायपालिका की निष्पक्षता और समुदाय की आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है।