अवैध घुसपैठ में भारतीय दलालों  और देश द्रोही की भूमिका, सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी कार्रवाई, चार रोहिंग्या गिरफ्तार


के कुमार आहूजा,   2025-03-18 06:03:51



 

त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में शनिवार को चार रोहिंग्या नागरिकों—जाहिद आलम, मंताजुल हक, मीन तारा और पुतु अख्तर—को अवैध रूप से भारतीय सीमा पार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। इनके साथ दो भारतीय नागरिकों को भी पकड़ा गया है, जो उन्हें सीमा पार कराने में मदद कर रहे थे। अधिकारियों के अनुसार, इन सभी के खिलाफ विदेशी अधिनियम और अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

रोहिंग्या शरणार्थी: उत्पीड़न से पलायन और घुसपैठ की बढ़ती घटनाएँ

रोहिंग्या समुदाय म्यांमार के रखाइन राज्य से आता है, जहां उन्हें दशकों से धार्मिक और जातीय भेदभाव का सामना करना पड़ा है। 2017 में म्यांमार की सेना की कार्रवाई के बाद लाखों रोहिंग्या बांग्लादेश में शरण लेने को मजबूर हुए। बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में खराब स्थिति, रोजगार के अवसरों की कमी और बेहतर जीवन की तलाश में कई रोहिंग्या अवैध रूप से भारत में घुसपैठ करने की कोशिश करते हैं।

त्रिपुरा: अवैध घुसपैठ का प्रमुख मार्ग

भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित त्रिपुरा, अवैध घुसपैठ का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है। बीते वर्षों में सुरक्षा बलों ने कई रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश करते हुए पकड़ा है। हाल ही में, बीएसएफ ने मार्च 2025 में चार दिनों के भीतर 29 बांग्लादेशी घुसपैठियों को गिरफ्तार किया था।

भारतीय दलालों की भूमिका और संगठित नेटवर्क का खुलासा

अवैध घुसपैठ में स्थानीय नेटवर्क की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। तस्कर और दलाल इन घुसपैठियों को सीमा पार कराने में सहायता करते हैं। इस गिरफ्तारी में दो भारतीय नागरिकों की संलिप्तता इस तथ्य को उजागर करती है कि स्थानीय स्तर पर इस तरह के नेटवर्क सक्रिय हैं। ये दलाल घुसपैठियों को भारतीय दस्तावेज उपलब्ध कराने, यात्रा व्यवस्था करने और सुरक्षा एजेंसियों से बचाने में मदद करते हैं।

सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और उठाए गए कदम

अवैध घुसपैठ केवल जनसंख्या संतुलन ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है। सुरक्षा एजेंसियाँ इस खतरे को रोकने के लिए निगरानी बढ़ा रही हैं और स्थानीय लोगों को भी सतर्क कर रही हैं। बीएसएफ और पुलिस द्वारा सीमावर्ती इलाकों में गश्त बढ़ाई गई है। अवैध दस्तावेजों की पहचान के लिए सख्त जांच अभियान चलाए जा रहे हैं।

आगे की कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया

गिरफ्तार किए गए रोहिंग्या नागरिकों और उनके भारतीय मददगारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सुरक्षा एजेंसियाँ इस पूरे नेटवर्क की जाँच कर रही हैं ताकि अन्य घुसपैठियों और तस्करों का भी पर्दाफाश किया जा सके।

त्रिपुरा में अवैध घुसपैठ की बढ़ती घटनाएँ भारत की सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती हैं। स्थानीय भारतीय नागरिकों की संलिप्तता से यह समस्या और जटिल हो जाती है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह जरूरी है कि वे सीमाओं पर निगरानी और कड़ी करें, स्थानीय लोगों को जागरूक करें और घुसपैठियों के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए कठोर कदम उठाएँ।


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