भारत और किर्गिज़स्तान की सेनाएँ आमने-सामने, मगर एक ही लक्ष्य – सैन्य ताकत में पराकाष्ठा
के कुमार आहूजा, 2025-03-17 21:30:25

भारतीय सेना और किर्गिज़स्तान के विशेष बल इस समय मध्य एशिया के टोकमोक में ‘खंजर-XII’ नामक संयुक्त सैन्य अभ्यास कर रहे हैं। 10 मार्च से शुरू हुआ यह हाई-लेवल ड्रिल 23 मार्च तक चलेगा, जिसमें शहरी युद्ध, आतंकवाद विरोधी रणनीतियाँ और सटीक स्नाइपिंग जैसे महत्वपूर्ण अभियानों पर जोर दिया जा रहा है।
‘खंजर-XII’ क्यों है यह अभ्यास इतना महत्वपूर्ण
इस सैन्य अभ्यास की शुरुआत वर्ष 2008 में हुई थी, जब भारत और किर्गिज़स्तान ने पहली बार अपनी सैन्य क्षमताओं को साझा करने का निर्णय लिया था। तब से, यह ‘खंजर’ सीरीज का 12वां संस्करण है, जो हर बार दोनों देशों के सामरिक और रणनीतिक कौशल को नई ऊँचाइयो तक ले जाता है।
इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य शहरी युद्ध की तकनीकों को विकसित करना, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सामरिक रणनीतियों का आदान-प्रदान करना, विशेष बलों के बीच तालमेल और एक-दूसरे की ताकत को समझना तथा स्नाइपर ट्रेनिंग और सटीक निशानेबाजी में सुधार करना है।
टोकमोक में युद्धाभ्यास: भारतीय सैनिकों की रणनीति और प्रदर्शन
इस अभ्यास में भारतीय सेना के विशेष बलों ने अपनी दक्षता का परिचय देते हुए कई आधुनिक युद्ध तकनीकों का प्रदर्शन किया। दोनों देशों के सैनिक मिलकर उन परिस्थितियों को दोहरा रहे हैं, जो वास्तविक युद्ध में सामने आ सकती हैं।
भारतीय सेना ने शहरी युद्ध का लाइव सिमुलेशन किया, जिसमें नकली इमारतों और गलियों में छिपे आतंकियों को खत्म करने की रणनीति का प्रदर्शन किया गया। आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन के तहत भारतीय सैनिकों ने आधुनिक हथियारों और तकनीकों को साझा किया, जो वास्तविक परिस्थितियों में उपयोगी साबित हो सकती हैं। स्नाइपिंग अभ्यास के दौरान दोनों देशों के जवानों ने मिलकर सटीक निशानेबाजी की तकनीकों को विकसित किया, जिससे लक्ष्य को दूर से मारने की कला में सुधार हो सके।
भारत-किर्गिज़स्तान सैन्य संबंध: बढ़ती ताकत और मजबूत दोस्ती
भारत और किर्गिज़स्तान के बीच यह सहयोग केवल सैन्य अभ्यास तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच मजबूत कूटनीतिक और रणनीतिक संबंधों का भी प्रमाण है। वर्ष 2024 में ‘खंजर-XI’ हिमाचल प्रदेश के बकलोह में हुआ था, जहां किर्गिज़ सैनिकों ने भारतीय सेना के साथ मिलकर पहाड़ी युद्ध की ट्रेनिंग ली थी।
दोनों देशों के बीच सुरक्षा और रक्षा संबंधों को मजबूत करने के लिए लगातार उच्च स्तरीय बैठकों का आयोजन किया जाता है। मध्य एशिया में भारत की बढ़ती भूमिका को देखते हुए, यह अभ्यास क्षेत्रीय स्थिरता और आपसी सहयोग को और मजबूत करता है।
भारत की सैन्य ताकत और वैश्विक सहयोग का बेहतरीन उदाहरण
‘खंजर-XII’ केवल एक सैन्य अभ्यास नहीं है, बल्कि यह भारत की वैश्विक सैन्य शक्ति और रणनीतिक सहयोग का परिचायक भी है। यह अभ्यास दर्शाता है कि भारतीय सेना न केवल अपनी रक्षा क्षमताओं को बढ़ा रही है, बल्कि मित्र देशों के साथ मिलकर आतंकवाद और अन्य वैश्विक खतरों से निपटने के लिए भी तत्पर है।
भारत और किर्गिज़स्तान का यह संयुक्त युद्धाभ्यास आने वाले वर्षों में और भी अधिक प्रभावशाली होगा, जिससे दोनों देशों के सैनिकों की शक्ति और युद्ध कौशल में नई ऊँचाइयाँ देखने को मिलेंगी।