गुजरात में आयुर्वेद का महाकुंभ: वंदे आयुकॉन 2025 में जुटेंगे 27,000 चिकित्सक
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-03-17 18:45:13

आयुर्वेद, भारत की प्राचीन चिकित्सा प्रणाली, आधुनिकता के साथ कदमताल करते हुए एक नए युग में प्रवेश कर रही है। 'वंदे आयुकॉन 2025' सम्मेलन इसका जीवंत उदाहरण है, जहां आयुर्वेदिक चिकित्सा को डिजिटल युग से जोड़ने के महत्वपूर्ण प्रयास हो रहे हैं।
सम्मेलन का उद्देश्य और आयोजन
'वंदे आयुकॉन 2025' का आयोजन गुजरात आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा प्रणाली बोर्ड द्वारा किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य आयुर्वेदिक चिकित्सकों को आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित करना और उनकी प्रैक्टिस को और प्रभावी बनाना है। इस सम्मेलन में राज्य के 27,000 आयुर्वेदिक चिकित्सक परोक्ष रूप से शामिल होंगे, जबकि 500 प्रमुख चिकित्सक प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित रहेंगे।
ओपीडी सॉफ्टवेयर की शुरुआत
सम्मेलन में आयुर्वेदिक चिकित्सकों को एक विशेष ओपीडी सॉफ्टवेयर प्रदान किया जाएगा, जिससे उनकी प्रैक्टिस में आधुनिकता का समावेश होगा। इस सॉफ्टवेयर की मदद से चिकित्सक अधिक प्रभावी ढंग से मरीजों का उपचार कर सकेंगे और डिजिटल रिकॉर्ड्स मेंटेन कर पाएंगे। यह कदम आयुर्वेद के क्षेत्र में डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
चिकित्सकों का सम्मान और मार्गदर्शन
सम्मेलन के दौरान राज्य के प्रसिद्ध आयुर्वेदिक चिकित्सकों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा, देश के प्रख्यात आयुर्वेदिक विशेषज्ञों द्वारा लेक्चर सेशन आयोजित किए जाएंगे, जो चिकित्सकों को नई तकनीकों और अनुसंधानों से अवगत कराएंगे, जिससे उनकी प्रैक्टिस में नयापन और उन्नति संभव हो सके।
आयुर्वेद में हो रहे परिवर्तन
गुजरात आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा प्रणाली बोर्ड के अध्यक्ष संजय जीवराजानी के अनुसार, 2014 से 2025 के बीच आयुर्वेद के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। पहले जहां राज्य में केवल नौ आयुर्वेदिक कॉलेज थे, अब उनकी संख्या बढ़कर 42 हो गई है, जिससे हर साल लगभग 3,000 आयुर्वेदिक चिकित्सक प्रशिक्षित हो रहे हैं। यह आयुर्वेद के प्रति समाज के बढ़ते विश्वास और रुचि को दर्शाता है।
जामनगर: आयुर्वेद का प्रमुख केंद्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयुर्वेद के क्षेत्र में कई क्रांतिकारी परिवर्तन हुए हैं। विशेष रूप से, गुजरात के जामनगर को आयुर्वेद के मुख्य केंद्र के रूप में स्थापित किया गया है, जहां आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। यह आयुर्वेद की वैश्विक पहचान को और मजबूत करता है।
आयुर्वेद का डिजिटल युग में प्रवेश
'वंदे आयुकॉन 2025' सम्मेलन आयुर्वेदिक चिकित्सा के क्षेत्र में डिजिटल युग की ओर बढ़ते कदमों को प्रदर्शित करता है। ओपीडी सॉफ्टवेयर की शुरुआत और डिजिटलाइजेशन पर जोर आयुर्वेद को आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के साथ समन्वित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह न केवल चिकित्सकों की प्रैक्टिस को प्रभावी बनाएगा, बल्कि मरीजों को भी बेहतर सेवाएं प्रदान करेगा।
'वंदे आयुकॉन 2025' सम्मेलन आयुर्वेद के क्षेत्र में हो रहे आधुनिक परिवर्तनों का प्रतीक है। यह आयुर्वेदिक चिकित्सकों को आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित करने और उनकी प्रैक्टिस को और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आयुर्वेद का डिजिटल युग में प्रवेश न केवल चिकित्सा प्रणाली को सुदृढ़ करेगा, बल्कि समाज के स्वास्थ्य में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।