महाराष्ट्र में गिलियन-बैरे सिंड्रोम का विस्फोट! 224 मामले, 12 मौतों से स्वास्थ्य विभाग सतर्क
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-03-16 08:42:21

पिछले कुछ महीनों से महाराष्ट्र में एक अज्ञात दुश्मन ने दस्तक दी है, जिसने न केवल स्वास्थ्य विशेषज्ञों को बल्कि आम जनता को भी चिंतित कर दिया है। गिलियन-बैरे सिंड्रोम (GBS) नामक इस दुर्लभ बीमारी ने राज्य में अपने पांव पसारते हुए सैकड़ों लोगों को प्रभावित किया है, जिससे स्वास्थ्य विभाग के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है।
मामलों की वर्तमान स्थिति:
स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने राज्यसभा में जानकारी दी कि 3 मार्च 2025 तक महाराष्ट्र में GBS के 224 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 12 मरीजों की मृत्यु हो चुकी है। इनमें से 179 मरीज पूरी तरह से स्वस्थ होकर अस्पताल से छुट्टी पा चुके हैं, जबकि 24 मरीज अभी भी गहन चिकित्सा इकाई (ICU) में भर्ती हैं, जिनमें से 15 वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं।
पुणे में संक्रमण का केंद्र:
GBS के अधिकांश मामले पुणे और उसके आसपास के क्षेत्रों से सामने आए हैं। पुणे नगर निगम क्षेत्र में 46, नए जुड़े गांवों में 95, पिंपरी-चिंचवड़ में 33 और पुणे ग्रामीण क्षेत्र में 37 मामले दर्ज किए गए हैं। इन क्षेत्रों में बढ़ते मामलों ने स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
संक्रमण का संभावित स्रोत:
केंद्रीय तकनीकी टीम द्वारा की गई जांच में पाया गया कि GBS के अधिकांश मामलों का संबंध कैम्पिलोबैक्टर (Campylobacter) संक्रमण से है, जो आमतौर पर दूषित पानी के सेवन से होता है। पुणे जिले में जल स्रोतों की जांच के दौरान 144 स्रोतों में संक्रमण की पुष्टि हुई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि दूषित पानी इस प्रकोप का प्रमुख कारण हो सकता है।
सरकारी प्रयास और सावधानियां:
स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छता और साफ पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। जल स्रोतों की नियमित जांच, लीकेज की मरम्मत, क्लोरीनेशन, और टैंकरों के माध्यम से साफ पानी की आपूर्ति की जा रही है। इसके अलावा, सरकारी अस्पतालों में विशेष आइसोलेशन वार्ड स्थापित किए गए हैं, और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के तहत GBS के इलाज के लिए विशेष पैकेज शामिल किए गए हैं।
गिलियन-बैरे सिंड्रोम क्या है?:
GBS एक दुर्लभ तंत्रिका संबंधी विकार है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली तंत्रिकाओं पर हमला करती है, जिससे मांसपेशियों में कमजोरी और कभी-कभी लकवा तक हो सकता है। इसके लक्षणों में धड़कन का बढ़ना, चेहरे पर सूजन, सांस लेने में तकलीफ, चलने-फिरने में परेशानी, शरीर में चुभन के साथ दर्द, गर्दन घुमाने में समस्या, और शरीर में कंपकंपी शामिल हैं। हालांकि, समय पर इलाज से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं, लेकिन गंभीर मामलों में ICU या वेंटिलेटर सपोर्ट की आवश्यकता पड़ सकती है।
जनता के लिए सलाह:
स्वास्थ्य विभाग ने जनता से अपील की है कि वे स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें, केवल साफ और उबला हुआ पानी पिएं, और किसी भी संदिग्ध लक्षण के प्रकट होने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। इसके अलावा, स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें और अफवाहों से बचें।
महाराष्ट्र में गिलियन-बैरे सिंड्रोम का प्रकोप एक गंभीर स्वास्थ्य संकट है, लेकिन सरकारी प्रयासों और जनता की जागरूकता से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। स्वच्छता और साफ पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना इस बीमारी की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।