राजस्थान में ओलावृष्टि से फसलों का भारी नुकसान! किसान परेशान
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-03-16 08:38:36

धुलंडी के रंगीन त्योहार पर जब लोग खुशियों में डूबे थे, तभी राजस्थान के किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें खिंच गईं। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से अचानक बदले मौसम ने प्रदेश के कई जिलों में कहर बरपाया, जिससे फसलों को भारी नुकसान हुआ। आइए, जानते हैं इस अप्रत्याशित मौसम परिवर्तन के प्रभाव और किसानों की व्यथा की पूरी कहानी।
पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव:
14 मार्च को पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से राजस्थान के विभिन्न जिलों में मौसम में अचानक बदलाव देखा गया। राजधानी जयपुर सहित शेखावाटी के सीकर, झुंझुनू, चूरू और बीकानेर संभाग के हनुमानगढ़ और गंगानगर के कुछ इलाकों में बारिश और ओलावृष्टि हुई। पिलानी में खेतों में सफेद चादर की तरह ओले बिछ गए, जिससे फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचा।
फसलों को नुकसान:
ओलावृष्टि और बारिश के कारण खेतों में खड़ी रबी की फसलें, जैसे गेहूं, जौ, सरसों और चना, बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। कई स्थानों पर फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। पिलानी में ओलों की सफेद चादर बिछने से फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचा है।
तापमान में गिरावट:
मौसम में इस बदलाव के कारण दिन के अधिकतम तापमान में 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। तेज हवाओं और बारिश के चलते लोगों को गर्मी से राहत मिली है, लेकिन किसानों के लिए यह राहत चिंता का सबब बन गई है।
आने वाले दिनों का पूर्वानुमान:
मौसम विभाग ने 15 और 16 मार्च को भी प्रदेश के कई जिलों में बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में बीकानेर, गंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, नागौर, सीकर, झुंझुनूं, जयपुर, अलवर, भरतपुर और दौसा शामिल हैं। इस दौरान दोपहर बाद हल्की बारिश की संभावना है, जिससे किसानों की चिंताएं और बढ़ गई हैं।
किसानों की समस्याएं:
ओलावृष्टि और बारिश से फसलों को हुए नुकसान के बाद किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। फसल बीमा योजना के तहत मुआवजे की प्रक्रिया में देरी और जटिलताओं के कारण किसानों की समस्याएं और बढ़ सकती हैं। कई किसान कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं, और फसल नुकसान से उनकी स्थिति और गंभीर हो सकती है।
सरकारी सहायता की आवश्यकता:
किसानों की इस विकट स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार को तुरंत प्रभाव से प्रभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण कराना चाहिए और फसल नुकसान का आकलन करना चाहिए। किसानों को उचित मुआवजा प्रदान करने के साथ-साथ फसल बीमा योजनाओं के तहत क्लेम प्रक्रिया को सरल और तेज किया जाना चाहिए, ताकि उन्हें जल्द से जल्द राहत मिल सके।
राजस्थान में पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुए मौसम परिवर्तन ने किसानों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। फसलों को हुए भारी नुकसान से उनकी आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। ऐसे में आवश्यक है कि सरकार और संबंधित विभाग त्वरित कार्रवाई करते हुए किसानों को राहत प्रदान करें, ताकि वे इस संकट से उबर सकें और आगामी फसल चक्र के लिए तैयार हो सकें।