जालसाजों की अब खैर नहीं! स्वदेशी एआई के जरिए साइबर फ्रॉड रोकने की कवायद
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-03-14 15:57:08

डिजिटल युग में, जहाँ तकनीक ने हमारी जिंदगी को आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने भी अपने तरीकों को अत्याधुनिक बना लिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग अब फिशिंग हमलों को और भी खतरनाक बना रहा है। क्या हम इस डिजिटल जाल से सुरक्षित हैं? आइए, इस पर विस्तृत नज़र डालते हैं।
एआई के माध्यम से फिशिंग हमलों का बढ़ता खतरा
साइबर अपराधी अब एआई का उपयोग करके फिशिंग हमलों को और भी परिष्कृत बना रहे हैं। ये हमले अब व्यक्तिगत जानकारी चुराने के लिए अधिक सटीक और विश्वसनीय प्रतीत होते हैं, जिससे उपयोगकर्ताओं के लिए धोखे का शिकार होना आसान हो गया है।
भारत में फिशिंग हमलों के आंकड़े
भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-In) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021 से 2024 के बीच फिशिंग घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है:
2021: 523 घटनाएँ
2022: 1,714 घटनाएँ
2023: 869 घटनाएँ
2024: 785 घटनाएँ
यह वृद्धि दर्शाती है कि साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीकों का उपयोग कर रहे हैं।
स्वदेशी एआई और बिग डेटा एनालिटिक्स का उपयोग
सरकार ने फर्जी दस्तावेज़ों पर जारी सिम कार्ड की पहचान के लिए स्वदेशी एआई और बिग डेटा एनालिटिक्स टूल्स का विकास किया है। इससे जालसाजों के खिलाफ कार्रवाई में तेजी आएगी और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
संसद में साइबर सुरक्षा पर चर्चा
हाल ही में संसद सत्र के दौरान, लोकसभा सदस्य प्रभाकर रेड्डी वेमिरेड्डी ने संचार मंत्री से पूछा कि क्या मैकफी द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार 82 प्रतिशत लोग फर्जी संदेशों का शिकार हो रहे हैं। संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने बताया कि कुछ संगठनों द्वारा प्रकाशित अध्ययनों को सरकार द्वारा न तो वैधता प्रदान की जाती है और न ही प्रमाणित किया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि साइबर अपराध से संबंधित मामले गृह मंत्रालय के अंतर्गत आते हैं, जबकि दूरसंचार विभाग दूरसंचार संसाधनों के दुरुपयोग को रोकने के प्रयास कर रहा है।
ट्राई के नए दिशा-निर्देश
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने 12 फरवरी 2025 को अवांछित वाणिज्यिक संचार के विरुद्ध उपभोक्ता सुरक्षा को सशक्त करने के लिए दूरसंचार वाणिज्यिक संचार ग्राहक वरीयता विनियम 2018 में संशोधन किया है। इसका उद्देश्य दूरसंचार संसाधनों के दुरुपयोग के बदलते तरीकों से निपटना और उपभोक्ताओं के लिए अधिक पारदर्शी वाणिज्यिक संचार इकोसिस्टम को बढ़ावा देना है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में साइबर अपराधियों के हमले और भी परिष्कृत हो गए हैं। हालांकि, सरकार और संबंधित एजेंसियाँ इन खतरों से निपटने के लिए सक्रिय कदम उठा रही हैं। स्वदेशी एआई और बिग डेटा एनालिटिक्स का उपयोग, नए दिशा-निर्देश और साइबर सुरक्षा उपाय हमें इस डिजिटल युग में सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।