होली और रमज़ान का संगम: मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने जारी की विशेष एडवाइजरी
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-03-14 08:27:06

इस वर्ष 14 मार्च को एक विशेष संयोग देखने को मिलेगा, जब हिंदू समुदाय का रंगों का त्योहार होली और मुस्लिम समुदाय का पवित्र रमज़ान महीने का दूसरा जुमा (शुक्रवार) एक ही दिन पड़ रहे हैं। ऐसे में लखनऊ के प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने सामाजिक समरसता और आपसी सौहार्द को बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है।
होली और रमज़ान: एक दुर्लभ संयोग
होली, जो रंगों और खुशियों का प्रतीक है, इस बार रमज़ान के पवित्र महीने के दूसरे जुमे के साथ मेल खा रही है। यह संयोग दुर्लभ है और दोनों समुदायों के लिए विशेष महत्व रखता है। जहां एक ओर मुसलमान रोज़े रखकर इबादत में मशगूल हैं, वहीं दूसरी ओर हिंदू भाई होली की तैयारियों में व्यस्त हैं।
मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली की पहल
इस विशेष परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए, इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के चेयरमैन और लखनऊ की ईदगाह के पेश इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने एक एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने मस्जिदों के इमामों और प्रबंधन समितियों से अपील की है कि 14 मार्च को जुमे की नमाज़ का समय एक घंटे बढ़ा दिया जाए, ताकि नमाज़ियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और हिंदू समुदाय भी होली का त्योहार शांतिपूर्वक मना सके।
नमाज़ के समय में बदलाव
आम तौर पर लखनऊ की जामा मस्जिद ईदगाह में जुमे की नमाज़ का समय दोपहर 12:45 बजे होता है। लेकिन 14 मार्च को इसे बढ़ाकर दोपहर 2 बजे किया गया है। इसी तरह, जिन मस्जिदों में जुमे की नमाज़ 12:30 बजे से 1 बजे के बीच होती है, वहां भी नमाज़ का समय बढ़ाने की सलाह दी गई है।
स्थानीय मस्जिदों में नमाज़ अदा करने की अपील
मौलाना फरंगी महली ने मुसलमानों से अपील की है कि 14 मार्च को अवकाश होने के बावजूद, वे दूर की मस्जिदों में जाने के बजाय अपनी स्थानीय मस्जिदों में ही जुमे की नमाज़ अदा करें। इससे यातायात में भीड़भाड़ कम होगी और सभी को सुविधा होगी।
मुरादाबाद शहर इमाम ने कहा
मुरादाबाद के शहर इमाम हकीम सैयद मासूम अली आज़ाद ने कहा, "...मुस्लिम समुदाय से मेरा अनुरोध है कि शुक्रवार की नमाज़ के लिए अलग-अलग स्थानों पर व्यवस्था की जाएगी। दूर से आने वाले लोगों को अपने पड़ोस की मस्जिदों में नमाज़ अदा करने की कोशिश करनी चाहिए, क्योंकि शहर के केंद्र में भीड़भाड़ हो सकती है। जो लोग रोज़ा रख रहे हैं, उन्हें सावधान रहना चाहिए, सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके कपड़े साफ रहें। एहतियात के तौर पर, बाहर से आने वाले लोगों को लंबी दूरी की यात्रा करने के बजाय पास की मस्जिद में नमाज़ अदा करनी चाहिए..."
आपसी सौहार्द और गंगा-जमुनी तहज़ीब का प्रतीक
मौलाना की इस पहल को आपसी भाईचारे और गंगा-जमुनी तहज़ीब को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि इस कदम से राष्ट्रीय एकता और आपसी सौहार्द को बढ़ावा मिलेगा।
धर्म और संस्कृति के इस अनूठे मेल में, मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली की यह पहल समाज में आपसी समझ और सहयोग को बढ़ावा देने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह कदम न केवल लखनऊ बल्कि पूरे देश में सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करता है, जिससे अन्य समुदायों को भी प्रेरणा मिलेगी।