जयपुर के गोविंद देवजी मंदिर में फागोत्सव: भक्ति, रंग और संगीत का अनूठा संगम


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-03-14 07:57:08



 

जयपुर के प्रतिष्ठित गोविंद देवजी मंदिर में हाल ही में आयोजित फागोत्सव ने ब्रज की होली की जीवंतता को पुनर्जीवित किया, जहां भक्तों ने भक्ति, रंग और संगीत के अद्भुत संगम का अनुभव किया।

मंदिर की साज-सज्जा: फूलों और सतरंगी चुनरियों का अद्भुत मेल

फागोत्सव के लिए मंदिर के सत्संग भवन को फूलों और सतरंगी चुनरियों से सजाया गया था, जिससे पूरा वातावरण रंग और उल्लास से भर गया। मंदिर महंत अंजन कुमार गोस्वामी ने कोलकाता से आए बाल व्यास श्रीकांत शर्मा का तिलक, साफा और दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया।

सांस्कृतिक कार्यक्रम: नृत्य, संगीत और भजनों की प्रस्तुति

कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना और प्रसिद्ध भजन "होली खेले गोविंद के दासा" से हुई। श्रीकांत शर्मा के भजनों ने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया, विशेषकर "मैं ओढ़ चुनरी सत्संग की, भजनां को घाघरो" ने विशेष प्रभाव डाला। राधा-कृष्ण स्वरूपों पर नृत्य प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। नेहा द्वारा प्रस्तुत "मोहे वृंदावन को फाग दिखा दे" पर भावपूर्ण नृत्य ने दर्शकों का मन मोह लिया। रेखा सैनी द्वारा प्रस्तुत "कान्हा थाने सारी दुनिया बतावे चोर" पर नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा।

पुष्प वर्षा और विदेशी श्रद्धालुओं की सहभागिता

कार्यक्रम के दौरान पुष्प वर्षा की गई, जिससे भक्तिमय वातावरण और भी रमणीय हो गया। विदेशी श्रद्धालु और बच्चों ने भी इस फागोत्सव का आनंद लिया, जिससे यह उत्सव और भी जीवंत हो गया।

युवा कलाकारों की प्रस्तुतियां: कृष्ण और ग्वालों का जीवंत चित्रण

जयपुर के युवा कलाकार विराट और उनके साथी कलाकारों ने कृष्ण और ग्वालों के रूप में प्रस्तुतियां दीं, जो पूरी तरह से उत्साह और उमंग से भरी हुई थीं। शेखावाटी के कलाकारों ने पारंपरिक ढप-चंग पर धमाल गाकर श्रद्धालुओं को नाचने पर मजबूर कर दिया।

बाल व्यास श्रीकांत शर्मा: भजनों के माध्यम से भक्ति का प्रसार

बाल व्यास श्रीकांत शर्मा पिछले 24 वर्षों से पुष्प फाग में भजनों की प्रस्तुति दे रहे हैं। अब तक वे 1500 से अधिक भजन गा चुके हैं, जिनमें अधिकांश राजस्थानी भाषा में हैं। उनके भजनों का संग्रह बालकृष्ण बालासरिया के पास उपलब्ध है, जिसमें लगभग 3000 भजन शामिल हैं। शर्मा ने इस आयोजन के महत्व को बताते हुए कहा कि जगत के साधनों से सुख मिलता है, लेकिन भगवान के भजनों से असली आनंद मिलता है।

भक्ति और संस्कृति का अनूठा उत्सव

गोविंद देवजी मंदिर का फागोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर को संजोने और प्रसारित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। इस प्रकार के आयोजन समाज में एकता, प्रेम और सांस्कृतिक समृद्धि को बढ़ावा देते हैं।


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