संयुक्त किसान मोर्चा का महाआंदोलन: चंडीगढ़ में अनिश्चितकालीन धरने की घोषणा


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-03-09 09:45:03



 

पंजाब के किसानों ने एक बार फिर अपने हक की लड़ाई के लिए कमर कस ली है। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के नेतृत्व में 30 से अधिक किसान संगठनों ने चंडीगढ़ में अनिश्चितकालीन धरने का ऐलान किया है, जिससे राज्य और केंद्र सरकार की चिंताएं बढ़ गई हैं। यह आंदोलन किसानों की लंबित मांगों को लेकर है, जो अब तक अनसुनी रही हैं।

किसानों की मांगें: हक की पुकार

एसकेएम की प्रमुख मांगों में कृषि विपणन पर राष्ट्रीय नीति रूपरेखा के मसौदे को वापस लेना, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी, राज्य की कृषि नीति का कार्यान्वयन, और राज्य सरकार द्वारा एमएसपी पर छह फसलों की खरीद शामिल हैं। इसके अलावा, ऋण माफी, गन्ना बकाया का भुगतान, और भूमि अधिग्रहण के खिलाफ भी आवाज उठाई जा रही है।

सरकारी प्रतिक्रिया: वार्ता से टकराव तक

मुख्यमंत्री भगवंत मान और किसान नेताओं के बीच सोमवार को हुई बैठक बेनतीजा रही। किसान नेताओं का दावा है कि मुख्यमंत्री मान बिना किसी उकसावे के बैठक से बाहर चले गए, जिससे किसानों में असंतोष बढ़ गया। इसके बाद, सरकार ने कई किसान नेताओं के घरों पर छापेमारी की और उन्हें हिरासत में लिया, जिससे आंदोलन और तेज हो गया।

चंडीगढ़ की किलेबंदी: आंदोलन को रोकने के प्रयास

किसानों के आंदोलन को देखते हुए चंडीगढ़ प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर बहुस्तरीय बैरिकेडिंग की गई है और 1,900 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए 18 प्रमुख चेकप्वाइंट स्थापित किए गए हैं, जिनमें मुख्यमंत्री आवास, मनीमाजरा, नया गांव बैरियर, मुल्लांपुर बैरियर आदि शामिल हैं।

किसानों की रणनीति: शांतिपूर्ण विरोध का संकल्प

एसकेएम नेता जोगिंदर सिंह उग्रहान ने किसानों से अपील की है कि यदि उन्हें चंडीगढ़ जाते समय रोका जाए, तो वे किसी खाली जगह पर बैठ जाएं और सड़क अवरुद्ध न करें। यह रणनीति सार्वजनिक असुविधा से बचने और आंदोलन की शांति बनाए रखने के लिए अपनाई गई है।

क्रांतिकारी किसान यूनियन जिला मोगा के अध्यक्ष जतिंदर सिंह ने कहा, जब वे चंडीगढ़ जा रहे थे तो पंजाब पुलिस ने उन्हें मोगा जिले के अजीतवाल में रोक दिया। कुछ किसानों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। किसानों ने चंडीगढ़ जाने की इजाजत नहीं देने पर भगवंत मान सरकार के खिलाफ नारे भी लगाए। समराला में भी किसानों को पुलिस ने चंडीगढ़ जाने से रोक दिया है।

संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े किसानों का कहना है कि हमें चंडीगढ़ नहीं जाने दिया जा रहा है। धरने के मद्देनजर चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पॉइंट पर बैरिकेड्स लगाए गए हैं और सुरक्षा बढ़ा दी गई है। संयुक्त किसान मोर्चा में 30 से ज्यादा किसान संगठन शामिल हैं। संगठन ने कहा, "बुधवार सुबह ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य वाहनों में चंडीगढ़ के लिए निकले किसानों को पंजाब पुलिस द्वारा रोका जा रहा है।"

बीच रास्ते सड़कों पर लगाया धरना 

चंडीगढ़ कूच के लिए पंजाब के अलग-अलग जिलों से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ किसान रवाना हो रहे हैं। किसानों को पंजाब पुलिस ने रास्ते में ही रोक लिया है, जिसके बाद कई जगह पर किसान सड़कों पर ही धरना लगाकर बैठ गए हैं।

विपक्ष की प्रतिक्रिया: सरकार पर निशाना

पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने मुख्यमंत्री मान पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया है। वहीं, शिरोमणि अकाली दल ने किसान नेताओं की रिहाई की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि सरकार का यह रवैया लोकतंत्र के खिलाफ है और किसानों की आवाज को दबाने का प्रयास है।

प्रस्तावित धरने को देखते हुए पुलिस मुस्तैद 

चंडीगढ़ SP गीतांजलि खंडेलवाल ने पंजाब के संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) द्वारा आज चंडीगढ़ की ओर मार्च निकाले जाने पर कहा, "हमने चंडीगढ़ की सभी सीमाओं पर पुलिसकर्मियों को तैनात किया है, बैरिकेडिंग की गई है। सभी जगहों पर कड़ी जांच की जा रही है। हम रूट डायवर्जन के लिए प्रयास कर रहे हैं और हमारी कोशिश है कि लोगों को कम से कम असुविधा हो। लेकिन जहां भी हमें संदेह है कि हमारी जांच के कारण ट्रैफिक जाम हो सकता है, हमने ट्रैफिक रूट डायवर्ट कर दिया है..."

आंदोलन की अग्निपरीक्षा

पंजाब के किसानों का यह आंदोलन सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। किसानों की मांगें और सरकार की प्रतिक्रिया दोनों ही राज्य की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह आंदोलन किस दिशा में जाता है और सरकार एवं किसानों के बीच संवाद की क्या संभावनाएं बनती हैं।


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