मुंबई पुलिस में हड़कंप: धारावी के चार सिपाही रिश्वतखोरी के आरोप में निलंबित


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-03-08 14:26:54



 

मुंबई के धारावी पुलिस स्टेशन के चार कांस्टेबलों को हाल ही में रिश्वतखोरी के आरोप में निलंबित किया गया है। यह कार्रवाई एक वायरल वीडियो के बाद की गई है, जिसमें ये अधिकारी कथित रूप से हॉकरों से रिश्वत लेते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस घटना ने मुंबई पुलिस की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं और विभाग में हड़कंप मचा दिया है।

वायरल वीडियो: भ्रष्टाचार का खुलासा

कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें धारावी पुलिस स्टेशन के चार कांस्टेबल हॉकरों से रिश्वत लेते हुए नजर आ रहे थे। इस वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय अवैध रूप से पैसे ले रहे हैं। वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद, स्थानीय समुदाय और सोशल मीडिया पर लोगों ने इसकी कड़ी निंदा की और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

निलंबित अधिकारी: नाम और पद

मुंबई पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। निलंबित अधिकारियों में बीट मार्शल महेंद्र पुजारी, काशीनाथ गजरे, गंगाधर खरात, और अप्पासाहेब वाकचौरे शामिल हैं। इन सभी पर आरोप है कि उन्होंने अपने कर्तव्यों का दुरुपयोग करते हुए हॉकरों से अवैध रूप से पैसे लिए।

मुंबई पुलिस की प्रतिक्रिया: सख्त कदम

मुंबई पुलिस ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जांच के आदेश दिए और संबंधित अधिकारियों को निलंबित कर दिया। पुलिस विभाग ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस कदम से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि कानून के रक्षक स्वयं कानून का पालन करें और जनता का विश्वास बनाए रखें।

स्थानीय समुदाय की प्रतिक्रिया: विश्वासघात की भावना

इस घटना के बाद धारावी के स्थानीय निवासियों में नाराजगी और विश्वासघात की भावना है। लोगों का कहना है कि जिन अधिकारियों पर उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी है, वे ही यदि भ्रष्टाचार में लिप्त होंगे, तो जनता का विश्वास कैसे बना रहेगा। स्थानीय समुदाय ने पुलिस विभाग से अपील की है कि वे अपने अधिकारियों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखें और ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें।

भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई: एक निरंतर प्रयास

यह घटना एक बार फिर से यह साबित करती है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में निरंतर सतर्कता और सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है। पुलिस विभाग को चाहिए कि वे अपने अधिकारियों को नियमित रूप से प्रशिक्षण दें और उन्हें नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूक करें। साथ ही, जनता को भी सतर्क रहना होगा और ऐसे मामलों की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को देनी होगी, ताकि भ्रष्टाचार मुक्त समाज का निर्माण हो सके।


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