न्याय की नई राह: सुप्रीम कोर्ट ने चेक बाउंस मामलों के स्थानांतरण पर दी स्पष्टता


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-03-08 11:22:13



 

क्या चेक बाउंस मामलों में न्याय की प्रक्रिया अब और सुगम होगी? सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है, जिससे न्यायिक प्रणाली में नए बदलाव की उम्मीद जाग रही है।

पृष्ठभूमि:

एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत चेक बाउंस मामलों में अब तक स्थानांतरण को लेकर अस्पष्टता थी। अक्सर, अभियुक्तों को विभिन्न राज्यों में मामलों का सामना करना पड़ता था, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में कठिनाइयाँ उत्पन्न होती थीं।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला:

जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने स्पष्ट किया कि सीआरपीसी की धारा 406 के तहत सुप्रीम कोर्ट के पास चेक बाउंस मामलों को एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानांतरित करने की शक्ति है। उन्होंने कहा कि एनआई एक्ट की धारा 142(1) में गैर-अस्थिर खंड के बावजूद, सीआरपीसी की धारा 406 के तहत यह शक्ति बरकरार है, यदि यह न्याय के उद्देश्य के लिए समीचीन पाया जाता है। 

मामले का विवरण:

इस मामले में, याचिकाकर्ताओं ने नागपुर में दायर दो मामलों को दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग की थी, ताकि सभी मामलों की एक साथ सुनवाई हो सके। शिकायतकर्ता ने तर्क दिया कि एनआई एक्ट की धारा 142(1) में गैर-अस्थिर खंड सीआरपीसी की धारा 406 को ओवरराइड करेगा, इसलिए स्थानांतरण संभव नहीं है।

कोर्ट की टिप्पणी:

सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि सीआरपीसी की धारा 406 के तहत लंबित आपराधिक कार्यवाही को स्थानांतरित करने की शक्ति एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत अपराधों के संबंध में निरस्त नहीं होती है। इस प्रकार, अदालत ने नागपुर के मामलों को दिल्ली स्थानांतरित करने की अनुमति दी।

यह फैसला न्यायिक प्रणाली में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का संकेत देता है। अब, चेक बाउंस मामलों में अभियुक्तों को विभिन्न राज्यों में मामलों का सामना करने में होने वाली कठिनाइयों को कम किया जा सकेगा, जिससे न्याय की प्रक्रिया अधिक सुगम और त्वरित होगी।


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