नौकरी के लिए बिकता भविष्य! भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा! शिक्षक भर्ती घोटाले का भंडाफोड़
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-03-07 17:18:50

भारत में शिक्षा को पवित्र पेशा माना जाता है, लेकिन जब इसकी जड़ों में भ्रष्टाचार घर कर ले, तो यह केवल एक व्यवसाय बनकर रह जाता है। पश्चिम बंगाल का बहुचर्चित शिक्षक भर्ती घोटाला इसी कड़वे सच का खुलासा करता है, जहां योग्य उम्मीदवारों को नजरअंदाज कर पैसे और सत्ता के खेल में अयोग्य उम्मीदवारों को नौकरी दी गई। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) अब इस गहरी साजिश की परतें उधेड़ने में जुटा है और मुख्य आरोपी, पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी, के खिलाफ सबूतों का पहाड़ खड़ा हो रहा है।
सिफारिशों का खेल: 132 प्रभावशाली नामों की जांच!
CBI को उन प्रभावशाली लोगों के नाम मिले हैं, जिन्होंने शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में अयोग्य उम्मीदवारों की सीधी सिफारिश की थी। 132 नामों की एक सूची तैयार की गई है, लेकिन इनमें से केवल उन व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिनकी सीधे पार्थ चटर्जी तक पहुंच थी। CBI सूत्रों के अनुसार, इन सिफारिशों के प्रमाण लिखित पत्र, व्हाट्सएप संदेश और एसएमएस के रूप में मौजूद हैं।
CBI अधिकारियों का कहना है कि जिन लोगों की सिफारिशें प्रभावशाली रही हैं, उनके बयान इस केस को और भी मजबूत बनाएंगे। जांच एजेंसी का मुख्य ध्यान उन लोगों पर है, जिनकी पहुँच सत्ता के शीर्ष स्तर तक थी।
पार्थ चटर्जी की ‘व्यक्तिगत पसंद’: पैसे लेकर बनाई अपनी लिस्ट!
शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी थीं कि स्वयं पार्थ चटर्जी ने उन अयोग्य उम्मीदवारों की सूची तैयार की थी, जिन्होंने नौकरी पाने के लिए रिश्वत दी थी। CBI को मिले सबूतों के अनुसार, यह घोटाला विशेष रूप से प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती में अधिक प्रभावी था, जबकि माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षकों की भर्ती में भी पैसों के लेन-देन की पुष्टि हुई है।
'खाली OMR शीट भी पास' – कोर्ट में सीबीआई की सनसनीखेज रिपोर्ट!
हाल ही में CBI ने कलकत्ता हाईकोर्ट में एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल की, जिसमें इस भर्ती घोटाले की गहराई को उजागर किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, कई उम्मीदवारों ने लिखित परीक्षा में खाली OMR शीट जमा की थी, फिर भी वे परीक्षा में पास घोषित किए गए और शिक्षक की नौकरी हासिल कर ली। CBI ने यह भी खुलासा किया कि OMR शीट्स को हेरफेर कर योग्य दिखाया गया, जिससे अयोग्य उम्मीदवार भी परीक्षा में सफल हो गए।
CBI और ED की घेराबंदी: चटर्जी और सहयोगियों पर शिकंजा!
CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) दोनों इस घोटाले की तह तक जाने में जुटे हैं। जुलाई 2022 में ED ने पार्थ चटर्जी को गिरफ्तार किया था और उनके घर से करोड़ों की नकदी बरामद की गई थी। उनके साथ उनकी करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी को भी गिरफ्तार किया गया था।
इसके अलावा, पार्थ चटर्जी के दामाद का नाम भी इस केस में आया है, जबकि 'बबली चटर्जी मेमोरियल ट्रस्ट' को भी संदेह के घेरे में लिया गया है। ED की चार्जशीट में यह आरोप लगाया गया है कि भ्रष्टाचार से अर्जित धन को इस ट्रस्ट के नाम पर दान दिखाकर सफेद किया गया।
CBI की कड़ी पूछताछ और आगे की रणनीति!
CBI ने अब तक इस केस से जुड़े प्रभावशाली लोगों के नामों को गुप्त रखा है, लेकिन जल्द ही उन पर कार्रवाई की जाएगी। एजेंसी का कहना है कि इन सभी सिफारिशकर्ताओं के बयान दर्ज करना बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे केस को और मजबूत बनाया जा सकता है।
शिक्षा क्षेत्र में भ्रष्टाचार की कीमत – कौन है जिम्मेदार?
यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल की शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त गहरे भ्रष्टाचार को उजागर करता है। यह न केवल योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय है, बल्कि शिक्षा की साख को भी धूमिल करता है। अब सभी की निगाहें CBI की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी? क्या शिक्षा व्यवस्था में सुधार होगा? ये सवाल अभी भी अनुत्तरित हैं।