वन्यजीवन की क्षति: तिरुचिरापल्ली में वरिष्ठ मादा हाथी जैनी नहीं रही, पुनर्वास केंद्र में शोक


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-03-06 19:20:12



 

तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली जिले में स्थित एम.आर. पलायम सरकारी हाथी पुनर्वास केंद्र में 60 वर्षीय मादा हाथी 'जैनी' की मृत्यु हो गई है। जैनी पिछले एक महीने से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थी, और वन विभाग के अधिकारियों द्वारा उसे निरंतर चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही थी। हालांकि, सभी प्रयासों के बावजूद, 3 मार्च को शाम 4:30 बजे के करीब जैनी ने अंतिम सांस ली।

वन्यजीवन के संरक्षण में लगे पुनर्वास केंद्रों में प्रत्येक जीव का अपना एक विशेष स्थान होता है। ऐसे ही एक केंद्र में, 60 वर्षीय मादा हाथी 'जैनी' की मृत्यु ने सभी को शोक में डाल दिया है। आइए, जानते हैं इस घटना से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य और जैनी के अंतिम दिनों की कहानी।

जैनी का परिचय और पुनर्वास केंद्र में जीवन

जैनी, एक 60 वर्षीय मादा हाथी, तिरुचिरापल्ली वन प्रभाग के आरक्षित वन क्षेत्र में स्थित एम.आर. पलायम सरकारी हाथी पुनर्वास केंद्र में रह रही थी। यह केंद्र लगभग 50 एकड़ में फैला हुआ है और इसमें कुल 10 मादा हाथियों का संरक्षण किया जाता है। जैनी इनमें से एक प्रमुख सदस्य थी, जिसने अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा इस केंद्र में बिताया।

स्वास्थ्य समस्याएं और चिकित्सा प्रयास

पिछले एक महीने से, जैनी स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त थी। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, उसकी देखभाल के लिए जिला वन अधिकारी द्वारा एक विशेष विशेषज्ञ चिकित्सा समिति नियुक्त की गई थी। इस समिति ने जैनी के उपचार के लिए आवश्यक सिफारिशें प्रदान कीं, और निरंतर चिकित्सा देखभाल सुनिश्चित की गई। इसके बावजूद, उसकी स्थिति में सुधार नहीं हो सका।

अंतिम क्षण और मृत्यु की पुष्टि

3 मार्च को, जैनी अत्यंत कमजोर हो गई और थकान की स्थिति में जमीन पर लेटी हुई पाई गई। शाम 4:30 बजे के आसपास, पशु चिकित्सकों ने उसकी मृत्यु की पुष्टि की। यह खबर पुनर्वास केंद्र और वन विभाग के लिए एक बड़ी क्षति थी, क्योंकि जैनी वहां की एक महत्वपूर्ण सदस्य थी।

मृत्युपरांत परीक्षण और अंतिम संस्कार

4 मार्च को सुबह 9:30 बजे, मुख्य वन संरक्षक ए. पेरियासामी और जिला वन अधिकारी एस. कृतिका की देखरेख में जैनी का पोस्टमॉर्टम किया गया। इस प्रक्रिया में सहायक वन संरक्षक खादर बाशा और वन रेंज अधिकारी वी.पी. सुब्रमण्यम सहित कई अधिकारी उपस्थित थे। पोस्टमॉर्टम के बाद, आधिकारिक प्रोटोकॉल का पालन करते हुए, जैनी को एम.आर. पलायम आरक्षित वन क्षेत्र में स्थित हाथी पुनर्वास केंद्र की उत्तरी सीमा के पास दफनाया गया।

वन विभाग की प्रतिक्रिया और भविष्य की योजना

जैनी की मृत्यु के बाद, वन विभाग ने पुनर्वास केंद्र में अन्य हाथियों की स्वास्थ्य स्थिति की समीक्षा करने का निर्णय लिया है। अधिकारियों का कहना है कि वे भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतेंगे और हाथियों की स्वास्थ्य निगरानी को और सख्त करेंगे।

जैनी की विरासत

जैनी की मृत्यु न केवल पुनर्वास केंद्र के लिए, बल्कि पूरे वन्यजीवन संरक्षण समुदाय के लिए एक बड़ी क्षति है। उसका जीवन हमें हाथियों के संरक्षण और उनकी देखभाल के महत्व की याद दिलाता है। आशा है कि जैनी की विरासत हमें वन्यजीवन के प्रति हमारी जिम्मेदारियों का एहसास कराएगी और हम उनके संरक्षण के लिए और अधिक प्रयास करेंगे।


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