वाहनो का बढ़ता दवाब और खस्ता सड़के— प्रशासन की सुस्ती और बढ़ती दुर्घटनाए ! —— मनोहर चावला
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-03-06 04:11:58

इन दिनों हर रोज़ सड़क दुर्घटनाओं से मरने वाले, घायल होने वाले के समाचार अखबारों की सुर्खियां बने हुए है। वैसे तो हमारे अपने शहर बीकानेर की खस्ता सड़के इसके लिए जिम्मेदार है ही लेकिन वाहनो के बढ़ते दवाब के कारण भी सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि हुई है। थ्री- व्हीलर, टैक्सिया, कारें, बसे, ट्रक्स, और ओवरलोडिंग गाड़िया इसके लिए जिम्मेदार तो है ही लेकिन एक बड़ा कारण नशा करके वाहन चलाना, असुरक्षित वाहनो को सड़को पर चलाने के लिए परमिट देना भी एक कारण है। थ्री व्हीलर वाले जिनके परमिट नोखा, देशनोक, नापासर, कोलायत , गजनेर आदि के होते है वे चलाते शहर बीकानेर में है सेंकड़ो गाड़िया मिलीभगत से आवैधानिक रूप से यहाँ चल रही है इन पर दो बड़े कथित नेताओं का हाथ बताते है। पुलिस सिर्फ हेलमेट की कमाई के अलावा कोई काम नही करती। हालाकि हाल ही में बीकानेर आए राज्यपाल ने सड़को पर बढ़ते वाहनो के कारण सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में तेजी से वृद्धि को कारण बताया है लेकिन देखा जाय तो हम स्वयं भी इसके लिए जिम्मेदार है अपने आपको बड़ा आदमी दिखाने के लिए हम कार और वो भी लक्ज़री कार को ही अपना स्टेटस बताने लगे है और जैसे तैसे अपनी ओकात को भूलकर बैंको से लोन लेकर कार खरीद रहे है कभी बेटे की जिद पूरी करने के लिए, कभी पत्नी को खुश करने के लिए, कभी अपनी शान- शोकत दर्शाने के लिए कारें खरीद कर दुर्घटनाओं को न्यौता दे रहे है अपने लिए अलग- बेटे के लिए अलग, बेटी के लिए अलग, पत्नी के लिए अलग अलग कारे है जबकि घर में रखने के लिए एक कार की भी जगह नहीं है। गली में या पड़ोसियों के घरों के आगे कार पार्किंग होती है। और फिर प्रेम और सदभाव बदल जाता है दुश्मनी में। लेकिन प्रशासन को इन बातो से कुछ लेना देना नहीं!
जबकि आरटीओ में कार का राजीट्रेशन करते वक्त शपथपत्र भर कर देना होता हैं कि उनके घर में कार रखने का स्थान हैं। लेकिन शपथ पथ झूठा होता हैं। घर में सिर्फ़ रहने के अलावा- वे कार की पार्किंग गली में- या पड़ोसियों के घर के आगे रखते हैं। ये कार वाले सड़क, गली, मोहल्ले को अपने बाप की जागीर समझते हैं। इनसे बहुत परेशान है आम नागरिक— सड़के छोटी हो गई है गलियाँ संकरी हों गई है फिर जब आम आदमी के घर के आगे सारा दिन कार खड़ी रहती हैं। तो परेशानी देखते ही बनती है प्रशासन को इससे सरोकार नहीं। वे कभी शपथपत्र का वेरिफिकेशन नहीं करते। फिर जब कभी कोई घटना- मसलन कार के शीशे टूटने का समाचार मिलना- या पार्किंग की बात पर कोई उपद्रव होना— तब प्रशासन की नींद खुलती हैं। फ़िलहाल हम बीकानेर नागणीजी रोड- पवनपुरी की बात करे तो यहाँ के निजी अस्पतालों में कोई पार्किंग नहीं, सड़क पर वाहन खड़े रहते हैं। यहाँ के कई नामी डॉकटरो के घर के आगे पीछे गली में४०-५० कारे टेम्पो रास्ते जाम किए हुए होतै हैं। रिलायंस- शो रूम, बोथरा लेब्रोट्री- वेद की चार मंज़िला में लगने वाले चार दफ़्तर, चाहते हैं। पर प्रशासन क्यों आँखें बन्द किए हुए हैं ? यह समझ के बाहर हैं। या किसी बड़ी दुर्घटना के इन्तज़ार में हैं। पता नहीं कि कभी भी जिलाधीश महोदया इस और जरा भी ध्यान नहीं देती? एक बार तो महोदया इस क्षेत्र का मुआना कर लेवे और देखे कि इस रिहायशी क्षेत्र के निवासी किस भय और आक्रांत में जी रहे है। देहली सरकार रात भर गली- सड़क पर पार्किंग करने पर२००० रु. माह शुल्क लेती हैं। और हमारा नगर निगम हैं कि वे इस और देखता भी नहीं।कवि दुष्यंत के शब्दों में— हंगामा खड़ा करना मेरा मक़सद नहीं, दोस्तों- चिंगारी तो कही से उठनी चाहिए।