होटल मरुधर हेरिटेज में सजी साहित्यिक शाम: रचनाकारों की प्रस्तुति से श्रोता मंत्रमुग्ध
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-03-05 22:27:36

बीकानेर की साहित्यिक परंपरा में एक और सुनहरा अध्याय जुड़ गया जब पर्यटन लेखक संघ और महफिले-अदब की साप्ताहिक काव्य गोष्ठी का आयोजन होटल मरुधर हेरिटेज में किया गया। इस आयोजन में हिंदी और उर्दू के प्रतिष्ठित रचनाकारों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं से श्रोताओं का मन मोह लिया।
मुख्य अतिथि की प्रस्तुति: नवाचार पर व्यंग्य
गोष्ठी के मुख्य अतिथि, पूर्व प्रिंसिपल, चिंतक और लेखक प्रोफेसर डॉ. नरसिंह बिनानी ने नवाचार पर आधारित अपनी हास्य-व्यंग्य रचना प्रस्तुत की। उनकी पंक्तियाँ: "अनेक रोगों की एक दवा समाई नवाचार में, भ्रष्टाचार के नए-नए तरीके छिपे हैं नवाचार में।" इन पंक्तियों ने श्रोताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया और वर्तमान समाज में नवाचार के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।
अध्यक्षीय संबोधन: मां को समर्पित रचना
गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए कमल किशोर पारीक ने मां को समर्पित अपनी रचना प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि पर्यटन लेखक संघ की साप्ताहिक गोष्ठियां बीकानेर में साहित्य को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रही हैं, जहां हिंदी, उर्दू और राजस्थानी साहित्य को मंच मिल रहा है।
आयोजक की प्रस्तुति: बेवफा दोस्तों पर कटाक्ष
आयोजन के आयोजक डॉ. ज़िया उल हसन कादरी ने बेवफा दोस्तों पर आधारित अपनी रचना प्रस्तुत की, जिसने श्रोताओं की खूब दाद बटोरी। उनकी पंक्तियाँ: "जिनमें खुलूस है, न मुहब्बत का नाम है, उन दोस्तों को दूर से अपना सलाम है।" इन पंक्तियों ने दोस्ती के बदलते मायनों पर गहरा प्रहार किया।
वरिष्ठ शायरों की प्रस्तुति: विविध विषयों पर रचनाएं
गोष्ठी में वरिष्ठ शायर ज़ाकिर अदीब ने "फ़रेब" विषय पर अपनी ग़ज़ल सुनाई, जिसमें उन्होंने दुनिया की बेवफाई को उजागर किया। उनकी पंक्तियाँ: "शुमार करना भी मुमकिन नहीं है उसके लिए, वो जिसने खाए हैं दुनिया में बेशुमार फ़रेब।" वहीं, असद अली असद ने सामाजिक मुद्दों पर अपनी रचना प्रस्तुत की, जो श्रोताओं को सोचने पर मजबूर कर गई।
वली मुहम्मद गौरी वली रजवी की प्रस्तुति: आपसी विवादों का समाधान
वली मुहम्मद गौरी वली रजवी ने आपसी विवादों के समाधान पर आधारित अपनी रचना प्रस्तुत की। उनकी पंक्तियाँ: "बात हो कोई तो उसका बढ़ के कर लो फ़ैसला, फ़ैसला गर ना किया तो फ़ासला हो जाएगा।" इन पंक्तियों ने समाज में संवाद की महत्ता को रेखांकित किया।
डॉ. जगदीश दान बारहठ की प्रस्तुति: जीवन के विविध रंग
डॉ. जगदीश दान बारहठ ने जीवन के विविध रंगों पर आधारित अपनी रचना प्रस्तुत की, जिसमें उन्होंने जीवन की जटिलताओं और सरलताओं को खूबसूरती से उकेरा।
अमर जुनूनी की तरन्नुम में प्रस्तुति: सुरमयी माहौल
अमर जुनूनी ने तरन्नुम में अपनी ग़ज़ल प्रस्तुत कर माहौल को सुरमयी बना दिया। उनकी पंक्तियाँ: "मुझे मालूम करना है, मुझे मालूम करना है, वो ऐसा कौन था जो मेरे घर को कर गया रौशन।" इन पंक्तियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
भगवती पारीक और सरोज शर्मा की प्रस्तुति: महिला रचनाकारों का योगदान
महिला रचनाकारों में भगवती पारीक और सरोज शर्मा ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं, जिन्होंने समाज में महिलाओं की भूमिका और उनकी संवेदनाओं को अभिव्यक्त किया।
अब्दुल शकूर सिसोदिया की प्रस्तुति: सामाजिक मुद्दों पर प्रकाश
अब्दुल शकूर सिसोदिया ने सामाजिक मुद्दों पर आधारित अपनी रचना प्रस्तुत की, जिसमें उन्होंने समाज की वर्तमान स्थिति पर गहरा चिंतन प्रस्तुत किया।
संचालन और आभार: सफल आयोजन की कुंजी
गोष्ठी का संचालन डॉ. ज़िया उल हसन कादरी ने कुशलता से किया, जबकि प्रो. टी. के. जैन ने आभार व्यक्त किया। इस आयोजन ने बीकानेर की साहित्यिक परंपरा को और समृद्ध किया है।