दिंडीगुल में श्रद्धा का महासंगम: 10,000 भक्तों की 15-दिवसीय तपस्या
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-03-05 22:17:45

दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य के दिंडीगुल जिले में एक ऐसा धार्मिक आयोजन हो रहा है, जिसने देशभर के श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया है। 10,000 से अधिक भक्तों ने 15 दिनों की कठिन तपस्या का संकल्प लिया है, जिसमें वे पवित्र जल के कलश लेकर नथम मारियम्मन मंदिर की ओर अग्रसर हैं। यह अनूठा पर्व करंदामलाई कन्निमार तीर्थम से प्रारंभ होकर नथम मारियम्मन मंदिर तक की यात्रा को समर्पित है, जिसमें परंपरागत अनुष्ठान, शोभायात्राएँ और भव्य उत्सव शामिल हैं। मुख्य आकर्षण 'गरुड़ वृक्ष आरोहण' है, जो 18 मार्च को आयोजित होगा।
करंदामलाई कन्निमार तीर्थम से प्रारंभ: पवित्र जल का संग्रहण
करंदामलाई कन्निमार तीर्थम, जो अपनी पवित्रता और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है, इस यात्रा का प्रारंभिक बिंदु है। यहाँ भक्तगण विशेष अनुष्ठानों के बाद पवित्र जल का संग्रहण करते हैं, जिसे वे नथम मारियम्मन मंदिर तक ले जाते हैं। इस प्रक्रिया में भक्तों की आस्था और समर्पण स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जो इस धार्मिक आयोजन की महत्ता को और बढ़ाती है।
नथम मारियम्मन मंदिर की ओर अग्रसर: 15-दिवसीय तपस्या
पवित्र जल के साथ 10,000 से अधिक भक्तों की यह यात्रा 15 दिनों तक चलती है, जिसमें वे विभिन्न गाँवों और कस्बों से होकर गुजरते हैं। इस दौरान भक्तगण पारंपरिक गीत-संगीत, नृत्य और अनुष्ठानों के माध्यम से अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। यह यात्रा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक धरोहर को भी प्रदर्शित करती है।
उत्सव की शोभायात्राएँ और अनुष्ठान: परंपरा का जीवंत प्रदर्शन
यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर भव्य शोभायात्राएँ और अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं, जो इस पर्व की शोभा को और बढ़ाते हैं। स्थानीय समुदाय इन आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं, जिससे सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत को बल मिलता है। इन कार्यक्रमों में पारंपरिक नृत्य, संगीत और रंगारंग झाँकियाँ शामिल होती हैं, जो दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं।
गरुड़ वृक्ष आरोहण: 18 मार्च का मुख्य आकर्षण
इस पूरे पर्व का मुख्य आकर्षण 'गरुड़ वृक्ष आरोहण' है, जो 18 मार्च को आयोजित होगा। इस अनूठी परंपरा में भक्तगण एक विशेष वृक्ष पर चढ़कर अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसमें शामिल साहस और कौशल के कारण भी प्रसिद्ध है। देशभर से श्रद्धालु और पर्यटक इस विशेष आयोजन को देखने के लिए एकत्रित होते हैं, जिससे स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है।
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व: आस्था का प्रतीक
यह पर्व तमिलनाडु की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक परंपराओं का प्रतीक है। भक्तों की आस्था, समर्पण और समुदाय की एकता इस आयोजन को विशेष बनाती है। यह न केवल धार्मिक उत्सव है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
आस्था और परंपरा का संगम
दिंडीगुल का यह 15-दिवसीय धार्मिक आयोजन आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर का जीवंत उदाहरण है। 10,000 से अधिक भक्तों की सहभागिता और उनकी श्रद्धा इस पर्व की महत्ता को दर्शाती है। करंदामलाई से नथम तक की यह आध्यात्मिक यात्रा न केवल धार्मिक अनुष्ठानों का पालन है, बल्कि समाज में एकता, प्रेम और समर्पण का संदेश भी प्रसारित करती है।