अबू आजमी के औरंगजेब प्रेम पर सियासी तूफान, मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी उतरे बचाव में
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-03-05 21:06:30

महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया विवाद तब उभरा जब समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक अबू आसिम आजमी ने मुगल शासक औरंगजेब के प्रति अपनी प्रशंसा व्यक्त की। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, जिससे विभिन्न दलों के नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं।
अबू आजमी का बयान:
हाल ही में, अबू आजमी ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा कि औरंगजेब को एक क्रूर शासक के रूप में चित्रित करना इतिहास के साथ अन्याय है। उन्होंने दावा किया कि औरंगजेब ने कई मंदिरों का निर्माण कराया और वह धार्मिक सहिष्णुता के प्रतीक थे। उनके अनुसार, इतिहासकारों ने औरंगजेब की छवि को गलत तरीके से प्रस्तुत किया है।
विपक्ष की तीखी प्रतिक्रियाएँ:
अबू आजमी के इस बयान पर विपक्षी दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने कहा, "औरंगजेब जैसे आक्रांता का गुणगान करना शर्मनाक है। समाजवादी पार्टी को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए, या फिर अबू आजमी को पार्टी से निकाल देना चाहिए।"
कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रियाएँ:
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी ने कहा, "औरंगजेब ने मंदिर तुड़वाए, लेकिन उसने मंदिरों को पैसे भी दिए।" उन्होंने यह भी कहा कि 500 साल बाद औरंगजेब के बारे में चर्चा करने का कोई औचित्य नहीं है और इस मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी का समर्थन:
बरेली स्थित दरगाह आला हजरत से जुड़े संगठन ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने अबू आजमी के बयान का समर्थन किया है। उन्होंने कहा, "अबू आजमी का औरंगजेब के प्रति दृष्टिकोण उनका व्यक्तिगत मत है, और हर किसी का ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के प्रति अपना नजरिया होता है। उन्होंने ऐसा कुछ नहीं कहा है जिससे उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।"
अबू आजमी की सफाई:
विवाद बढ़ता देख अबू आजमी ने अपने बयान पर स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा, "मेरे शब्दों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। मैंने वही कहा है जो इतिहासकारों और लेखकों ने औरंगजेब के बारे में कहा है। मैंने छत्रपति शिवाजी महाराज या किसी अन्य महापुरुष के बारे में कोई अपमानजनक टिप्पणी नहीं की है। लेकिन फिर भी, अगर मेरे बयान से किसी को ठेस पहुंची है, तो मैं अपने शब्द वापस लेता हूँ।"
विधानसभा में हंगामा:
अबू आजमी के बयान के बाद महाराष्ट्र विधानसभा में भी हंगामा हुआ। विपक्षी दलों ने उनके बयान की निंदा करते हुए माफी की मांग की। विधानसभा की कार्यवाही के दौरान इस मुद्दे पर तीखी बहस हुई, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित हुई।
कानूनी कार्रवाई:
अबू आजमी के बयान के बाद महाराष्ट्र के ठाणे में उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया है। उन पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
राजनीतिक विश्लेषण:
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐतिहासिक व्यक्तित्वों पर इस प्रकार की बयानबाजी से समाज में विभाजन की स्थिति उत्पन्न होती है। राजनीतिक नेताओं को ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर टिप्पणी करते समय सावधानी बरतनी चाहिए, ताकि सामाजिक सौहार्द बना रहे।
अबू आजमी के औरंगजेब पर दिए गए बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है। विपक्षी दलों की तीखी प्रतिक्रियाएँ, कानूनी कार्रवाई और विधानसभा में हंगामे के बीच अबू आजमी ने अपना बयान वापस ले लिया है। यह प्रकरण इस बात का उदाहरण है कि ऐतिहासिक मुद्दों पर की गई बयानबाजी कैसे वर्तमान राजनीति को प्रभावित कर सकती है।