रमज़ान: रूहानी पाकीज़गी और बरकतों वाला महीना सभी आसमानी किताबें इसी महीने में अवतरित हुईं
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-03-05 06:01:41

रमज़ानुल मुबारक इस्लामी साल का सबसे पाक और अफ़ज़ल महीना माना जाता है। इस दौरान तमाम मुसलमान अल्लाह की इबादत, रोज़ा, ज़कात और नेक कार्यों में लीन रहते हैं। यह महीना सिर्फ़ भूखे-प्यासे रहने के लिए नहीं बल्कि आत्म-संयम, धैर्य, इबादत, समाजसेवा और रूहानी ताज़गी प्राप्त करने का एक ज़रिया भी है।
सबसे खास बात यह है कि इसी महीने में दुनिया की सबसे पवित्र और अमूल्य किताब, "कुरआन मजीद" का नुज़ूल हुआ। इसके अलावा, इसी महीने में चारों आसमानी किताबें भी नाज़िल की गईं, जिससे इसकी बरकत और बढ़ जाती है।
कुरआन का नुज़ूल: वह मुबारक रात जब हिदायत की रोशनी उतरी
इस्लामिक इतिहास के अनुसार, 14 अगस्त 610 ईस्वी, 18 रमज़ान की मुबारक रात, जुमातुल मुबारक के दिन ग़ारे हिरा में पहली बार अल्लाह का कलाम (कुरआन) नाज़िल हुआ।
ग़ारे हिरा, मक्का से तीन मील दूर स्थित एक छोटी-सी गुफा है, जिसे "जब्ले नूर" भी कहा जाता है। इसकी लंबाई लगभग चार गज और चौड़ाई पौने दो गज है। इसी पवित्र गुफा में फ़रिश्ते हज़रत जिब्राईल अलैहिस्सलाम ने पहली बार पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सलल्लाहु अलैहि वसल्लम पर कुरआन की इब्तिदाई आयात नाज़िल कीं।
अन्य आसमानी किताबों का नुज़ूल
इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, रमज़ानुल मुबारक में सिर्फ़ कुरआन ही नहीं, बल्कि चारों आसमानी किताबें भी इसी महीने में नाज़िल हुईं:
01 रमज़ान: हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम पर सहीफ़ा नाज़िल हुआ।
06 रमज़ान: हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम पर तौरैत नाज़िल हुई।
12 रमज़ान: हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम पर ज़बूर नाज़िल हुई।
18 रमज़ान: हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम पर इंजील नाज़िल हुई।
इस तरह, रमज़ान एक ऐसा पाक महीना है जिसमें अल्लाह ने अपनी रहमत और हिदायत की रोशनी पूरी इंसानियत को बख्शी।
रोज़े की फ़र्ज़ियत और उसके फायदे
रोज़े का इतिहास बहुत पुराना है और यह परंपरा हज़रत आदम अलैहिस्सलाम के समय से ही चली आ रही है। लेकिन, हिजरी सन 2 , फरवरी 624 में रमज़ान के रोज़े को आधिकारिक रूप से फ़र्ज़ कर दिया गया।
कुरआन में अल्लाह फरमाता हैं:
"ऐ लोगो! जो ईमान लाए हो, तुम पर रोज़े फ़र्ज़ किए गए, जिस तरह तुम से पहले अम्बिया अलैहिस्सलाम के पैरोकारों पर फ़र्ज़ किए गए थे। इससे तवक्क़ा है कि तुम में तक़वा की सिफत पैदा होगी।" (सूरह अल-बक़रह, आयत 183)
रोज़े के उद्देश्य और लाभ
तक़वा की पहचान: यह इंसान को ग़लत कामों से बचने और अल्लाह से जुड़ने का मौका देता है।
सब्र और बर्दाश्त: रोज़ा आत्म-संयम सिखाता है।
झूठ से बचाव: यह सच्चाई और ईमानदारी की ओर प्रेरित करता है।
रुहानी और जिस्मानी फायदा: रोज़े से शरीर की सफ़ाई होती है और आत्मा को मजबूती मिलती है।
हमदर्दी और ग़मगुसार: भूख-प्यास सहकर इंसान को ग़रीबों की हालत समझ में आती है।
रमज़ान की खास इबादतें
तरावीह: नफ्ल नमाज़ की अहमियत
तरावीह, रमज़ान की एक विशेष नफ्ल नमाज़ है जिसे आमतौर पर मस्जिद में जमाअत के साथ पढ़ा जाता है। हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु ने इसे जमाअत के साथ पढ़ने का आदेश दिया था। हदीस के अनुसार, पैग़म्बर ने घर में भी तरावीह पढ़ने का हुक्म दिया है।
ऐतिकाफ़: खुदा की रहमत में खो जाना
रमज़ान के आख़री दस दिनों में मुसलमान एतिकाफ़ करते हैं। इसका मक़सद दुनियावी कामों से अलग होकर पूरी तरह अल्लाह की इबादत में मशगूल रहना है।
शबे क़द्र: हज़ार महीनों से बेहतर रात
शबे क़द्र रमज़ान की सबसे पाक रात मानी जाती है। इस रात की फज़ीलत में एक पूरी सूरह, सूरह अल-क़द्र नाज़िल हुई। "यह रात हज़ार महीनों से भी ज़ियादा अफ़ज़ल है।" (कुरआन, सूरह अल-क़द्र)
ज़कात: इस्लामी आर्थिक व्यवस्था की रीढ़
रमज़ान में ज़कात देने की विशेष हिदायत दी गई है। कुरआन में 84 बार ज़कात का ज़िक्र आया है, जो इसकी अहमियत को दर्शाता है।
सदक़तुल फ़ित्र: गरीबों को ईद की खुशी देना
28 रमज़ान 2 हिजरी में सदक़तुल फ़ित्र के आदेश नाज़िल हुए। इसका मक़सद यह है कि ग़रीब और ज़रूरतमंद लोग भी ईद की खुशी में शामिल हो सकें।
ईदुल फ़ित्र: रमज़ान का तोहफ़ा
रमज़ान की इबादतों का इनाम ईदुल फ़ित्र के रूप में दिया जाता है। पहली ईदुल फ़ित्र 1 शव्वाल 2 हिजरी को पहली बार मनाई गई थी।
ईद के दिन मुसलमान ईदगाह में विशेष नमाज़ अदा करते हैं, गरीबों को फितरा देते हैं और एक-दूसरे को मुबारकबाद पेश करते हैं।
रमज़ान इस्लाम का सबसे पाक महीना है जो इंसान को तक़वा, संयम, इबादत और समाजसेवा की शिक्षा देता है। यह महीना सिर्फ इबादत का नहीं, बल्कि समाज में सुधार लाने और ग़रीबों की मदद करने का भी है।
रमज़ानुल मुबारक महीने में कुछ अहम वाक़िआत-
03 रमज़ान हिजरी 11 ख़ातूने जन्नत सैयदा बीबी फातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा का विसाल।
रमज़ान 3 क़ब्ल हिजरत सन ईस्वी 619 उम्मुल मुमिनीन हज़रत खदीजतुल क़ुबरा का विसाल।
10 रमज़ान क़ब्ल 3 हिजरत फरवरी 619 उम्मुल मुमिनीन हज़रत सौदा से रसूलुल्लाह का निकाह।
रमज़ान हिजरी 01मार्च 623 सुरया ए हम्ज़ा ।
रमज़ान हिजरी 50 उम्मुल मुमिनीन हज़रत सफिया का इंतिक़ाल।
17 रमज़ान हिजरी 50 यानी 16 जुलाई 672 उम्मुल मुमिनीन हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा का विसाल।
17 रमज़ान हिजरी 02 , 12 मार्च 624 जंगे बद्र का मारका।
लश्करे इस्लाम मदीना की तरफ रवाना।
15 रमज़ान 03 हिजरी यानी 01 दिसम्बर 624 पैदाइश हज़रत इमाम हसन इब्ने अली रज़ियल्लाहु अन्ह।
10 रमज़ान हिजरी 08 यानी 01 जनवरी 630 फतह मक्का के लिए मदीना से रवानगी।
रमज़ान सन हिजरी 08 जनवरी 630 अबू सूफियान का इस्लाम क़ुबूल।
23 रमज़ान हिजरी 08 मनात बुत को गिराने के लिए रसूल ने सहाबी साद बिन सुहैली को रवाना किया।
12 रमज़ान हिजरी 02 यानी 8 मार्च 624 गज़वा ए बद्र के लिए रसूलुल्लाह ने इस्लामी लश्कर के साथ पेश क़दमी की।
20 रमज़ान हिजरी 02 यानी 16 मार्च 624 लश्करे इस्लाम बद्र से मदीना की तरफ वापसी ।
24, 25 रमज़ान हिजरी 02 यानी 20,21 मार्च 624 गज़वा ए अल-कदर ।
28 रमज़ान हिजरी 02 यानी 24 मार्च 624 ईदुल फितर और सदक़ ए फित्र के अहकाम।
13 रमज़ान पैदाइश बहादुर शाह ज़फर।
16 रमज़ान बेगम हज़रत मुहानी की वफात।
19 रमज़ान को अल्लामा इक़बाल की वफात।
20 रमज़ान को फतह मक्का मुकर्रम।
21 रमज़ान 29 जनवरी 661 को शहादत अमीरुल मुमिनीन हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्ह।
25 रमज़ान पैदाइश शाह अब्दुल अज़ीज़ मुहद्दिस दहलवी।
26 रमज़ान को शबे क़द्र।
अल्लाह से दुआ है कि वह हमें इस रमज़ान को ज़ौक़ और शौक़ से गुज़ारने और इसका सवाब कमाने की तौफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन!
मिन जानिब -
कुँवर नियाज़ मुहम्मद
एडवोकेट एवं सीनियर जर्नलिस्ट, बीकानेर
मोबाइल -9828215960