मां की सेवा का अनूठा उदाहरण: बेटों ने कांवड़ में बैठाकर कराया चारधाम दर्शन
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-03-05 05:35:46

बदायूं जिले के नूरपुर गांव के दो भाइयों, तेजपाल और धीरज, ने अपनी मां राजेश्वरी देवी के प्रति अटूट प्रेम और सम्मान का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो आधुनिक समाज के लिए प्रेरणादायक है। इन दोनों ने अपनी वृद्ध मां को कांवड़ में बैठाकर एक साल से अधिक समय तक पैदल यात्रा करते हुए चारधाम और अन्य प्रमुख तीर्थ स्थलों के दर्शन कराए।
यात्रा की शुरुआत: 18 फरवरी 2024
18 फरवरी 2024 को, तेजपाल और धीरज ने अपनी मां को कांवड़ में बैठाकर चारधाम यात्रा की शुरुआत की। इस यात्रा का उद्देश्य न केवल धार्मिक था, बल्कि समाज को यह संदेश देना भी था कि माता-पिता बोझ नहीं होते, बल्कि उनकी सेवा करना संतान का परम कर्तव्य है।
चारधाम यात्रा: गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ
अपनी यात्रा के दौरान, दोनों भाइयों ने सबसे पहले गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे प्रमुख धामों के दर्शन कराए। इन स्थानों पर पहुंचकर उन्होंने मां के साथ धार्मिक अनुष्ठान किए और आशीर्वाद प्राप्त किया।
अन्य तीर्थ स्थलों का भ्रमण
चारधाम के अलावा, उन्होंने हरिद्वार के मनसा देवी, नीलकंठ, वीरभद्र, सुरकंडा माता मंदिर जैसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों का भी दौरा किया। इसके बाद, वे अयोध्या पहुंचे, जहां रामलला के दर्शन कराए। हरियाणा के चुलकाना धाम, राजस्थान के गोगामेड़ी और खाटू श्याम जी के दर्शन भी इस यात्रा का हिस्सा रहे।
समाज को संदेश: माता-पिता की सेवा का महत्व
तेजपाल और धीरज का कहना है कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य समाज को यह संदेश देना था कि बुजुर्ग माता-पिता बोझ नहीं होते। उनकी सेवा करना संतान का धर्म है, उन्हें वृद्धाश्रम में छोड़ना उचित नहीं। उन्होंने बताया कि उनके पिता भगवान दास के निधन के बाद, उनकी मां ने उन्हें बड़े प्यार से पाला-पोसा, और अब उनकी बारी थी मां की सेवा करने की।
यात्रा का समापन: गांव में स्वागत
एक साल और 12 दिनों की इस लंबी यात्रा के बाद, जब वे अपने गांव नूरपुर लौटे, तो ग्रामीणों ने उनका भव्य स्वागत किया। मुजरिया चौराहे पर सुमित साहू ने उन्हें चाय-नाश्ता कराया, जबकि उनके पिता रामौतार ने फल खिलाए। मां राजेश्वरी देवी ने कहा कि वे खुशकिस्मत हैं कि उन्हें श्रवण कुमार जैसे बेटे मिले।
प्रेरणादायक उदाहरण
तेजपाल और धीरज ने अपनी मां के प्रति जो समर्पण दिखाया है, वह आज के समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है। यह कहानी हमें सिखाती है कि माता-पिता की सेवा और सम्मान में ही सच्ची भक्ति है, और उनकी खुशियों में ही संतान की सच्ची सफलता निहित है।