सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: दृष्टिबाधित उम्मीदवारों के लिए न्यायिक सेवा के द्वार खुले
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-03-04 18:29:26

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक ऐतिहासिक निर्णय में स्पष्ट किया है कि शारीरिक अक्षमता के आधार पर किसी भी व्यक्ति को न्यायिक सेवा भर्ती से वंचित नहीं किया जा सकता। यह फैसला न्यायिक सेवाओं में समावेशिता और समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो देशभर में न्यायिक प्रणाली में सकारात्मक परिवर्तन लाएगा।
दृष्टिबाधित उम्मीदवारों के लिए न्यायिक सेवा के द्वार खुले
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा (भर्ती और सेवा शर्तें) नियम 1994 के नियम 6ए को निरस्त करते हुए कहा कि दृष्टिबाधित और कम दृष्टि वाले उम्मीदवार न्यायिक सेवा के पदों के लिए चयन में भाग लेने के हकदार होंगे। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने यह निर्णय सुनाया।
दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 का पालन अनिवार्य
पीठ ने कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों को न्यायिक सेवा की भर्ती में किसी भी तरह के भेदभाव का सामना नहीं करना चाहिए और राज्य को समावेशी ढांचा सुनिश्चित करने के लिए उन्हें सकारात्मक कार्रवाई प्रदान करनी चाहिए। दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुसार उनकी पात्रता का आकलन करते समय उन्हें उचित सुविधाएं प्रदान की जानी चाहिए।
न्यायिक सेवाओं में समावेशिता की दिशा में बड़ा कदम
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय न्यायिक सेवाओं में समावेशिता और समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह फैसला दृष्टिबाधित और अन्य दिव्यांग व्यक्तियों को न्यायिक सेवाओं में शामिल होने का अवसर प्रदान करेगा, जिससे न्याय प्रणाली में विविधता और समावेशिता बढ़ेगी।
सुप्रीम कोर्ट का यह ऐतिहासिक निर्णय न्यायिक सेवाओं में समावेशिता और समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह फैसला न केवल दृष्टिबाधित बल्कि सभी दिव्यांग व्यक्तियों के लिए न्यायिक सेवाओं में अवसरों के द्वार खोलता है, जिससे न्याय प्रणाली में विविधता और समावेशिता को बढ़ावा मिलेगा।