पुराने वाहनों को ईंधन ना देने का फैसला: जमीनी स्तर पर विरोध शुरू
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-03-04 08:17:46

पुराने वाहनों को ईंधन ना देने का फैसला: जमीनी स्तर पर विरोध शुरू
दिल्ली में प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने एक अहम कदम उठाया है, जो वाहन मालिकों के लिए चिंता का विषय बन गया है। लेकिन जमीनी स्तर पर इस फैसले का विरोध भी शुरू हो गया है।
क्या है सरकार का निर्णय?
दरअसल, दिल्ली सरकार ने घोषणा की है कि 31 मार्च 2025 के बाद 15 वर्ष से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों और 10 वर्ष से अधिक पुराने डीजल वाहनों को ईंधन नहीं दिया जाएगा। यह कदम वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
ट्रांसपोर्ट एसोसिएशनों का विरोध:
दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सम्राट ने इस फैसले का विरोध किया है। उनका कहना है कि वाहन स्क्रैप नीति शुरू से ही विवादित रही है। एक टैक्सी चालक नई डीजल टैक्सी खरीदने पर पांच से सात साल तक किस्त चुकाता है, लेकिन दस साल बाद वह गाड़ी कबाड़ में तब्दील कर दी जाती है।
वैकल्पिक कदमों की मांग:
संजय सम्राट का मानना है कि प्रदूषण रोकने के लिए अन्य कदम भी उठाए जा सकते हैं। पेट्रोल-डीजल न देने के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन की योजना बनाई जा रही है। उनका कहना है कि यह निर्णय केवल कंपनियों को मुनाफा देने का तरीका है और पिछली सरकार की तरह नई सरकार भी वाहन चालकों का शोषण कर रही है।
अन्य संगठनों की प्रतिक्रिया:
ऑल इंडिया लग्जरी बस यूनियन के महासचिव श्याम लाल गोला ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए यह कदम सही है, लेकिन जिन गाड़ियों की हालत ठीक है, उन्हें सड़क पर चलाने की अनुमति मिलनी चाहिए।
फिटनेस जांच की आवश्यकता:
ऑल दिल्ली ऑटो-टैक्सी ट्रांसपोर्ट कांग्रेस यूनियन के अध्यक्ष किशन वर्मा ने सुझाव दिया कि यदि सरकार प्रदूषण को लेकर गंभीर है, तो समय सीमा पूरी करने वाले वाहनों की एक बार फिटनेस जांच कराई जानी चाहिए। जो वाहन मानकों पर खरे उतरते हैं, उन्हें सड़क पर चलाने की अनुमति मिलनी चाहिए। पेट्रोल-डीजल न देने का फैसला उचित नहीं है।
वैकल्पिक व्यवस्था की मांग:
कैपिटल ड्राइवर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष चंदू चौरसिया ने कहा कि वाहनों को पेट्रोल-डीजल न देने का फैसला ठीक नहीं है। कुछ वाहन ऐसे भी होते हैं जो ज्यादा चलते नहीं हैं, लेकिन अपनी समय-सीमा पूरी कर चुके होते हैं। जरूरी नहीं कि वे वाहन प्रदूषण फैलाते हों। इस आदेश से हजारों वाहन स्क्रैप की सूची में आ जाएंगे। इसलिए, कुछ वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए।
दिल्ली सरकार का यह कदम प्रदूषण नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इससे जुड़े संगठनों और वाहन मालिकों की चिंताओं को भी ध्यान में रखना आवश्यक है। सरकार को चाहिए कि वह सभी पक्षों के साथ मिलकर एक संतुलित समाधान निकाले, जिससे प्रदूषण भी कम हो और वाहन मालिकों के हितों की भी रक्षा हो सके।