ईओडब्ल्यू की छापेमारी में उजागर हुई नगर निगम अधिकारी की बेनामी संपत्ति
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-03-04 07:36:28

इंदौर नगर निगम के निलंबित सहायक राजस्व अधिकारी राजेश परमार के ठिकानों पर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने हाल ही में छापेमारी की है, जिसमें करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति का खुलासा हुआ है। यह कार्रवाई नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार की गंभीरता को उजागर करती है।
बेलदार से अफसर तक का सफर
राजेश परमार ने अपने करियर की शुरुआत नगर निगम में बेलदार (मजदूर) के पद से की थी। लगातार प्रमोशन के बाद वे सहायक राजस्व अधिकारी के पद तक पहुंचे। हालांकि, उनकी इस तरक्की के साथ-साथ उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप भी लगे, जिसके चलते उन्हें हाल ही में निलंबित किया गया था।
ईओडब्ल्यू की छापेमारी और संपत्ति का खुलासा
ईओडब्ल्यू ने शुक्रवार, 28 फरवरी को परमार के बिजलपुर स्थित आवास और अन्य ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान एक बंगला, चार फ्लैट और दो प्लॉट के दस्तावेज बरामद हुए। इन संपत्तियों की कुल कीमत करोड़ों रुपये आंकी गई है।
संपत्तियों का विवरण
♦बिजलपुर में दो मंजिला मकान: 2600 वर्ग फीट में फैला यह मकान परमार का प्रमुख निवास स्थान है।
♦संचार नगर में फ्लैट: आधुनिक सुविधाओं से युक्त इस फ्लैट की कीमत लाखों में है।
♦संपत ग्रीन में प्लॉट: 1600 वर्ग फीट का यह प्लॉट प्राइम लोकेशन में स्थित है।
♦श्रीजी वैली में फ्लैट: यह फ्लैट भी परमार की संपत्तियों में शामिल है।
♦पिपलियाहाना में प्लॉट: उदयनगर कॉलोनी में स्थित इस प्लॉट की कीमत बाजार मूल्य के अनुसार काफी अधिक है।
♦खुशबू विला और सैटेलाइट वैली में फ्लैट: इन दोनों स्थानों पर भी परमार के फ्लैट्स हैं।
आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार के आरोप
परमार पर आरोप है कि उन्होंने अपनी आय से कई गुना अधिक संपत्ति अर्जित की है। उनकी कुल वेतन आय लगभग 40 लाख रुपये आंकी गई है, जबकि उनकी संपत्ति 10 करोड़ रुपये से अधिक पाई गई है। इसके अलावा, उन पर संपत्ति कर की बकाया राशि को कम दिखाकर नगर निगम को नुकसान पहुंचाने और टैक्सपेयर्स से आंशिक भुगतान लेकर बकाया खाता शून्य करने के बदले मोटी रकम वसूलने के आरोप भी हैं।
विदेश यात्राएं और फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर का काम
जांच में यह भी सामने आया है कि परमार ने सरकारी नौकरी में रहते हुए पांच बार विदेश यात्राएं की हैं। इसके अलावा, वे पहले फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर के तौर पर भी काम कर चुके हैं, जो उनकी आय के स्रोतों पर सवाल खड़े करता है।
भ्रष्टाचार की शिकायतें और निलंबन
वार्ड-39 की कांग्रेस पार्षद रुबीना खान ने 20 अक्टूबर 2024 को नगर निगम आयुक्त से परमार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन पर दरोगा पद पर होते हुए प्रभारी सहायक राजस्व अधिकारी का पद संभालने, बेटरमेंट शुल्क की कम वसूली कर भ्रष्टाचार करने और बिना अनुमति विदेश यात्राएं करने के आरोप लगाए गए थे। इन शिकायतों के बाद ही परमार को निलंबित किया गया था।
नगर निगम में भ्रष्टाचार के अन्य मामले
यह पहली बार नहीं है जब नगर निगम का कोई अधिकारी ईओडब्ल्यू के रडार पर आया हो। इससे पहले भी नगर निगम के अधिकारी राजकुमार और इंजीनियर अभय राठौर के खिलाफ छापेमारी में करोड़ों रुपये की काली कमाई का खुलासा हुआ था। यह घटनाएं नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार की गंभीरता को दर्शाती हैं।
राजेश परमार के खिलाफ ईओडब्ल्यू की इस कार्रवाई ने नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर किया है। यह आवश्यक है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई हो ताकि सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और ईमानदारी सुनिश्चित की जा सके।