कॉर्निया रोगों पर ऐतिहासिक कार्यशाला: चिकित्सा जगत के दिग्गजों का बौद्धिक समागम
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-03-04 06:50:29

नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में नित नए आयाम जोड़ते हुए, सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज, बीकानेर के नेत्र रोग विभाग और राजस्थान नेत्र ऑफ्थलमोलोजिकल सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में राजस्थान के सभी मेडिकल कॉलेजों में अध्ययनरत पीजी छात्रों के लिए एक दिवसीय विशेषज्ञ प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई।
इस अभूतपूर्व आयोजन का उद्देश्य कॉर्निया संबंधी नवीनतम शोध, उपचार तकनीकों और शल्य चिकित्सा पद्धतियों को साझा करना था, जिससे युवा नेत्र चिकित्सक वैश्विक स्तर की चिकित्सा तकनीकों से रूबरू हो सकें।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ भव्य शुभारंभ
कार्यशाला का शुभारंभ अत्यंत गरिमामयी वातावरण में किया गया, जहां सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य एवं नियंत्रक डॉ. गुंजन सोनी, राजस्थान ऑफ्थलमोलोजिकल सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. विरेन्द्र अग्रवाल, सचिव हर्षुल टाक और प्रसिद्ध नेत्र विशेषज्ञ डॉ. अंकुर सिन्हा ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की।
अपने उद्घाटन भाषण में डॉ. गुंजन सोनी ने कहा, "बीकानेर संभाग में नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में हो रही प्रगति अत्यंत सराहनीय है। यहां प्रतिदिन 70 से 80 ऑपरेशन किए जाते हैं, जो राजस्थान के समस्त मेडिकल कॉलेजों में सर्वाधिक हैं। अब सरकार द्वारा कॉर्निया ट्रांसप्लांट के लिए नई सर्जरी सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं, जिससे यह संभाग चिकित्सा के क्षेत्र में एक नए युग की ओर अग्रसर होगा।"
कॉर्निया विशेषज्ञों का बौद्धिक संगम: छह विशेष सत्र आयोजित
इस कार्यशाला में कॉर्निया से संबंधित विभिन्न बीमारियों के निदान और उपचार पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम को छह विशेष सत्रों में विभाजित किया गया, जिसमें देशभर के प्रतिष्ठित नेत्र विशेषज्ञों ने गहन विश्लेषण प्रस्तुत किए।
* डॉ. प्रफुल्ल महाराणा (एम्स, नई दिल्ली): कॉर्निया ट्रांसप्लांट की आधुनिक तकनीकें
प्रसिद्ध नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रफुल्ल महाराणा ने कॉर्निया ट्रांसप्लांट के नवीनतम तकनीकों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि सही समय पर उपचार न होने पर कॉर्निया क्षति से स्थायी दृष्टिहीनता हो सकती है।
* डॉ. आशीष नागपाल (अहमदाबाद): कॉर्निया घावों की पहचान और शीघ्र उपचार
डॉ. नागपाल ने कॉर्निया के अंदरूनी घावों की पहचान और त्वरित उपचार के नए तरीकों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि अत्याधुनिक माइक्रोस्कोपिक सर्जरी कैसे मरीजों की दृष्टि बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
* डॉ. परिणिती सहाय (एम्स, नई दिल्ली): बुजुर्गों में कॉर्निया क्षति और रोकथाम
उन्होंने उम्रदराज मरीजों में कॉर्निया की परतों में होने वाले बदलाव और उनके प्रभावी उपचार की नई पद्धतियों पर चर्चा की।
* डॉ. धर्मवीर चौधरी (एसएमएस मेडिकल कॉलेज, जयपुर): बच्चों में कॉर्निया रोग और उपचार
उन्होंने कहा कि यदि बच्चों में कॉर्निया संक्रमण का सही समय पर इलाज किया जाए, तो दृष्टिहीनता को पूरी तरह से रोका जा सकता है।
* डॉ. नेहा पाठक (अग्रवाल आई हॉस्पिटल, जयपुर): राजस्थान में बढ़ती केरेटोकोनस बीमारी
केरेटोकोनस बीमारी के बारे में बताते हुए डॉ. पाठक ने कहा कि राजस्थान में धूल, प्रदूषण और एलर्जी के कारण यह बीमारी अधिक पाई जाती है। नई तकनीक कॉलेजन क्रॉस लिकिंग द्वारा इसे स्थायी रूप से बढ़ने से रोका जा सकता है।
* डॉ. अंकुर मिड्डा (जयपुर): कॉर्निया के निदान में नई तकनीक और उपकरण
उन्होंने कॉर्निया के परतों में होने वाले बदलावों की पहचान के लिए एडवांस डायग्नोस्टिक उपकरणों की जानकारी दी।
राजस्थान ऑफ्थलमोलोजिकल सोसायटी का सराहनीय योगदान
राजस्थान ऑफ्थलमोलोजिकल सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. विरेन्द्र अग्रवाल ने इस मौके पर कहा,
"नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। युवा डॉक्टरों को इन कार्यशालाओं से वैश्विक चिकित्सा मानकों के अनुरूप नई तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान मिलता है।"
सोसायटी के सचिव डॉ. हर्षुल टाक ने कहा कि इस तरह के आयोजन समय-समय पर होते रहेंगे ताकि युवा डॉक्टरों को उन्नत चिकित्सा पद्धतियों की जानकारी मिल सके।
डॉ. जी.सी. जैन की पुस्तक का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ नेत्र चिकित्सक डॉ. जी.सी. जैन द्वारा लिखित एक विशेष पुस्तक का विमोचन भी किया गया। यह पुस्तक नेत्र चिकित्सा के पीजी विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होगी।
इस अवसर पर डॉ. संध्या जैन और डॉ. गौरव जैन ने सभी प्रतिभागियों को इस पुस्तक की निःशुल्क प्रतियां वितरित कीं।
समापन समारोह: नए लक्ष्य और संकल्प
कार्यशाला के समापन समारोह में नेत्र विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. जयश्री मुरलीमनोहर ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा, "राजस्थान में नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में यह एक ऐतिहासिक कदम है। हम भविष्य में और अधिक विशेषज्ञ कार्यशालाओं का आयोजन करेंगे, जिससे चिकित्सा क्षेत्र में शोध और नवाचार को बढ़ावा मिले।"
प्रमुख हस्तियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस आयोजन में राजस्थान के जाने-माने नेत्र विशेषज्ञ डॉ. अंजू कोचर, डॉ. कल्पना जैन, डॉ. धनसिंह मीणा, डॉ. रश्मि जोशी, डॉ. अनिल चौहान, डॉ. शिल्पी कोचर, डॉ. पूनम भार्गव, डॉ. शाहिन फारूख, डॉ. एस.पी. व्यास, डॉ. अनिता चाहर, डॉ. सौरभ भार्गव, डॉ. संजीव सहगल, डॉ. ललिता कच्छावा आदि शामिल हुए।
यह कार्यशाला न केवल राजस्थान बल्कि पूरे भारत के नेत्र चिकित्सा क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित हुई। यह पहल राजस्थान को नेत्र विज्ञान के शोध और उपचार के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में शामिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।