हिमस्खलन की चुनौती: बीआरओ कर्मियों की खोज में सेना की अत्याधुनिक तकनीक का सहारा


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-03-04 06:39:41



 

उत्तराखंड के चमोली जिले के माना क्षेत्र में 28 फरवरी को हुए भीषण हिमस्खलन ने एक बार फिर हिमालय की अनिश्चितता और वहां कार्यरत कर्मियों की चुनौतियों को उजागर किया है। इस प्राकृतिक आपदा में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के पांच कर्मी कंटेनरों में फंस गए, जिनकी खोज और बचाव के लिए अब अत्याधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जा रहा है।

घटना का विवरण: 

28 फरवरी की रात, माना क्षेत्र में अचानक आए हिमस्खलन ने बीआरओ के कर्मियों को आश्चर्यचकित कर दिया। वे कंटेनरों में सो रहे थे, जब बर्फ का विशाल ढेर उन पर आ गिरा। इस अप्रत्याशित घटना में पांच कर्मी लापता हो गए, जिनकी खोज अब तक जारी है।

बचाव कार्य की प्रगति: 

अब तक, बचाव दल ने 50 लोगों को सुरक्षित निकाला है, लेकिन दुर्भाग्यवश, उनमें से कुछ ने अपनी जान गंवा दी है। लेफ्टिनेंट कर्नल मनीष श्रीवास्तव, रक्षा डीआरओ, ने बताया, "बचाव अभियान जारी है, और अब तक 50 लोगों को बचाया गया है। हालांकि, उनमें से कुछ ने चोटों के कारण दम तोड़ दिया है। ऑपरेशन का प्राथमिक उद्देश्य अभी भी फंसे हुए घायलों को निकालना है। पांच अन्य की खोज जारी है।"

आधुनिक तकनीक का उपयोग: 

बचाव कार्य को और प्रभावी बनाने के लिए भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने अपने ड्रोन-आधारित इंटेलिजेंट ब्यूरीड ऑब्जेक्ट डिटेक्शन सिस्टम को तैनात करने का निर्णय लिया है। आईएएफ के एक अधिकारी ने बताया, "आईएएफ का ड्रोन-आधारित इंटेलिजेंट ब्यूरीड ऑब्जेक्ट डिटेक्शन सिस्टम चमोली के माना क्षेत्र में फंसे बीआरओ कर्मियों की खोज और बचाव अभियान के लिए भेजा जाएगा। यह सिस्टम हवाई मार्ग से देहरादून लाया जाएगा, जहां से इसे हेलीकॉप्टरों द्वारा माना क्षेत्र में पहुंचाया जाएगा।"

इसके अलावा, सेना से जीपीएस-सक्षम ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार और स्निफर डॉग्स की भी मांग की गई है, ताकि बचाव कार्य में तेजी लाई जा सके।

आईटीबीपी की भूमिका: 

इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) के जवान भी इस बचाव अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। आईटीबीपी द्वारा जारी एक वीडियो में देखा जा सकता है कि उनके कर्मी हिमस्खलन प्रभावित क्षेत्र में निरंतर बचाव कार्य में जुटे हैं। यदि मौसम और सड़क की स्थिति अनुमति देती है, तो यूएवी और ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार को सेवा में लाया जाएगा।

किसने क्या कहा?

* रक्षा जनसंपर्क अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल मनीष श्रीवास्तव ने कहा, "चार लोग अभी भी लापता हैं। भारतीय सेना उनके लिए बचाव अभियान पर है। तलाशी अभियान में अब ड्रोन आधारित इंटेलिजेंट ब्यूरिड ऑब्जेक्ट डिटेक्शन सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा... तिरंगा माउंटेन रेस्क्यू टीम के 2 कर्मी और हिमस्खलन बचाव कुत्ता रॉबिन भी तैनात हैं... हमारे पास सेना, वायु सेना और नागरिक हेलीकॉप्टर हैं जो बचाव अभियान में लगे हैं।"

* एनडीआरएफ के कमांडेंट सुदेश कुमार कहते हैं, "एनडीआरएफ के जवान वायुसेना के साथ सर्च ऑपरेशन को आगे बढ़ा रहे हैं। हमने डॉग स्क्वॉड और बर्फ में दबी चीज़ों का पता लगाने वाले कुछ उपकरण भी भेजे हैं। चार लोग अभी भी लापता हैं। आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, वायुसेना, सेना सभी इस बचाव अभियान में सहयोग कर रहे हैं।"

चुनौतियाँ और उम्मीद: 

माना क्षेत्र की ऊंचाई, ठंडा मौसम और कठिन भूभाग बचाव कार्य में बड़ी चुनौतियाँ पेश कर रहे हैं। इसके बावजूद, बचाव दल अत्याधुनिक तकनीक और अपने अदम्य साहस के साथ फंसे हुए कर्मियों तक पहुंचने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं।

इस हिमस्खलन ने न केवल प्राकृतिक आपदाओं की अप्रत्याशितता को उजागर किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि कैसे आधुनिक तकनीक और समर्पित बचाव दल मिलकर कठिन परिस्थितियों में भी उम्मीद की किरण बन सकते हैं। पूरा देश प्रार्थना कर रहा है कि फंसे हुए बीआरओ कर्मियों को जल्द से जल्द सुरक्षित निकाला जा सके।


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