सड़क हादसों का बढ़ता ग्राफ: ओवरलोडेड ट्रकों के खिलाफ जनहित याचिका पर हाई कोर्ट का नोटिस


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-03-04 06:22:00



 

क्या नीम का थाना और कोटपुतली-बेहरोड के निवासी ओवरलोडेड ट्रकों के कहर से मुक्त हो पाएंगे? राजस्थान हाई कोर्ट के हालिया आदेश ने इस मुद्दे पर नई उम्मीदें जगाई हैं।

ओवरलोडेड ट्रकों का कहर: सड़कें बनीं मौत का कुंआ

नीम का थाना और कोटपुतली-बेहरोड जिलों में ओवरलोडेड ट्रकों और डंपरों की बेकाबू आवाजाही ने सड़क सुरक्षा को गंभीर खतरे में डाल दिया है। अत्यधिक भार से लदे ये वाहन न केवल सड़कों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि लगातार हो रहे सड़क हादसों का प्रमुख कारण भी बन रहे हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, इन दुर्घटनाओं में कई लोगों की जान जा चुकी है और अनेक घायल हुए हैं।

जनहित याचिका: खन्नन ग्रस्त संघर्ष समिति की पहल

स्थानीय संगठन 'खन्नन ग्रस्त संघर्ष समिति' ने इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए राजस्थान हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि ओवरलोडेड वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही से सड़क हादसों में वृद्धि हुई है और सड़कों की हालत बदतर हो गई है। समिति का कहना है कि उन्होंने इस मुद्दे पर कई बार प्रशासन से शिकायत की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

हाई कोर्ट की सख्ती: केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी

राजस्थान हाई कोर्ट की जयपुर बेंच ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय तथा राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। न्यायमूर्ति इंदरजीत सिंह और न्यायमूर्ति मनीष शर्मा की खंडपीठ ने चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह कदम स्थानीय निवासियों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, जो लंबे समय से इस समस्या से जूझ रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट का संदर्भ: ओवरलोडेड वाहनों पर सख्त रुख

याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 'परमजीत भसीन बनाम भारत संघ' मामले का हवाला दिया गया है, जिसमें शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया था कि ओवरलोडेड वाहनों का चालान भरने से उन्हें फिर से चलाने की अनुमति नहीं मिलती। वाहन मालिक या चालक को पहले अतिरिक्त भार उतारना होगा और फिर ही वाहन सड़क पर चल सकता है। यह निर्णय ओवरलोडेड वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

प्रशासन की जिम्मेदारी: सख्त निगरानी की आवश्यकता

ओवरलोडेड वाहनों की समस्या से निपटने के लिए प्रशासन की सख्त निगरानी और कार्रवाई आवश्यक है। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित जांच, वजन मापने वाले उपकरणों की स्थापना और सख्त दंड नीति से ही इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है।

स्थानीय समुदाय की उम्मीदें: सुरक्षित सड़कों की मांग

स्थानीय समुदाय को उम्मीद है कि हाई कोर्ट के हस्तक्षेप से ओवरलोडेड वाहनों की समस्या का समाधान होगा और सड़कें फिर से सुरक्षित बनेंगी। वे प्रशासन से अपेक्षा करते हैं कि वह सख्त कदम उठाकर इस मुद्दे को गंभीरता से ले और निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।

ओवरलोडेड ट्रकों की अनियंत्रित आवाजाही ने नीम का थाना और कोटपुतली-बेहरोड जिलों में सड़क सुरक्षा को गंभीर खतरे में डाल दिया है। राजस्थान हाई कोर्ट का हस्तक्षेप और राज्य सरकार की सड़क चौड़ीकरण योजना इस दिशा में सकारात्मक कदम हैं। हालांकि, स्थायी समाधान के लिए प्रशासन की सख्त निगरानी और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।


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