धारा 320 की व्याख्या: उच्च न्यायालय ने प्रशासक नियुक्ति को दी कानूनी मान्यता


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-03-03 18:26:29



 

राजस्थान उच्च न्यायालय की जोधपुर पीठ ने हाल ही में एक याचिका को खारिज करते हुए राज्य सरकार द्वारा 49 नगरपालिकाओं के लिए प्रशासक या प्राधिकरण की नियुक्ति के संबंध में जारी अधिसूचना को वैध ठहराया है। यह निर्णय नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों के कार्यकाल की समाप्ति के बाद उनकी दैनिक कार्यों की निरंतरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।

प्रशासनिक निरंतरता की कानूनी पुष्टि

राजस्थान उच्च न्यायालय की यह ऐतिहासिक निर्णय राज्य सरकार की प्रशासनिक निरंतरता सुनिश्चित करने की क्षमता को सुदृढ़ करता है। नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों के कार्यकाल की समाप्ति के बाद, प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के लिए प्रशासकों की नियुक्ति की आवश्यकता पर यह निर्णय महत्वपूर्ण प्रकाश डालता है।

याचिका का सार: अधिसूचना की वैधता पर प्रश्नचिह्न

याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार की 25 नवंबर 2024 की अधिसूचना को चुनौती दी थी, जिसमें 49 नगरपालिकाओं के लिए प्रशासक या प्राधिकरण की नियुक्ति की गई थी। उनका तर्क था कि राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 में इस प्रकार की नियुक्ति के लिए कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, और यह अधिसूचना विधि के विरुद्ध है।

राज्य का पक्ष: धारा 320 के तहत अधिकारिता

राज्य सरकार ने तर्क दिया कि अधिनियम की धारा 320 उन्हें इस प्रकार की नियुक्ति करने का अधिकार प्रदान करती है। यह धारा राज्य को नए नगरपालिका की स्थापना तक, अधिकारी, समिति या प्राधिकरण नियुक्त करने की अनुमति देती है, ताकि नगरपालिका के कार्यों में कोई व्यवधान न हो।

न्यायालय का अवलोकन: धारा 320 की व्याख्या

न्यायमूर्ति विनीत कुमार माथुर ने अपने निर्णय में कहा कि धारा 320 स्पष्ट रूप से राज्य सरकार को यह अधिकार देती है कि वह नगरपालिका की स्थापना से पहले, अधिकारी, समिति या प्राधिकरण नियुक्त कर सके। यह नियुक्ति अधिकतम छह महीने की अवधि के लिए हो सकती है, जिसके भीतर नई नगरपालिका का गठन आवश्यक है।

धारा 322 का संदर्भ: असंगत तर्क का खंडन

याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि धारा 322 के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया, जो नगरपालिका के विघटन के मामलों में लागू होते हैं। न्यायालय ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए कहा कि धारा 322 केवल उन स्थितियों में लागू होती है जहां नगरपालिका को अयोग्यता या 2/3 से कम निर्वाचित सदस्यों के कारण विघटित किया जाता है। इस मामले में, निर्वाचित सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासकों की नियुक्ति की गई थी, जो धारा 320 के तहत वैध है।

प्रशासनिक निरंतरता की आवश्यकता पर बल

इस निर्णय के माध्यम से न्यायालय ने प्रशासनिक निरंतरता की आवश्यकता को रेखांकित किया है। निर्वाचित निकायों के कार्यकाल की समाप्ति के बाद, नए चुनाव और नगरपालिका की स्थापना तक, प्रशासनिक कार्यों में व्यवधान न हो, इसके लिए प्रशासकों की नियुक्ति को न्यायालय ने विधिसम्मत ठहराया है।


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