नक्सलियों के गढ़ में बदलाव की बयार: पामेड़ में बस सेवा का शुभारंभ
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-03-03 15:44:31

कभी नक्सलियों के आतंक का पर्याय रहा पामेड़ गाँव, आज विकास की नई इबारत लिख रहा है। लगभग तीन दशकों तक बाहरी दुनिया से कटा यह क्षेत्र, अब बस सेवा के माध्यम से मुख्यधारा से जुड़ गया है, जो नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास की नई उम्मीद जगाता है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्र में परिवहन की बहाली:
बीजापुर जिले का पामेड़ गाँव, जो छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमा पर स्थित है, लंबे समय से नक्सली गतिविधियों का केंद्र रहा है। इस कारण यहाँ विकास कार्य ठप पड़े थे, और परिवहन सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं थीं। लेकिन हाल ही में, सरकार और सुरक्षा बलों के संयुक्त प्रयासों से इस क्षेत्र में बस सेवा की शुरुआत हुई है, जो स्थानीय निवासियों के लिए एक बड़ी राहत है।
ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन:
बस सेवा की शुरुआत से पामेड़ और आसपास के सात पंचायतों के ग्रामीणों को अब बीजापुर मुख्यालय तक सीधी पहुँच मिल गई है। पहले, उन्हें तेलंगाना के रास्ते लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, लेकिन अब वे सीधे अपने जिले से जुड़ सकते हैं। यह परिवर्तन न केवल समय की बचत करता है, बल्कि आर्थिक रूप से भी फायदेमंद है।
सुरक्षा बलों की महत्वपूर्ण भूमिका:
पामेड़ में बस सेवा की बहाली में सुरक्षा बलों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने नक्सलियों के खिलाफ सघन अभियान चलाकर क्षेत्र में शांति स्थापित की, जिससे विकास कार्य संभव हो सके। हाल ही में, बीजापुर में सुरक्षा बलों ने एक बड़े ऑपरेशन में 31 नक्सलियों को मार गिराया, जो क्षेत्र में सुरक्षा की बहाली का प्रमाण है।
किसने क्या कहा?
बस चालक महेंद्र कहते हैं, "बस सुबह 8.30 बजे बीजापुर से चलती है। जब तक हम पामेड़ पहुंचते हैं, तब तक दोपहर 1.30 बज जाते हैं...लोग बहुत खुश हैं। बस सुविधा से आवागमन बहुत आसान हो गया है...जब भी बस चलती है, हमेशा सुरक्षा घेरा रहता है। हर दिन 70-80 यात्री सफर करते हैं..."
एक यात्री शिव कहते हैं, "यह (बस सेवा) अच्छा लगता है। पहले हमारे पास बस सुविधा नहीं थी। हम पैदल यात्रा करते थे। अब मुझे अपने गंतव्य तक पहुंचने में सिर्फ 1.5-2 घंटे लगेंगे।"
यात्री लोकेश साहू कहते हैं, "इस बस सेवा को लेकर ग्रामीणों में काफी उत्साह है। यह उनके लिए वाकई अच्छी सुविधा है। सुदूरवर्ती क्षेत्र और माओवादियों के कारण यह क्षेत्र सुविधाओं से वंचित था। आवागमन बहुत कठिन था। अब शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा बेहतर होगी। परिवहन भी बेहतर होगा। आने वाले समय में बसों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।"
विकास की ओर बढ़ते कदम:
बस सेवा की शुरुआत के साथ ही, पामेड़ में अन्य बुनियादी सुविधाओं का भी विस्तार हो रहा है। सड़क निर्माण, बिजली आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवाएँ और शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के प्रयास जारी हैं। यह सब स्थानीय प्रशासन और सरकार के समन्वित प्रयासों का परिणाम है, जो इस क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की चुनौतियाँ:
हालांकि पामेड़ में बस सेवा की शुरुआत एक सकारात्मक कदम है, लेकिन नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों के सामने कई चुनौतियाँ हैं। सुरक्षा सुनिश्चित करना, स्थानीय समुदाय का विश्वास जीतना और निरंतर विकास कार्यों को जारी रखना आवश्यक है। इसके लिए सरकार, सुरक्षा बलों और स्थानीय समुदाय के बीच मजबूत समन्वय की आवश्यकता है।
स्थानीय नेतृत्व की भूमिका:
पामेड़ में विकास कार्यों में स्थानीय नेताओं और पंचायतों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने सरकार और सुरक्षा बलों के साथ मिलकर विकास योजनाओं को लागू करने में सक्रिय योगदान दिया है, जिससे क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन संभव हो सका है।
भविष्य की संभावनाएँ:
पामेड़ में बस सेवा की शुरुआत से क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ने की संभावना है। व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा, जिससे स्थानीय निवासियों का जीवन स्तर ऊँचा उठेगा। यह कदम अन्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणास्त्रोत बन सकता है, जहाँ विकास और शांति की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
पामेड़ में 30 वर्षों बाद बस सेवा की बहाली न केवल एक परिवहन सुविधा की शुरुआत है, बल्कि यह नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास और शांति की नई उम्मीद का प्रतीक है। यह दिखाता है कि सरकार, सुरक्षा बल और स्थानीय समुदाय के संयुक्त प्रयासों से परिवर्तन संभव है, और सबसे दुर्गम क्षेत्रों में भी विकास की रोशनी पहुँचाई जा सकती है।