रमज़ान 2025: कर्नाटक में 2 मार्च से शुरू होंगे रोज़े, चांद नहीं दिखने के कारण निर्णय


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-03-03 06:56:13



 

कर्नाटक राज्य में मुस्लिम समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की गई है। शुक्रवार शाम को रमज़ान का चांद न दिखाई देने के कारण, अब 2 मार्च से रोज़े की शुरुआत होगी।

चांद देखने की प्रक्रिया और निर्णय

कर्नाटक राज्य वक्फ बोर्ड के केंद्रीय कार्यालय (दरुल औक़ाफ़) में आयोजित एक बैठक में, अमीर-ए-शरीअत मौलाना सगीर अहमद खान रशादी की अध्यक्षता में, चांद देखने के प्रयासों पर चर्चा की गई। राज्य के सभी जिलों और अन्य राज्यों जैसे आंध्र प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, उत्तराखंड, और दिल्ली से प्राप्त जानकारी के आधार पर, यह निष्कर्ष निकाला गया कि कहीं भी चांद दिखाई नहीं दिया।

तरावीह नमाज़ और रोज़ों की शुरुआत

मौलाना मकसूद इमरान ने घोषणा की कि विशेष तरावीह नमाज़ शनिवार रात से शुरू होगी, और पहला रोज़ा रविवार, 2 मार्च को रखा जाएगा। यह निर्णय राज्य भर के मुस्लिम समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि रमज़ान का महीना आत्मशुद्धि और इबादत का समय होता है।

बैठक में शामिल प्रमुख व्यक्तित्व

इस महत्वपूर्ण बैठक में कई धार्मिक विद्वानों और गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया, जिनमें मुफ्ती इफ्तिखार अहमद कासमी, मौलाना एजाज़ अहमद नदवी, मौलाना अब्दुल कादिर वाजिद, मौलाना सैयद मंज़ूर रज़ा आबिदी, और मौलाना क़ारी जुल्फ़िकार रज़ा नूरी शामिल थे। इन सभी ने चांद देखने की प्रक्रिया और निर्णय में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

सऊदी अरब में रमज़ान की शुरुआत

दुनिया भर में रमज़ान का महीना चांद देखने पर निर्भर करता है। सऊदी अरब में, शुक्रवार शाम को चांद दिखाई देने के कारण, वहां पहला रोज़ा शनिवार, 1 मार्च को रखा जाएगा। यह जानकारी TV9 हिंदी द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में दी गई है। 

भारत में रमज़ान की तिथियाँ

भारत में, चांद एक दिन बाद दिखाई देने की संभावना के कारण, रमज़ान की शुरुआत सऊदी अरब से एक दिन बाद होती है। इस वर्ष, चांद न दिखाई देने के कारण, भारत में पहला रोज़ा 2 मार्च को रखा जाएगा। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ में भी चांद न दिखाई देने के कारण, वहां भी 2 मार्च से रोज़े शुरू होंगे। 

रमज़ान का महत्व और पालन

रमज़ान इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना है, जिसे पवित्रता, संयम और इबादत का समय माना जाता है। इस महीने में, मुस्लिम समुदाय के लोग सुबह सेहरी से लेकर शाम इफ्तार तक रोज़ा रखते हैं, जिसमें वे खाने-पीने से परहेज करते हैं और अल्लाह की इबादत में समय बिताते हैं। रमज़ान के अंत में ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जाता है, जो एकता और खुशी का प्रतीक है।

कर्नाटक में रमज़ान का चांद न दिखाई देने के कारण, राज्य में पहला रोज़ा 2 मार्च को रखा जाएगा। मुस्लिम समुदाय के लिए यह समय आत्मशुद्धि, इबादत और समाज में एकता का प्रतीक है। सभी रोज़ेदारों को रमज़ान की मुबारकबाद और शुभकामनाएँ।


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