अबू हुरैरा मस्जिद: अवैध निर्माण पर प्रशासनिक कार्रवाई, स्वेच्छा से तोड़ने की प्रक्रिया शुरू
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-03-03 06:37:46

गोरखपुर के घोष कंपनी मेवातीपुर क्षेत्र में स्थित अबू हुरैरा मस्जिद हाल ही में प्रशासनिक कार्रवाई के केंद्र में रही है। नगर निगम की भूमि पर निर्मित इस मस्जिद को गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने अवैध घोषित किया है, जिसके बाद मुतवल्ली ने स्वयं इसे ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू की है। यह घटना शहर में चर्चा का विषय बन गई है।
मस्जिद निर्माण और विवाद की पृष्ठभूमि:
पिछले वर्ष, नगर निगम की भूमि पर अबू हुरैरा मस्जिद का निर्माण किया गया था। मुतवल्ली शोएब अहमद के पिता, स्वर्गीय सुहेल अहमद, ने इस मस्जिद का निर्माण कराया था। हालांकि, जीडीए ने इस निर्माण को अवैध करार दिया, क्योंकि यह बिना मानचित्र स्वीकृति के किया गया था।
जीडीए की कार्रवाई और नोटिस जारी:
15 फरवरी 2025 को, जीडीए ने मुतवल्ली शोएब अहमद को नोटिस जारी किया, जिसमें 15 दिनों के भीतर अवैध निर्माण को स्वयं ध्वस्त करने का निर्देश दिया गया था। नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया था कि यदि इस अवधि में निर्माण नहीं हटाया गया, तो जीडीए स्वयं ध्वस्तीकरण करेगा, और इसका खर्च निर्माणकर्ता से वसूला जाएगा।
मंडलायुक्त न्यायालय में अपील:
नोटिस के खिलाफ, मुतवल्ली शोएब अहमद ने 18 फरवरी को मंडलायुक्त न्यायालय में अपील दायर की। प्रारंभिक सुनवाई 19 फरवरी को निर्धारित थी, लेकिन प्रशासनिक कारणों से यह नहीं हो सकी। इसके बाद, अगली सुनवाई की तिथि 25 फरवरी तय की गई, जो अधिवक्ताओं की हड़ताल के कारण स्थगित हो गई। अब सुनवाई की अगली तिथि 3 मार्च 2025 निर्धारित की गई है।
स्वैच्छिक ध्वस्तीकरण की पहल:
प्रशासनिक दबाव और संभावित कार्रवाई को देखते हुए, मस्जिद कमेटी ने स्वयं ही अवैध निर्माण को ध्वस्त करने का निर्णय लिया। 1 मार्च 2025 को, कमेटी ने मस्जिद के दो मंजिलों को स्वेच्छा से तोड़ने की प्रक्रिया शुरू की। कमेटी के सदस्यों का कहना है कि वे कानून का पालन करना चाहते हैं और भविष्य में जीडीए के नियमों का पालन करेंगे।
राजनीतिक प्रतिक्रिया:
मस्जिद के ध्वस्तीकरण आदेश के विरोध में कांग्रेस पार्टी के नेता भी सामने आए हैं। प्रदेश उपाध्यक्ष विश्वविजय सिंह के नेतृत्व में कांग्रेसियों ने कमिश्नर कार्यालय में ज्ञापन सौंपा, जिसमें उन्होंने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई और मस्जिद को संरक्षित रखने की मांग की।
गोरखपुर की अबू हुरैरा मस्जिद का मामला अवैध निर्माण और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच संतुलन की आवश्यकता को उजागर करता है। जहां एक ओर कानून का पालन आवश्यक है, वहीं धार्मिक स्थलों के प्रति संवेदनशीलता भी महत्वपूर्ण है। आगामी 3 मार्च को मंडलायुक्त न्यायालय में होने वाली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं, जो इस मामले में अंतिम निर्णय की दिशा तय करेगी।