उत्तराखंड हादसे में दबने वाले मजदूरों की संख्या कितनी? प्रशासन दे रहा अलग-अलग आंकड़े 


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-03-02 17:20:36



 

उत्तराखंड के चमोली जिले के माणा गांव में शुक्रवार सुबह एक भीषण हिमस्खलन की घटना घटी, जिसमें सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के कई मजदूर दब गए थे। सूचना मिलते ही पुलिस एवं प्रशासन द्वारा राहत एवं बचाव कार्य प्रारंभ किया गया। मौसम में थोड़ी राहत के साथ, तीन घायल कर्मियों को भारतीय सेना द्वारा हेलीकॉप्टरों के माध्यम से गंभीर चिकित्सा के लिए माणा से जोशीमठ ले जाया गया है। 

मजदूरों की संख्या को लेकर मतभेद 

ताजा जानकारी के अनुसार चमोली के डीएम संदीप तिवारी के अनुसार 57 मजदूर बर्फ़ के नीचे दब गए थे जिनमे से अब तक 32 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है, जबकि 25 अभी भी लापता हैं। वहीं दूसरी ओर चमोली पुलिस ने हिमस्खलन में फंसे 55 श्रमिकों के नामों की सूची जारी की है। राज्य आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार 33 श्रमिकों को बचा लिया गया है 22 की तलाश जारी है। पुलिस के अनुसार वहां कुल 55 श्रमिक थे।

बहरहाल, खराब मौसम के कारण बचाव कार्य में बाधाएँ आ रही हैं, लेकिन राहत दल पूरी तत्परता से शेष मजदूरों की खोज में जुटे हुए हैं।

हिमस्खलन की घटना और बचाव कार्य 

शुक्रवार सुबह लगभग 7:15 बजे, माणा गांव के निकट एक ग्लेशियर टूटने से हिमस्खलन हुआ, जिसमें बीआरओ के कई मजदूर बर्फ़ के नीचे फंस गए। भारतीय सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की टीमें संयुक्त रूप से बचाव कार्य में लगी हुई हैं। हालांकि, लगातार हो रही बर्फबारी और बारिश के कारण बचाव कार्य में कठिनाइयाँ आ रही हैं। खराब मौसम और नए हिमस्खलन की आशंका के चलते बचाव अभियान को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा है। मौसम में सुधार होते ही अभियान पुनः शुरू किया जाएगा।

मुख्यमंत्री और अधिकारियों की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए कहा, "हमारा प्रयास है कि जल्द से जल्द सभी को सुरक्षित बचाया जाए।" उन्होंने बचाव कार्यों में जुटी टीमों की सराहना की और शेष मजदूरों की सुरक्षित वापसी के लिए प्रार्थना की।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कहा, "आज जोशीमठ (उत्तराखंड) के माणा क्षेत्र में एक दुर्भाग्यपूर्ण हिमस्खलन हुआ, जिससे बीआरओ का जीआरईएफ कैंप प्रभावित हुआ है। स्थिति के बारे में मुख्यमंत्री पुष्कर धामी से बात की। प्रशासन प्रभावितों को हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है।"

भविष्य की चुनौतियाँ और सतर्कता

इस घटना ने 2021 में चमोली जिले में हुई ग्लेशियर त्रासदी की यादें ताज़ा कर दी हैं, जब नंदा देवी ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने से भारी तबाही मची थी। वर्तमान में, खराब मौसम और भारी बर्फबारी के कारण बचाव कार्य में कठिनाइयाँ आ रही हैं, लेकिन सभी एजेंसियाँ मिलकर प्रयास कर रही हैं कि अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सके।


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